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जानिए, चीन ने क्‍यों किया युआन को डीवैल्‍युएट, छिड़ सकती है करंसी वॉर

चीन के केंद्रीय बैंक ने नए रिफॉर्म लागू करने के लिए युआन को तीन दिन में दो बार डीवैल्‍युएट किया है।

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नई दिल्ली। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन ने अपनी करंसी युआन की वैल्‍यू घटा दी है। दरअसल किसी भी देश की इकोनॉमी में उसकी करंसी की भूमिका अहम होती है। जबकि घरेलू मार्केट से लेकर इंटरनेशनल मार्केट तक कीमतों में उतार-चढ़ाव को करंसी की वैल्यू ही तय करती है। चीन ने अपने एक्‍सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए ही युआन का डीवैल्‍युएशन किया है। चीन के केंद्रीय बैंक ने नए रिफॉर्म लागू करने के लिए युआन को तीन दिन में दो बार डीवैल्‍युएट किया है। जिससे कि डॉलर के मुकाबले युआन तीन साल के निचले स्‍तर पर आ गया है। वहीं, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने एक डॉलर की कीमत 6.401 युआन तय कर दिया है। युआन के डीवैल्‍युएशन का असर रुपए पर भी पड़ा है और यह डॉलर के मुकाबले पहले से कमजोर हुई है। जबकि युआन के वैल्‍यू में हो रही गिरावट एक तरह से करंसी वॉर को बुलावा दे रही है, क्योंकि इसकी वजह से दूसरे देश भी अपनी करंसी वैल्‍यू को घटाने की कोशिश करेंगे। जिसका बुरा असर ग्‍लोबल इकोनॉमी पर पड़ेगा।
 
युआन को डीवैल्‍युएट करने की वजह
 
दरअसल चीन सुस्‍ती की चपेट में है और उसकी विकास दर घट रही है। जबकि चीन इस साल 7 फीसदी का विकास दर हासिल करना चाहता है। अर्थव्यवस्था में सुस्‍ती के संकेत और एक्‍सपोर्ट में 8 फीसदी की गिरावट के कारण चीन ने अपनी करंसी युआन को डीवैल्‍युएट किया है। क्‍योंकि युआन का डीवैल्‍युएशन करने से चीन का एक्‍सपोर्ट सस्‍ता हो जाएगा। इससे उसका एक्‍सपोर्ट के साथ विकास दर भी तेज होगी। इसके अलावा चीन अपनी करंसी युआन को आईएमएफ के रिजर्व करंसी बास्केट में शामिल कराना चाहता है। ताकि अन्‍य देशों में भी युआन का इस्‍तेमाल किया जा सके।
 
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रुपए से कैसे अलग है युआन करंसी
 
भारत में रुपए की कीमत बाजार तय करता है और इसमें ज्यादा गिरावट पर रिजर्व बैंक हस्तक्षेप करता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर वह डॉलर बेचकर रुपए को संभालता भी है, लेकिन कीमत पर अंकुश नहीं लगाता। जबकि चीन में ऐसा नहीं है। युआन की कीमत सरकार के द्वारा नियंत्रित की जाती है।
 
भारत के एक्‍सपोर्ट पर पड़ेगा असर
 
युआन को डीवैल्‍युएट करने के चीन के फैसले का भारत पर बुरा असर पड़ेगा। युआन में गिरावट के साथ पहले से ही मुश्किलें झेल रही घरेलू इंडस्ट्री के हालात और बुरे हो जाएंगे। जबकि युआन का डीवैल्युएशन करने से न केवल भारत का चीन को किया जाने वाला एक्‍सपोर्ट घटेगा, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी चीन में बना हुआ सामान सस्‍ता हो जाएगा। इससे चीन का निर्यात बढ़ेगा और उसका असर भारतीय एक्‍सपोर्ट पर पड़ सकता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्टील, हैंडीक्रॉफ्ट, लेदर, टेक्सटाइल्स और जेम्स एंड ज्वैलरी पर देखने को मिल सकता है, क्योंकि इन सेक्टरों में किया जाने वाला भारतीय एक्‍सपोर्ट ही चीन का मुकाबला कर पाने में सक्षम हैं। वहीं स्टील के अलावा टायर सेक्टर में भी चीन का एक्सपोर्ट लगातार बढ़ रहा है, जो भारतीय कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। जबकि पावर सेक्टर में भी यही स्थिति है।
 
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युआन से ग्‍लोबल इकॉनोमी भी प्रभावित
 
युआन की वैल्यू घटाने के फैसले से ग्लोबल इकोनॉमी की चिंता बढ़ गई है। यह ग्लोबल इकोनॉमी के लिए बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। इससे दुनियाभर में मंदी का संकेत जाएगा। क्‍योंकि दुनिया के किसी भी देश की इकोनॉमी में उसकी मुद्रा की भूमिका अहम होती है। चूंकि घरेलू मार्केट से लेकर इंटरनेशनल मार्केट तक कीमतों में उतार-चढ़ाव करंसी की वैल्यू तय करती है। वहीं भारत और दुनिया के अन्‍य देशों का आपसी कारोबार डॉलर पर निर्भर करता है। ऐसे में डॉलर के मुकाबले रुपए की जितनी वैल्यू होगी, उसी के आधार पर उसका एक्सपोर्ट एवं इंपोर्ट का मूल्य भी तय होगा। अब जहां चीन ने युआन की वैल्‍यू कम दी है, उस स्थिति में रुपए की वैल्‍यू डॉलर के मुकाबले कम हुए हैं जिसका सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा।
युआन की वैल्‍यू घटने से करंसी वॉर की आशंका
 
दरअसल चीनी युआन के डीवैल्‍युएशन के बाद एशियाई करंसी में गिरावट जारी है। जहां भारतीय रुपया दो साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है। वहीं इंडोनेशिया का रुपे और मलेशिया का रिंगिट 17 साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गया है। जबकि ऑस्‍ट्रेलियन और न्‍यूजीलैंड का डॉलर छह साल के लोवर लेवल पर है। चीनी सेंट्रल बैंक के इस कदम से विश्‍व के सभी केंद्रीय बैंक की नींद उड़ गई है, क्‍योंकि अमूमन सभी देशों की करंसी कई साल के निचले स्‍तर पर पहुंच गई है। इससे दुनिया की अन्‍य अर्थव्‍यवस्‍थाओं में इस तरह की जंग की शुरुआत हो सकती है जिससे डॉलर, युआन और यूरो के बीच एक प्रतिस्‍पर्धा बढ़ेगी।
 
दुनिया में पहला करंसी वॉर 1921  से 1936  के बीच पहले और दूसरे विश्‍वयुद्ध के दौरान चला था। इसके बाद दूसरा करंसी वॉर तब चला, जब 1967 में स्‍टर्लिंग का डीवैल्‍युएशन किया गया था। अब तीसरे करंसी वॉर की शुरुआत चीन ने अमेरिकी ब्‍याज दरें बढ़ने की आशंका और विकास को बढ़ावा देने के लिए युआन को डीवैल्‍यूएट करके की है।
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