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जानिए रेल और आम बजट के मर्जर से रेलवे को क्‍या होगा फायदा

मोदी कैबिनेट ने साल 1924 से अलग से पेश किए जा रहे रेल बजट को आम बजट के साथ मर्जर की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पिछले 92 साल से चली आ रही रेल बजट पेश करने की पंरपरा समाप्‍त हो जाएगी।

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नई दिल्‍ली। मोदी कैबिनेट ने साल 1924 से अलग से पेश किए जा रहे रेल बजट को आम बजट के साथ मर्जर की मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पिछले 92 साल से चली आ रही रेल बजट पेश करने की पंरपरा समाप्‍त हो जाएगी। अब वित्‍त वर्ष 2017-18 से आम और रेल बजट एक साथ पेश किया जाएगा। आम बजट में मर्जर के बाद रेलवे को सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। हालांकि, आम बजट में मर्जर के बाद रेलवे की ऑटोनॉमी कायम रहेगी। ऐसे में आइए जानते हैं आम बजट में मर्जर से रेलवे को क्‍या होगा फायदा....
 
 
अगली स्‍लाइड में जानें, रेल और आम बजट के मर्जर से रेलवे को क्‍या होगा फायदा....
 
 
 

 
1924 से पहले एक साथ पेश होता था बजट
 
आजादी से पहले भारत में रेल और आम बजट एक साथ पेश किया जाता था, जिसमें रेल बजट की हिस्सेदारी करीब 70 फीसदी थी। रेल बजट को आम बजट से अलग से पेश करने का प्रस्‍ताव ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एम एक्वर्थ ने 1924 में किया था। इसके बाद पहला रेल बजट पेश किया गया था। आमतौर पर फरवरी के आखिरी हफ्ते में आम बजट से दो दिन पूर्व रेल बजट पेश किया जाता है।
 
 
 
मर्जर के बाद रेलवे को नहीं देना होगा डिविडेंट
 
आम बजट में रेल का एक्सपेंडिचर और नॉन-एक्सपेंडिचर खर्च का पूरा ब्यौरा होगा। आम बजट में मर्जर के बाद इंडियन रेलवे को डिविडेंट देने की जरूरत नहीं होगी। इससे रेलवे को कर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी। दरअसल रेलवे सरकार को हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए का डिविडेंट देती है, जिसके बदले में आम बजट से रेलवे को 40 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए जाते हैं। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि रेलवे का फायदा देखते हुए ही रेल बजट को आम बजट के साथ पेश करने का फैसला किया गया है।
 
 
 
बिबेक देबरॉय पैनल की सिफारिश के बाद मर्जर
 
रेल बजट का आम बजट में मर्जर से पहले, बजट के इस पर विचार करने के लिए बिबेक देबरॉय पैनल का गठन किया गया था। पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा था रेल बजट सिर्फ लोकप्रिय उपाय का जरिया बन गया है। रेल बजट में नई ट्रेन चलाना, नए रूट्स और नई फैक्ट्रीज की घोषणा की जाती है, लेकिन रेलवे के स्ट्रक्चर को लेकर कुछ नहीं किया जाता। मर्जर की कवायद का मकसद रेलवे के कामकाज में सुधार लाकर उसे ज्यादा कारगर बनाना है। वहीं, आम बजट और रेल बजट में मिला देने से नकदी की दिक्कत का सामना कर रहे रेलवे को हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए की बचत होगी।
 
 
 
देश की सबसे बड़ी इम्‍प्‍लॉयर है इंडियन रेलवे  
 
भारतीय रेल देश की सबसे बड़ी इम्‍प्‍लॉयर है। पहली बार 1924 में आम बजट से अलग रेल बजट पेश किया गया था। सातवें पे-कमीशन की सिफारिशें लागू होने से रेलवे को करीब 40 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्‍त खर्च करने पड़ रहे हैं। यह रेलवे की ओर से पैसेंजर सर्विस के लिए दी जा रही 33 हजार करोड़ की सालाना सब्सिडी से अलग है। इसके अलावा रेलवे को 458 अनफिनिश्‍ड और चालू प्रोजेक्‍ट पूरा करने के लिए कुल 4.83 लाख करोड़ रुपए की जरूरत है। दोनों बजट के मर्जर के बाद रेलवे का रेवेन्‍यू डेफिसिट और कैपिटल एक्‍सपेंडीचर को अब फाइनेंस मिनिस्‍ट्री को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
 
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