Home »Do You Know »Economy »Facts» All You Wanted To Know About MAT

जानिए, क्‍या है MAT, इसे खत्‍म करने से FII को क्या होगा फायदा

नई दिल्ली।मिनिमम अल्‍टरनेट टैक्‍स (मैट) कहलाता है। यह टैक्‍स ऐसी कंपनियों पर लगाया जाता है जो मुनाफा कमाती है। लेकिन रियायतों की वजह से इन पर टैक्‍स की देनदारी कम होती है। दरअसल मुनाफे पर 18.5 फीसदी से कम टैक्स देने वाली कंपनियों को 18.5 फीसदी तक मैट देना होता है। इसी वजह से विदेशी कंपनियां भारत में ज्‍यादा निवेश करने से कतराती है। इसको देखते हुए एफआईआई ने सरकार से मैट को खत्‍म करने की मांग की थी। जिसके बाद सरकार ने वित्‍त वर्ष 2015-16 के बजट में इसको समाप्‍त करने की घोषणा की थी। इससे विदेशी निवेश में तेजी आई और निवेश भी बढ़ा। लेकिन कुछ निवेशकों को मैट का भुगतान 1 अप्रैल, 2015 से पहले के निवेश पर करने को लेकर दी गई नोटिस के बाद विवाद खड़ा हो गया। इससे निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ गया और विदेशी निवेश में कमी आई है जिसका असर सरकार की छवि पर भी पड़ा है।
 
क्‍या है मामला
 
दरअसल इनकम टैक्‍स डिपार्टमेंट ने 68 विदेशी निवेशकों को 602.83 करोड़ रुपए का मैट चुकाने का नोटिस थमाया। यह नोटिस 1 अप्रैल, 2015 से पहले के निवेश पर टैक्‍स चुकाने को लेकर दिया गया। इस नोटिस में पिछले 3 साल की अवधि में कुछ पूंजी लाभ पर 20 फीसदी के रेट से 602 करोड़ रुपए का टैक्‍स मांगा गया। हालांकि, कुछ निवेशकों ने इस नोटिस के खिलाफ याचिका भी दायर की है। वहीं, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय का कहना है कि अगर कोई विदेशी निवेशक किसी ऐसे देश से रिश्‍ता  रखता है। जिसके साथ भारत का डबल टैक्सेशन अवॉयडेंस करार है तो उस पर यह टैक्स डिमांड नोटिस लागू नहीं होगा जबकि अन्य को इस टैक्‍स का भुगतान करना होगा।
 
अगली स्‍लाइड में जानिए,क्या है मैट और इससे निवेशक को क्‍या होगा फायदा……….

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Recommendation

    Don't Miss

    NEXT STORY