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10 दिन की फ्री ट्रेनिंग से सीखा मधुमक्‍खी पालन, सालाना कर रहे हैं 2 करोड़ का बिजनेस

खेती से आमदनी न होते देख एमए पास रघुवीर सिंह ने ली ट्रेनिंग

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नई दिल्‍ली. एमए पास रघुवीर सिंह गांव में खेती कर रहे थे, लेकिन कुछ नया करने की चाह में उन्‍होंने दस दिन की ट्रेनिंग लेकर मधुमक्‍खी पालन सीख लिया और मधुमक्‍खी पालन से बिजनेस की शुरुआत की। अब वह मधुमक्‍खी पालन के साथ-साथ शहद की ट्रेडिंग भी करते हैं और उनका सालाना टर्नओवर 2 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। रघुवीर सिंह की कहानी बेहद रोचक है और यह दर्शाती है कि अगर आप प्रयास करें तो अपने गांव से भी शुरुआत करके बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकते हैं। आइए जानते हैं, उनकी कहानी


कैसे की शुरुआत

राजस्‍थान के भरतपुर जिले के नगर तहसील के बूचाका गांव के रहने वाले हैं रघुवीर सिंह। उन्‍होंने moneybhaskar को बताया कि वह एमए पास करने के बाद अपने परिवार के साथ ही खेतीबाड़ी कर रहे थे। साथ ही, वह प्रदेश की राजनीति में भी सक्रिय थे, लेकिन वह जानते थे कि खेती से ज्‍यादा आमदनी नहीं हो सकती, इसलिए उन्‍होंने कुछ नया करने की ठानी। यहीं उन्‍हें पता चला कि लुपिन फाउंडेशन द्वारा मधुमक्‍खी पालन की ट्रेनिंग दी जाती है। उन्‍होंने यह ट्रेनिंग लेने की ठानी और लगभग 10 दिन की ट्रेनिंग लेने के बाद उन्‍होंने मधुमक्‍खी पालन के 50 बॉक्‍स खरीद लिए।


 

शुरू में हुए निराश

 

पहले पहल तो उनके काम को अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स नहीं मिला, जिससे उन्‍होंने काम बंद करने की ठानी, लेकिन फिर यह सोचकर एक साल तक काम किया ही जाए, काम चालू रखा और एक साल बाद उन्‍हें जब 50 बॉक्‍स की लागत वापस मिल गई तो थोड़ी तसल्‍ली हुई और इस बिजनेस को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

 

आगे पढ़ें परिवार ने दिया साथ

परिवार ने दिया साथ

रघुवीर को मधुमक्खीपालन से पहले साल हुई आमदनी को देखकर परिवार के अन्य लोग महे, हरिके, जवाहर सिंह, चुन्नीलाल, राममोहन भी जुड़ गये और इन सब लोगों ने भी मधुमक्खीपालन के बॉक्स खरीदकर काम शुरू किया। धीरे-धीरे पूरे परिवार के लोग मधुमक्खीपालन से जुड़ गये और आज इस परिवार के पास करीब 8 हजार मधुमक्खीपालन के बॉक्स हैं। संयुक्त रूप से यह परिवार मधुमक्खीपालन पर निर्भर है। रघुवीर के परिवार को मधुमक्खीपालन से हो रही आय को देखकर गांव के करीब 20 अन्य परिवार भी इससे जुड़ गये। आज पूरा बूचाका गांव मधुमक्खीपालन का कार्य कर रहा है जिससे बूचाका का नाम मधुमक्खीपालकों के नाम से अधिक जाना जाने लगा है

 

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ट्रेडिंग पर किया फोकस

 

रघुवीर ने देखा कि शहद बेचने के अलावा शहद की ट्रेडिंग के बिजनेस में भी काफी स्‍कोप है। इसके बाद उन्‍होंने गांव व आसपास के इलाकों से शहद खरीदकर इकट्ठा किया और प्रोसेसिंग यूनिट्स और एक्‍सपोर्टर्स तक पहुंचाने का काम शुरू कर दिया। उनका यह काम बेहद तेजी से आगे बढ़ने लगा। रघुवीर सिंह ने बताया कि जब से ट्रेडिंग का कारोबार शुरू किया तो पहले साल करोड़ रुपए का ट्रांजैंक्‍शन हुआजबकि उसके बाद से लगातार करोड़ रुपए का ट्रांजैंक्‍शन हो रहा है।

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