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Pride / कभी सेल्समैन की नौकरी करते थे अजित जैन, अब मिल सकती है वॉरेन बफे के 37 लाख करोड़ के एम्पायर की कमान

वॉरेन बफे ने एजीएम में अजित जैन का नाम लेकर दिए संकेत 

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ओमाहा (अमेरिका). दुनिया के चौथे बड़े अमीर वॉरेन बफे (Warren Buffett) के स्वामित्व वाली कंपनी बर्कशायर हैथवे (Berkshire Hathaway) सालाना शेयरहोल्डर मीटिंग (AGM) शनिवार को संपन्न हो गई। इसके साथ ही वॉरेन बफे (Warren Buffett) के करीबी माने जाने वाले भारतीय मूल के अजित जैन (Ajit Jain) को उनकी 537 अरब डॉलर (37 लाख करोड़ रुपए) मार्केट वैल्यू वाली कंपनी की कमान सौंपे जाने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। खुद वॉरेन बफे ने भरी मीटिंग में इस बात के संकेत भी दिए। 

 


वॉरेन बफे ने मीटिंग में दिए संकेत

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वॉरेन बफे (Warren Buffett) ने एजीएम में खुलकर कोई ऐलान नहीं किया, लेकिन यह संकेत कर दिए कि भविष्य में बर्कशायर हैथवे की कमान कौन संभालेगा। मीडिया ने बफे से इस बारे में सवाल भी किया। इस पर वह खुलकर तो नहीं बोले, लेकिन एक इशारा करके सभी को कनफ्यूज जरूर कर दिया। 
वॉरेन बफे ने सीधा-सीधा जवाब देने के बजाय दो नाम लिए, जिसमें से पहला नाम था 57 वर्षीय ग्रेग एबल (Greg Abel) का और फिर 67 वर्षीय भारतीय मूल के अजित जैन का नाम लिया। पिछले वर्ष ही दोनों को प्रमोशन दिया गया था और कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्‍टर्स में उन्‍हें जगह मिली थी। एक्सपर्ट मानते हैं कि जैन के पास कंपनी की विरासत संभालने के अवसर ज्‍यादा हैं।

 

14 हजार करोड़ रु की दौलत के मालिक हैं जैन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजित जैन 2 अरब डॉलर (14 हजार करोड़ रुपए) की दौलत के मालिक हैं। इन पर दुनिया की तीसरे बड़े अमीर वॉरेन बफे खासा भरोसा करते हैं। यही नहीं, इस शख्‍स को बफे का उतराधिकारी तक माना जाने लगा है। अजित जैन लंबे समय से बफे के साथ जुड़े हैं। दिलचस्‍प बात यह है कि अजित जैन कभी सेल्‍समैन की नौकरी करते थे। ब्‍लूमबर्ग बिलिनियर्स इंडेक्‍स के मुताबिक वॉरेन बफे वर्तमान में दुनिया के चौथे सबसे अमीर शख्‍स हैं, जिनकी रियल टाइम नेटवर्थ  लगभग 90 अरब डॉलर यानी करीब 6.30 लाख करोड़ रुपए है। 

 

आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की

ओडिशा के कटक में जन्‍मे अजित जैन ने आईआईटी की पढ़ाई की है। उन्‍होंने 1972 में आईआईटी खड़गपुर से पढ़ाई की। जैन ने भारत में 1973 से 1976 तक डाटा प्रोसेसिंग ऑपरेशन के लिए इंटरनेशनल बिजनेस मशीन कॉर्पोरेशन (आईबीएम) में बतौर सेल्‍समैन काम किया। उन्‍हें 1976 में अपनी इस नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा। दरअसल, आईबीएम ने इस प्रोजेक्‍ट को भारत में बंद कर दिया था।
 

 

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पत्‍नी के लिए लौटे अमेरिका

नौकरी गंवाने के बाद अजित जैन ने यूएस के हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से 1978 में एमबीए किया। फिर वे मैकिन्जी एंड कंपनी से जुड़ गए। 1980 में एक बार फिर वह भारत लौट आए लेकिन इस बार उनकी शादी हो गई। रॉबर्ट पी. माइल्स की पुस्तक 'द वॉरेन बफे' सीईओ: सीक्रेट फ्रॉम बर्कशायर हैथवे मैनेजर्स' के मुताबिक अजित जैन ने दोबारा अमेरिका जाने के बारे में सोचना बंद कर दिया था, लेकिन उनकी पत्नी टिंकू जैन वहां जाना चाहती थीं। 

 

ऐसे जुड़े बर्कशायर हैथवे से

दोबारा अमेरिका जाने के बाद जैन मैकिन्जी से ही जुड़े रहे लेकिन 1986 में उन्‍होंने इस कंपनी को छोड़ दिया। दरअसल, जैन को बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे से मिशेल गोल्‍डर्बग नामक शख्‍स ने बुलाया। पुरानी कंपनी मैकिन्जी में जैन के बॉस गोल्‍डबर्ग ही थे। गोल्‍डबर्ग ने मैकिन्‍जी को 1982 में ही छोड़ दिया था। 

 

बफे के चहेते हैं अजित जैन  

कुछ साल पहले निवेशकों के लिए लिखी अपनी सालाना चिट्ठी में इन्वेस्टमेंट गुरु वॉरेन बफे से कामयाबी का श्रेय पाने वालों में सबसे पहला नाम अजित जैन का लिया था। चिट्ठी में बफे ने लिखा कि 1986 के एक शनिवार को जब अजित ने ऑफिस ज्वाइन किया था तो उन्हें इन्श्योरेंस सेक्टर का बिल्कुल अनुभव नहीं था। तब से अब तक अजित बर्कशायर के निवेशकों के लिए सैकड़ों करोड़ की वैल्यू बढ़ा चुके हैं। इससे पहले साल 2014 में शेयरहोल्डर्स को लिखी चिट्ठी में बफे ने लिखा था कि उन्होंने जैन की बिजनेस स्किल पर चर्चा करते हुए कुछ समय बिताया। 
 

 

बफे ने जैन के परिवार को लिखी थी चिट्टी  

इससे पहले 2008 में बफे ने अपनी चिट्ठी में लिखा था कि जब जैन हमारे साथ जुड़े कुछ समय बाद ही मुझे महसूस हुआ कि हमें एक असाधारण प्रतिभा मिल चुकी है। इसलिए, मैंने स्वाभाविक रूप से भारत में उनके माता-पिता को लिख कर पूछा कि उनके घर में उस जैसा और भी कोई हो तो उसे भेजें। हालांकि लिखने से पहले ही मुझे जवाब पता था। अजित जैसा दूसरा कोई नहीं।

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