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जानिए, क्‍या होता है कॉरपोरेट एफडी, कंपनियां क्‍यों लाती हैं ये स्‍कीम

नई दिल्‍ली।आमतौर पर निवेशक बेहतर रिटर्न पाने के लिए बैंक, पोस्‍ट ऑफिस और फाइनेंस कं‍पनियों के एफडी स्‍कीम में निवेश करते हैं। आजकल कई कंपनियां बड़े रिटर्न के साथ फिक्‍स डिपॉजिट (एफडी) स्‍कीम में निवेश करने के लिए निवेशकों को ऑफर दे रहीं हैं। इस स्‍कीम के तहत ये कंपनियां निवेशक को एफडी पर ज्‍यादा इंटरेस्‍ट और बेहतर रिटर्न देने का वादा भी कर रहीं हैं। कॉरपोरेट एफडी पर कंपनियां बैंक, पोस्‍ट ऑफिस और अन्‍य फाइनेंस कंपनियों की तुलना में 1-2 फीसदी ज्‍यादा इंटरेस्‍ट देती हैं। कारपोरेट एफडी के लिए तकरीबन 300 कंपनियों ने स्‍कीम निकाली है। 
 
हांलाकि, निवेशकों के लिए बैंक, पोस्‍ट ऑफिस और अन्‍य फाइनेंस कपनियों में निवेश करने की बजाय कॉरपोरेट एफडी में निवेश करना जोखिम भरा है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह आवश्‍यक है कि इसमें निवेश करने से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग और कारोबारी रिकॉर्ड की पूरी जानकारी हासिल करके ही वह निवेश करें।
 
क्‍या होता है कॉरपोरेट एफडी
 
दरअसल कंपनियां अपनी जरूरतों के लिए पूंजी जुटाने का काम करती हैं। कंपनियां एक निश्‍चित अवधि के लिए निवेशक से यह पूंजी लेती हैं जिसे कॉरपोरेट एफडी कहते हैं। इसके लिए वह निवेश्‍क से विज्ञापन के जरिए निवेश करने के लिए कहती हैं। आमतौर पर निवेशक को आकर्षित करने के लिए इस एफडी पर कंपनियां बैंक और अन्‍य फाइनेंस कंपनियों से ज्‍यादा ब्‍याज देती हैं। क्‍योंकि, इन कंपनियों के पास कंपनी कानून तहत डिपॉजिट लेने का अधिकार होता है। चूंकि कंपनियों के कॉरपोरेट एफडी पर ब्‍याज दर अधिक होता है इसलिए इसमें निवेश करना बेहतर होता है।
 
कॉरपोरेट एफडी की अवधि
 
सामान्‍य तौर पर कॉरपोरेट एफडी के तहत कंपनियां जो डिपॉजिट लेती हैं उसकी मेच्‍योरिटी अवधि छह  महीने से लेकर 36 महीने तक की होती है। क्‍योंकि कोई भी कंपनी इससे कम और ज्‍यादा अविध की कॉरपोरेट एफडी के तहत डिपॉजिट नहीं ले सकती है। इसके साथ ही इसके तहत डिपॉजिट लेने के लिए कंपनी का नेटवर्थ न्‍यूनतम 100 करोड़ रुपए या 500 करोड़ रुपए तक का टर्नओवर होना आवश्‍यक है।
 
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