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जानिए, क्‍या है पीएमआई, यह इकोनॉमी पर कैसे डालता है असर

नई दिल्‍ली। पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स (पीएमआई) मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर की आर्थिक सेहत को मापने का एक इंडिकेटर है। इसके जरिए किसी देश की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है। पीएमआई सेवा क्षेत्र समेत निजी क्षेत्र की अनेक गतिविधियों पर आधारित होता है। इसमें शामिल तकरीबन सभी देशों की तुलना एक जैसे मापदंड से होती है। पीएमआई का मुख्‍य मकसद इकोनॉमी के बारे पुष्‍ट जानकारी को आधिकारिक आंकड़ों से भी पहले उपलब्‍ध कराना है, जिससे अर्थव्‍यवस्‍था के बारे में सटीक संकेत पहले ही मिल जाते हैं। पीएमआई 5 प्रमुख कारकों पर आधारित होता है। इन पांच प्रमुख कारकों में नए ऑर्डर, इन्‍वेंटरी स्‍तर, प्रोडक्‍शन, सप्‍लाई डिलिवरी और रोजगार वातावरण शामिल हैं।
 
आमतौर पर बिजनेस और मैन्युफैक्चरिंग माहौल का पता लगाने के लिए ही पीएमआई का सहारा लिया जाता है। पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्‍स को 1948 में अमेरिका स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ सप्लाई मैनेजमेंट (आईएसएम) ने शुरू किया जो कि सिर्फ अमेरिका के लिए काम करती है। जबकि मार्किट ग्रुप दुनिया के अन्‍य देशों के लिए काम करती है, जो 30 से ज्‍यादा देशों में करती है। यह दुनिया भर में कारोबारी गतिविधियों के लिए सबसे ज्यादा देखा जाने वाला सूचकांक है। कंपनी अपनी पीएमआई आंकड़ों को स्‍पॉर्सर के नाम के साथ प्रदर्शित करती है। फिलहाल निक्‍केई पीएमआई आंकड़ों के आधार पर भारत में इकोनॉमी की दिशा का अनुमान लगाया जाता है। इससे पहले यही आंकड़ें एचएसबीसी पीएमआई के नाम से जारी होते थे। 
 
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