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क्‍या है इंद्रधनुष योजना, कैसे प्राइवेट बैंक को टक्‍कर देंगे सरकारी बैंक

बैंकों की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने समय-समय पर जो ऐलान किए थे अथवा जो कदम उठाए थे उसको एक ब्रांड नाम दिया गया है इंद्रधनुष

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नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने पीएसयू बैंको के रिवाइवल के लिए इंद्रधनुष योजना की शुरुआत की है। इस योजना के जरिए सरकार पब्लिक सेक्‍टर के बैंकों की सेहत को सुधारेगी और उनके कामकाज को पारदर्शी बनाएगी। बैंकों की सेहत सुधारने के लिए सरकार ने समय-समय पर जो ऐलान किए थे अथवा जो कदम उठाए थे उसको एक ब्रांड नाम दिया गया है इंद्रधनुष। इस योजना का मकसद पब्लिक सेक्‍टर के बैंकों में चौतरफा सुधार लाना है। ताकि घाटे वाले सरकारी बैंकों का कायाकल्‍प कर उन्‍हें भी प्राइवेट बैंकों की तरह फायदे में लाया जा सके। साथ ही सरकार ने इस योजना के तहत बैंक ब्‍यूरो बनाने की भी घोषणा की है जो कि एक अप्रैल, 2016 से लागू होगी।
 
क्‍या है इंद्रधनुष योजना और इसके काम  
 
पलिब्‍क सेक्‍टर के बैंकों के कामकाज को बेहतर बनाने और प्राइवेट सेक्‍टर के बैंकों के समकक्ष लाने के लिए इंद्रधनुष योजना शुरू की गई है। इस योजना में 7 रिवाइवल प्‍लान है जिसकी मदद से बैंक ज्‍यादा ग्रोथ रेट हासिल कर सकते हैं। इंद्रधनुष योजना में सात रंग की जगह ए से लेकर जी तक 7 अल्फाबेट को शामिल किया गया है। जिसमें ‘ए’ का मतलब अप्‍वाइंटमेंट से है। यानी पल्बिक सेक्‍टर के बैंकों में चेयरमैन कम मैनेजिंग डायरेक्‍टर के पद को दो हिस्‍सों में बांटा गया है। जो कि अब नॉन एग्‍जेक्‍यूटिव चेयरमैन और एमडी एंड सीईओ हो गया है। इन दोनों पदों के अलावा डायरेक्‍टर तक को नियुक्‍त करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया गया है।
‘बी’ का मतलब बैंक बोर्ड ऑफ ब्यूरो से है। छह सदस्‍यों वाले इस ब्यूरो का काम ऊंचे पदों पर नियुक्ति करने के अलावा बैंकों के लिए लंबी अवधि की रणनीति तैयार करना होगा। यह ब्‍यूरो एक अप्रैल, 2016 से अपना काम शुरू कर देगा। जबकि ‘सी’ का मतलब कैपिटलाइजेशन से है। इसके तहत एक तय फॉमूले के अनुसार बैंकों को अगले 4 साल में 70,000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।
 
इंद्रधनुष में ‘डी’ का मतलब डी-स्ट्रेसिंग ऑफ बैंक से है। जिसके तहत बैंकों पर एनपीए यानी डूबते कर्ज के बोझ को कम करना है। इसके अंतगर्त कर्ज की शर्तों में ढील देने के अलावा कर्ज के बोझ में दबे हुए सेक्‍टर और प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करने जैसे कदम शामिल होंगे। वहीं, ‘ई’ का मतलब है एम्पावरमेंट से है यानी कि बैंक अपने कारोबारी फैसले खुद लिया करे। साथ में बैंकों की जिम्मेदारी भी तय की गई है। इसके अलावा बैंकों के परफॉर्मेंस को तय करने के लिए 23 मापदंड भी तय किए गए हैं।
 
