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    जानिए, क्‍यों आया है चीन के बाजार में भूचाल, कैसे पड़ेगा दुनिया पर असर

    जानिए, क्‍यों आया है चीन के बाजार में भूचाल, कैसे पड़ेगा दुनिया पर असर
    नई दिल्ली।चीन के शेयर बाजार का बुलबुला फूट गया है और चारो तरफ कोहराम मचा हुआ है। शेयर बाजार में जारी गिरावट की हलचल दुनिया के अन्‍य बाजार में भी देखने को मिल रही है। क्‍योंकि, चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है जिससे दुनिया भर की अर्थव्‍यवस्‍था जुड़ी हुई है। वहीं, ग्रीस के बाद अब भारतीय शेयर बाजार को भी चीन संकट का डर सता रहा है। चीन के बाजार में यह गिरावट पिछले तीन हफ्ते से जारी है। जबकि शंघाई इंडेक्स में 30 फीसदी तक गिरावट आई है।
     
    चीन के बाजार में जारी गिरावट से रिटेल इनवेस्‍टर्स को 3.2 लाख करोड़ डॉलर (201.6 लाख करोड़ रुपए) का चूना लग चुका है। इस गिरावट की मुख्य वजह बाजार में रेग्युलेटर द्वारा की गई सख्ती है। चीन के बाजार में यह गिरावट  मार्जिन ट्रेडिंग पर नियंत्रण की कोशिश के बाद शुरू हुई है। हालांकि रेग्युलेटर ने शेयर बाजार को सहारा देने के लिए आपातकालीन कदम उठाए हैं। लेकिन उनसे शेयर बाजार को काई सहारा नहीं मिला।  
     
    विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का यह नकारात्मक प्रभाव दुनिया की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाल सकता है। आइए यह जानते हैं कि क्‍यों चीन के शेयर बाजार की गिरावट दुनिया भर के लिए चिंता का सबब बनी हुई है।
     
    चीन के शेयर बाजार में गिरावट की वजह
     
    चीन के बाजार में गिरावट की एक वजह बबल बर्स्ट भी हो सकती है। क्‍योंकि गत एक साल में चीन के आर्थिक हालात और नीतियों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इसके बावजूद चीन का बाजार तेजी से बढ़ा। यहां की अर्थव्‍यवस्‍था दुनिया की दूसरी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बन गई। क्‍योंकि यहां का हर छोटा आदमी बाजार में पैसा लगाने लगा था। दरअसल चीन के बाजार का वैल्यूएशन इसकी वास्तविक कमाई से कही ज्यादा है। इसके अलावा  चीन के ग्रोथ रेट में भी कमी आई है। इन्हीं सब कारणों से बाजार पर अचानक यह असर दिख रहा है। बाजार के जानकार इससे चिंतित हैं कि अगर चीन के शेयर बाजार में गिरावट जारी रहा तो इसका असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। वहीं, दुनिया भर के अर्थशास्त्री भी चीन के शेयर बाजार में जारी इस गिरावट से चिंतित हैं। क्‍योंकि इसका असर वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा जो कि ग्रीस संकट से बड़ा होगा।
     
    आर्थिक सुधारों की गति हो सकती है धीमी
     
    शेयर बाजार में आई गिरावट से आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया सुस्त पड़ सकती है। जिसमें से कुछ के संकेत मिलने लगे हैं। जबकि चीन की सरकार लगातार कहती रही है कि वह अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आर्थिक सुधारों में तेजी लाएगी। जिसके लिए सरकार बड़ी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही थी। इन सुधारों में अर्थव्यवस्था से सरकारी नियंत्रण को कम करने की बात भी शामिल है जिसकी मांग अर्थशास्त्री काफी समय से कर रहे हैं। लेकिन शेयर बाजार में गिरावट के बाद आईपीओ की संख्या में कटौती और कई शेयरों में ट्रेडिंग रोकने के साथ सरकार की योजना में देरी होने की आशंका बन गई है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था से सरकारी नियंत्रण हटाने की बात पर भी सरकार फिलहाल हाथ खींच सकती है। अगर सुधार की प्रक्रिया थमती है तो इसका चीन की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
     
    चीन का असर दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर
     
    चीन की अर्थव्यवस्था में होने वाला कोई भी बदलाव दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर काफी बुरा असर डाल सकता है। क्‍योंकि चीन कमोडिटी बाजार का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। चीन की अर्थव्यवस्था में दबाव से मेटल की कीमतों पर लगातार बुरा असर देखने को मिल रहा है। जबकि चीन यूरोप और अमेरिका का दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साथी है। वहीं ग्रीस के मुकाबले अमेरिकी बैंकों का चीन में 10 गुना एक्सपोजर है। यानी चीन की अर्थव्यवस्था में आने वाली मंदी का प्रभाव दुनिया भर कई अर्थव्यवस्थाओं पर भी दिख सकती है। जबकि एक्सपर्ट मान रहे हैं कि चीन से मिले छोटे-मोटे झटके मजबूत अर्थव्यवस्थाएं सहन कर सकती हैं। लेकिन कमजोर अर्थव्यवस्थाओं अथवा ग्रोथ के नाजुक दौर पर खड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर इसका बड़ा असर भी देखने को मिल सकता है।

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