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जानि‍ए क्या है जीएसटी और उससे जुड़ी 12 अहम बातें

जानि‍ए क्या है जीएसटी और उससे जुड़ी 12 अहम बातें
नई दिल्‍ली।  गुड्स एंड सर्विस टैक्‍स यानी जीएसटी आजादी के बाद का देश का सबसे बड़ा टैक्‍स सुधार है। इससे पूरे देश में एक समान टैक्‍स कानून लागू हो जाएगा। यह केंद्र और राज्यों के 20 से ज्यादा इनडायरेक्ट टैक्स की जगह लेगा। जीएसटी लागू होने के बाद एक्साइज ड्यूटी, सर्विस टैक्स, एडिशनल कस्टम ड्यूटी, स्पेशल एडिशनल ड्यूटी ऑफ कस्टम, वैट/सेल्स टैक्स, सेंट्रल सेल्स टैक्स, मनोरंजन कर, ऑक्ट्रॉय एंड एंट्री टैक्स, लग्जरी जैसे टैक्स खत्म होंगे।
 
केवल तीन तरह के टैक्स
 
जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं एवं सेवाओं पर केवल तीन तरह के टैक्स वसूले जाएंगे। पहला सीजीएसटी, यानी सेंट्रल जीएसटी, जो केंद्र सरकार वसूलेगी। दूसरा एसजीएसटी, यानी स्टेट जीएसटी, जो राज्य सरकार अपने यहां होने वाले कारोबार पर वसूलेगी। कोई कारोबार अगर दो राज्यों के बीच होगा तो उस पर आईजीएसटी, यानी इंटीग्रेटेड जीएसटी वसूला जाएगा। इसे केंद्र सरकार वसूल करेगी और उसे दोनों राज्यों में समान अनुपात में बांट दिया जाएगा।
 
 
क्‍या हैं जीएसटी के अहम प्रोवीजन
 
1 अधिकतम टैक्‍स40फीसदी -जीएसटी काउंसिल ने हालांकि टैक्‍स की चार दरें 5, 12, 18 और 28 फीसदी की तय की हैं। लेकिन अगर कोई बड़ी जरूरत पड़ती है तो इसे बढ़ा कर 40 फीसदी भी किया जा सकता है। इस बात का प्रावधान अभी से जीएसटी बिल में किया गया है। हालांकि अभी जीएसटी की अधिकतम दर 28 फीसदी ही रहेगी।
 
2 डिमेरिट गुड्स पर सेस: पान मसाला पर मैक्सिमम 135 फीसदी, सिगरेट पर 290 फीसदी, लग्जरी कार और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स पर 15 फीसदी तक सेस लगाने का प्रावधान है।
 
3 टैक्‍स चोरी पर जेल: 5 करोड़ से ऊपर की टैक्‍स चोरी गैर जमानती होगी, इसमें 5 साल तक जेल का प्रावधान है। टैक्‍स पेमेंट में देरी पर अधि‍कतम 18 फीसदी तक ब्‍याज देना पड़ सकता है। 
 
4 मुनाफाखोरी पर लगाम: जिन वस्तुओं पर कम टैक्स लगेगा, उसका फायदा कस्टमर को मिलेगा। ऐसा नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी। नजर रखने के लिए अथॉरिटी बनेगी।
 
5 छोटे बिजनेस को राहत: सालाना 50 लाख रुपए तक बिजनेस करने वाले मैन्युफैक्चरर्स को टर्नओवर पर 2 फीसदी (1 फीसदी सीजीएसटी और 1 फीसदी एसजीएसटी) तक टैक्स देना होगा। रेस्‍टोरेंट के लि‍ए 5 फीसदी (2.5 फीसदी सीजीएसटी और 2.5 फीसदी एसजीएसटी), ट्रेडर्स के लि‍ए 1 फीसदी (0.5 फीसदी सीजीएसटी और 0.5 फीसदी एसजीएसटी) टैक्‍स का प्रावधान है।  20 लाख रेवेन्‍यू वाले बि‍जनेस जीएसटी के दायरे से बाहर होंगे, हालांकि‍ कुछ राज्‍यों में यह सीमा 10 लाख रुपए सालाना है।
 
6 ई-कॉमर्स पर भी जीएसटी: ई-कॉमर्स कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले सप्लायर्स को भुगतान करने से पहले टैक्स काटेंगी। यह अधिकतम 2 फीसदी होगा। इसमें 1 फीसदी सीजीएसटी और 1 फीसदी एसजीएसटी।
 
क्‍या होगा फायदा
 
1 किसी भी राज्य में सामान का एक दाम -अभी हम अलग-अलग सामान पर 30 से 35% टैक्स देते हैं। जीएसटी में कम टैक्स लगेगा। सभी राज्यों में सभी सामान एक कीमत पर मिलेगा। अभी एक ही चीज दो राज्यों में अलग-अलग दाम पर बिकती है, क्योंकि राज्य अपने हिसाब से टैक्स लगाते हैं।
 
2 बढ़ सकती है ग्रोथ रेट - स्टडी के मुताबिक, इससे देश की जीडीपी ग्रोथ रेट एक से दो फीसदी तक बढ़ सकती है। इसके न केवल नई नौकरियां पैदा होंगी, बल्कि प्रोडक्टिविटी भी बढ़ेगी।
 
3 कर विवाद में कमी -कई बार टैक्स देने से छुटकारा मिल जाएगा। इससे कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारियों द्वारा कर में हेराफेरी की संभावना भी कम हो जाएगी। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे।
 
4 कम होगी सामान की कीमत -फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है।
 
5 लागत घटेगी - जीएसटी लागू होने पर कंपनियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा. सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी. जब सामान बनाने की लागत घटेगी तो इससे सामान सस्ता भी होगा।
 
6 उत्‍पादन की कीमत घटेगी - अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे कई तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने होते हैं, जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जीएसटी लागू होने से ऐसा नहीं होगा।
 
 
 
 
 
 
 
 

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