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    जानिए क्‍या है भ्रामक विज्ञापन विवाद, इन्‍हें रोकने की ये है तैयारी

     
    नई दिल्‍ली।आम्रपाली हाउसिंग के विज्ञापन को लेकर सोशल मीडिया पर हो रहे धोनी के विरोध के बाद किसी प्रोडक्‍ट के विज्ञापन से जुड़े ब्रांड एंबेसडर और सेलिब्रिटीज को जवाबदेह बनाने की तैयारी सरकार ने शुरू कर दी है। इसके लिए मोदी सरकार ने कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन बिल, 2015 को संसद में पेश किया है। दरअसल सेंट्रल कंज्‍यूमर प्रोटेक्‍शन अथॉरिटी (सीसीपीए) ने भ्रामक विज्ञापनों में शामिल सेलिब्रिटीज को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। सीसीपीए की सिफारिशों के मुताबिक अब विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज की कानूनी जवाबदेही तय की जाएगी। नए प्रावधान के तहत भ्रामक या गलत विज्ञापन करने वाले सेलिब्रिटीज को सजा के साथ-साथ जुर्माना भी देना होगा। इसकी मॉनिटरिंग की जिम्‍मेदारी एडवरटाइजिंग स्‍टैंर्डड कौंसिंल ऑफ इंडिया (एएससीआइ) को दी गई है। आइए हम जानते हैं भ्रामक विज्ञापन के लिए नई गाइडलाइन क्‍या है।
     
    क्‍या है भ्रामक विज्ञापन विवाद
     
    आमतौर पर किसी सर्विस या प्रोडक्‍ट के प्रचार के लिए कंपनिया सेलिब्रिटीज को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाती है जिसमें क्रिकेटरों के साथ-साथ बॉलीवुड के प्रमुख चेहरे भी शामिल होते हैं। यही वजह है कि भारत के बड़े सितारों की सालाना ब्रांड वैल्‍यू 5 हजार करोड़ रुपए से ऊपर है, इसमें खेल एवं अभिनय से जुड़े हुए सभी बड़े नाम शामिल हैं। अब नए प्रावधान के तहत विज्ञापन करने वालों को उन उत्पादों की भी जिम्मेदारी लेनी होगी जिसका ये लोग प्रचार करते हैं। दरअसल इस कवायद की आवश्‍यकता इन सेलिब्रिटीज द्वारा किए जाने वाले प्रोडक्‍टस की गुणवत्‍ता एवं उसकी विश्‍वनीयता को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा होने की वजह से लिया गया है।
     
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