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जानिए, क्‍या होता है विनिवेश और मोदी सरकार की क्‍या है योजना

नई दिल्‍ली।सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों अथवा उपक्रमों में सरकारी हिस्‍सेदारी को बेचने की प्रक्रिया विनिवेश कहलाती है। दरअसल इस प्रक्रिया के तहत सरकार घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र की उन कंपनियों या उपक्रमों की कुछ हिस्‍सेदारी को शेयर या बांड के रूप में बेचती है। इस प्रक्रिया के तहत मिलने वाले धन का उपयोग सरकार या तो उस कंपनी को बेहतर बनाने में करती है या किसी अन्‍य दूसरी योजनाओं में इसको लगाती है। किसी कंपनी का विनिवेश का मकसद कंपनी का प्रबंधन बेहतर बनाना होता है। सार्वजनिक क्षेत्र में करीब एक दर्जन ऐसे उपक्रम हैं जिनमें सरकार की हिस्सेदारी 90 फीसदी और 99 फीसदी के बीच है।
 
दरअसल विनिवेश का विचार आर्थिक उदारीकरण प्रक्रिया के बाद सामने आया जिसके बाद सरकार ने घाटे वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों और उपक्रमों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाना शुरू कर दिया। चूंकि सरकार का काम देश चलाना होता है न कि कारोबार करना। मोदी सरकार ने इस साल विनिवेश के जरिए 70 हजार करोड़ रुपए जुटाने की योजना बनाई है। सरकार ने अब तक 3 पीएसयू कंपनियों में हिस्‍सेदारी बेचकर 3 हजार करोड़ रुपए जुटाए हैं। जिन 3 पीएसयू कंपनियों का विनिवेश किया गया है उसमें पीएफसी, आरईसी और ड्रेजिंग कॉर्प शामिल है। वहीं, इस वर्ष तकरीबन दो दर्जन कंपनियां विनिवेश की कतार में हैं  जिसमें ओएनजीसी, एनएमडीसी और नाल्को शामिल है।
 
इसके अलावा सरकार ने आईओसी में भी विनिवेश का फैसला लिया है। जिसके तहत सरकार इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन में अपनी 10 फीसदी हिस्‍सेदारी बेचेगी। जिसमें सरकार की हिस्‍सेदारी 68.57 फीसदी है। आईओसी से सरकार को 9500 करोड़ रुपए मिलने की उम्‍मीद है।
 
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