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जानिए क्‍या होता है मनी बिल, आधार एक्‍ट को लेकर क्‍या है विवाद

आधार बिल को मनी बिल के तौर पर लोकसभा से पास कराने को लेकर विवाद है, क्‍योंकि इस बिल को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई है।

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नई दिल्‍ली। आधार बिल को मनी बिल के तौर पर लोकसभा से पास कराने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बिल को कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। कांग्रेस ने कोर्ट में दलील दी है कि आधार बिल को मनी बिल के तौर पर लोकसभा से पास नहीं कराया जा सकता, क्‍योंकि मनी बिल और आम बिल में फर्क होता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि मनी बिल क्‍या होता है और इस तरह के बिल को संसद से पास कराने की प्रक्रिया क्‍या है।      
 
 
 
क्‍या होता है मनी बिल
 
 
मनी बिल वह बिल होता है, जिसमें केवल धन से जुड़े हुए प्रस्ताव शामिल किया गया हो। इस बिल के अंतर्गत सिर्फ राजस्व और खर्च से जुड़े हुए मामले ही आते हैं। मनी बिल पर राज्यसभा में सिर्फ चर्चा हो सकती है, लेकिन उस बिल पर राज्‍यसभा में वोटिंग नहीं हो सकती है। इसके अलावा मनी बिल पर राज्यसभा सिर्फ अपनी राय दे सकती है, लेकिन उसमें कोई संशोधन नहीं कर सकती और ना ही कोई प्रस्‍ताव ला सकती है। लोकसभा मनी बिल पर दी गई सलाहों को मानने और न मानने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र है। आम तौर पर मनी बिल को लोकसभा में ही पेश किया जाता है और उस पर अंतिम फैसला लोकसभा ही लेती है।
 
 
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लोकसभा में पेश होता है मनी बिल  
 
मनी बिल को लोकसभा में एक साधारण बिल की तरह ही पेश किया जाता है। इस बिल को मनी बिल तभी माना जाता है जब इसमें धन से जुड़े हुए प्रस्‍तावों के तहत राजस्व और खर्च के अलावा और प्रस्ताव को शामिल किया गया हो। इस मामले में स्पीकर का निर्णय अंतिम होता है। कोई भी बिल मनी बिल है या नहीं है इस पर फैसला लोकसभा स्पीकर करते हैं जिसकी चर्चा संविधान की धारा 110 (3) में की गई है। लोकसभा से पास होने के बाद मनी बिल राज्‍यसभा में चर्चा के लिए भेजा जाता है। अगर 14 दिनों में के भीतर राज्यसभा मनी बिल लोकसभा को वापस नहीं भेजता है तो इसको दोनों सदनों के द्वारा पास समझा जाता है जिसकी चर्चा (अनुच्छेद 109) में की गई है।
 
मनी बिल से जुड़ी अहम बातें
 
भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 110 में मनी बिल यानी धन विधेयक की परिभाषा दी गई है। इस अनुच्छेद के मुताबिक कोई भी बिल मनी बिल तभी समझा जाएगा। यदि उसमें नीचे दिए गए इन सभी विषयों को शामिल किया गया हो।
 
टैक्‍स लगाना, कम करना अथवा बढ़ाना, उसको नियमित करना या उसमें कोई बदलाव करना आदि शामिल हो। 
भारत सरकार की ओर से लोन लेना, नियमित करना या किसी आर्थिक भार में कोई बदलाव करना शामिल किया गया हो।
 
भारत की संचित निधि या आकस्मिक निधि में कुछ धन डालना हो या निकालना हो या किसी व्यय के संबंध में धन दिया जाना हो।
 
भारत की जमा पूंजी में से किसी भी व्यय के लिए धन दिए जाने की घोषणा करना या बढ़ाना आदि। इसके अलावा धन की आय तथा व्यय से संबंधित अन्य प्रकार का मामला मनी बिल के तहत आता है।
 
 
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आधार को मनी बिल बनाने पर विवाद
 
आधार बिल को मनी बिल के रूप में संसद से पास कराने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि इसका उद्देश्य सरकारी पैसे को जरूरतमंद लोगों को सब्सिडी के रूप में देना है। इसीलिए इसको मनी बिल के रूप में लोकसभा में पेश किया गया। वहीं कांग्रेस ने आधार बिल का विरोध करते हुए यह कहा कि आपत्ति इस बिल से नहीं, बल्कि इसे मनी बिल के तौर पर लोकसभा में पेश करने को लेकर है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया, क्योंकि सरकार राज्यसभा में विपक्ष का सामना करने से बचना चाहती थी। 
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