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ई-वे बिल में हैं 4 तरह के फॉर्म्स, इन लोगों के लिए होगा जरुरी

ई-वे बिल में हैं 4 तरह के फॉर्म्स, इन लोगों के लिए होगा जरुरी

नई दिल्ली। ई-वे बिल 1अप्रैल से लागू हो गया है। ऐसे में कारोबारियों को ये जानना जरूरी है कि जीएसटी की तरह ई-वे बिल में कितने फॉर्म है जिसे कारोबारियों को भरना होगा। ई-वे बिल में चार तरह के फॉर्म है जो अलग-अलग डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर, ट्रांसपोर्टर भरेंगे।

 

4 तरह के हैं ई-वे बिल

 

-वे बिल-1

 

ई-वे बिल-1 गुड्स के लिए है। यानी डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर जो 50 हजार रुपए का स्टॉक एक राज्य से दूसरे राज्य में भेज रहे हैं, उन्हें ई-वे बिल-1 भरना होगा। ये ई-वे बिल सबके लिए एक है जो कोई भी भर सकता है।

 

-वे बिल-2

 

ई-वे बिल-2 ट्रासपोटर्स को भरनी है। कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल, ई-वे बिल-2 फॉर्म के जरिए भरा जाएगा। कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल में एक ही व्हीकल में अलग-अलग डीलर्स, प्रोडक्ट का सामान भेजने पर कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बनेगा। ये कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल ज्यादातर ट्रांसपोर्टर्स को भरना होगा। ट्रांसपोर्टर्स अगल-अगल डीलर्स के लिए एक कन्सॉलिडेटेड ई-वे बिल बना सकता है।

 

-वे बिल-3

 

ई-वे बिल-3 वैरिफिकेशन फॉर्म है जिसे जीएसटी अधिकारी भरेंगे। इस फॉर्म में प्रोडक्ट ले जा रहे है व्हीकल की जानकारी जैसे व्हीकल नंबर, ट्रांसपोर्टर और डीलर का नाम और नंबर होगा। इसके अलावा इसमें प्रोडक्ट की जानकारी होगी। ये फॉर्म डीलर, ट्रांसपोर्टर और जीएसटी अधिकारी कोई भी चेक कर सकता है।


 

-वे बिल-4

 

ई-वे बिल-4 डिटेन्शन फॉर्म है। यानी अगर एक जीएसटी अधिकारी ने अगर 50 ट्रक को वैरिफाई किया है और उसमें से अगर 4 में अधिकारी को कुछ गढ़बढ़ लगता है, तो वह उन व्हीकल और प्रोडक्ट को जब्त कर लेगा। अधिकारी जिन भी ट्रक या प्रोडक्ट को जब्त करता है, वह उसकी जानकारी ई-वे बिल-4 में भरेगा। ई-वे बिल-4 में भरी जानकारी ट्रांसपोर्टर, डीलर, कारोबारी, एक्सपोर्टर, ट्रेडर ऑनलाइन स्वयं भी चेक कर सकते हैं कि उनके कौनसे ट्रक जीएसटी अधिकारी ने जब्त कर लिए हैं।


 

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