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Jaypore / पुरानी हवेली से शुरू किया था बिजनेस, बिड़ला ने लगा दी 110 करोड़ की बोली

7 साल पहले पुनीत चावला और शिल्पा शर्मा ने शुरू किया था ई-कॉमर्स पोर्टल jaypore

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नई दिल्ली. लगभग 8 साल पहले पुनीत चावला और शिल्पा शर्मा ने एक ही मुलाकात के बाद मिलकर काम करने का फैसला कर लिया। उन्होंने एक पुरानी हवेली से अपने प्रीमियम ऑनलाइन स्टोर जैपोर (jaypore.com) की शुरुआत की। आज इसकी सफलता को देखते हुए आदित्या बिड़ला ग्रुप की कंपनी एबी फैशन ने इस ई-कॉमर्स पोर्टल के लिए 110 करोड़ रुपए की बोली लगा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैश में होने वाली यह डील 30 से 45 दिन के भीतर पूरी हो जाएगी। हम यहां इस पोर्टल की सफलता की कहानी के बारे में बता रहे हैं।

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110 करोड़ रुपए में हुई डील

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एबी फैशन ने जैपोर डॉट कॉम को कैश डील के तहत 110 करोड़ रुपए में खरीदने के लिए समझौता किया है। यह डील 30 से 45 दिन में पूरी होगी। जैपोर एक प्रीमियम ऑनलाइन स्टोर है, जिसमें पारंपरिक भारतीय हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट बेचने पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता है।

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2012 में हुई जैपोर की शुरुआत

एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुनीत और शिल्पा ने 2012 की शुरुआत में अपने कुछ दोस्तों के साथ जैपोर (jaypore.com) की शुरुआत की। हालांकि उनका पहला ऑफिस दिल्ली के शाहपुर जाट में एक पुरानी हवेली की छत पर खुला। पहली सर्दी छत पर या सड़कों पर शूटिंग करते हुए कट गई। मीटिंग और इंटरव्यू पास की एक कॉफीशॉप पर हुआ करते थे। पुनीत कहते हैं, ‘जब हमने ऑफिस में एक मीटिंग रूम बनाया तो यह वास्तव में कोने में रखा हुआ एक दोस्त का सोफा सेट था।’

 

कैसे आया बिजनेस का आइडिया

पुनीत इससे पहले ई-कॉमर्स बिजनेस से जुड़े हुए थे और इंडियन परिधानों को अमेरिका में एनआरआई कस्टमर्स को बेचा करते थे। इस दौरान उन्हें भारत में ही ई-कॉमर्स बिजनेस शुरू करने और लोकल कस्टमर्स तलाशने का आइडिया आया। पुनीत ने कहा, ‘भारत में बने प्रोडक्ट्स की डिमांड खासी ज्यादा थी, विशेषकर ऐसे लोगों से जो अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते थे।’ पुनीत कहते हैं कि शिल्पा के साथ मुलाकात के बाद ही दोनों ने जैपोर की शुरुआत करने का फैसला कर लिया था। इससे पहले शिल्पा कंसल्टैंट के तौर पर काम कर रही थीं।

 

कम खर्च में चलाया काम

हालांकि, सबसे पहले मुश्किल वही थी जिसका सामना ज्यादातर स्टार्टअप्स को करना पड़ता है और वह थी पैसे का इंतजाम। टीम लगभग सभी काम बिना पैसे खर्च किए करने की कोशिश कर रही थी। टीम ने सोशल मीडिया या व्यक्तिगत तौर पर लोगों को इन्वाइट करके वेबसाइट के साथ जोड़ा। पुनीत ने कहा, ‘उन्होंने शुरुआती सपोर्ट दोस्तों और फैमिलीज की तरफ से मिला, जिन्होंने फेसबुक पेज को शेयर किया और लोगों को साइट पर लेकर आए।’

भरोसा हासिल करना थी बड़ी चुनौती

सबसे बड़ी चुनौती ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान लोगों का भरोसा हासिल करना था। कस्टमर्स को शॉपिंग के दौरान अपनी क्रेडिट डिटेल्स की सेफ्टी की खासी चिंता रहती है। पुनीत ने चिंताएं दूर करने के लिए शुरुआती कस्टमर्स से खुद फोन पर बात की। इस प्रकार धीरे-धीरे बिजनेस बढ़ता गया। 
एक बार जब ट्रैफिक और रेवेन्यू आने लगा तो टेक्नोलॉजी इन्फ्रास्ट्रक्चर को लेकर टीम की चिंता बढ़ी। ट्रैफिक बढ़ने पर सर्वर के लिए लोड लेना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में फिर से इंजीनियर दोस्तों की मदद ली गई। पुनीत कहते हैं, ‘बिजनेस बढ़ने के साथ ही चुनौतियां भी बदलने लगी थीं।’
हालांकि, समय के साथ उम्मीद से ज्यादा ग्रोथ मिलने लगी। पुनीत कहते हैं कि पूरे सफर के दौरान हमने क्वालिटी से बिल्कुल भी समझौता नहीं किया। 

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