‘एफ’ का मतलब है फ्रेमवर्क ऑफ अकाउंटबिलिटी और इंद्रधनुष के आखिरी अल्फाबेट ‘जी’ का मतलब गवर्नेंस से है। यानी कि अब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कामकाज में सरकार की दखलंदाजी नहीं होगी। जबकि सरकार के अधिकार, हिस्‍सेदारी और दखलंदाजी को कम करने के लिए एक होल्डिंग कंपनी बनाने की भी घोषणा की गई है।
 
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सरकारी बैंकों के प्रमुख बने निजी क्षेत्र के एक्‍सपर्ट्स
 
इंद्रधनुष योजना के तहत सरकार ने पल्ब्कि सेक्‍टर के बैंकों में एमडी और सीईओ का पद भी अलग कर दिया है। इसके तहत सरकारी बैकों के प्रमुख के तौर पर निजी क्षेत्र के एक्सपर्ट्स को नियुक्‍त करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जिसके तहत सिटी बैंक के कंज्‍यूमर बैंकिंग हेड पी एस जयकुमार को बैंक ऑफ बड़ौदा का एमडी और सीईओ बनाया है। इसी तरह से माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के पूर्व चेयरमैन रवि वेंकटेशन को बैंक ऑफ बड़ौदा का नॉन एक्जिक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया है। साथ ही पांच अन्य सरकारी बैंकों में नॉन एक्जिक्यूटिव चेयरमैन की नियुक्ति की गई है।
 
4 सालों में सरकार बैंकों को देगी 70,000 करोड़ रुपए  
 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को निजी क्षेत्र के बैंकों के समकक्ष लाने के लिए बनाई गई इंद्रधनुष योजना के तहत सरकार एक महीने के भीतर 13 पीएसयू बैंकों को प्रस्‍तावित 25,000 करोड़ में से 20,088 करोड़ रुपए देगी। सरकार ने यह राशि वित्‍त वर्ष 2015-16 के लिए आवंटित की है। जिसमें से एसबीआई के हिस्‍से में 5531 करोड़ रुपए, बैंक ऑफ इंडिया को 2,455 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। जबकि शेष 5 हजार करोड़ रुपए बैंकों को बेहतर परफॉरमेंस के आधार पर आवंटि किए जाएंगे। इसके अलावा अगले 3 सालों में बैंको को देने के लिए जो राशि प्रस्‍तावित है उसमें 2016-17 में 25,000 करोड़ रुपए, 2017-18 में 10,000 करोड़ और 2018-19 में 10,000 करोड़ रुपए है। साथ ही इंद्रधनुष योजना के सातों अल्फाबेट कितने सक्षम साबित हुए उसकी भी समक्षा की जाएगी। इसके लिए 14 से 16 जनवरी के बीच फिर से ज्ञान संगम का आयोजन किया जाएगा।
 
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वित्‍त वर्ष 2015-16 में किस बैंक को कितना कैपिटल आवंटित किया गया है। इसको आकंड़ों में नीचे दिए गए चार्ट के माध्‍यम से करोड़ रुपए में दिया गया है जो इस प्रकार है:-
 
 
क्रम संख्‍या
बैंक आवंटित राशि (रुपए में)
1
एसबीआई
 
5511 करोड़
2
कॉरपोरेशन बैंक
 
860 करोड़
3
आईडीबीआई बैंक
 
2229 करोड़
4
बैंक ऑफ इंडिया
 
2455 करोड़
5 बैंक ऑफ बड़ौदा
1786 करोड़
 
6 कैनरा बैंक
947 करोड़
 
7 बैंक ऑफ महाराष्‍ट्र
390 करोड़
 
8 आंध्रा बैंक
378 करोड़
 
9 इंडियन ओवरसीज बैंक
2009 करोड़
 
10
यूनियन बैंक
 
1080 करोड़
11
पंजाब नेशनल बैंक
 
1732 करोड़
12 देना बैंक
407 करोड़
 
13 इलाहाबाद बैंक 283 करोड़
कुल   20,088 करोड  
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