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Home » Business MantraWhy Rcomm decided to opt for insolvency proceeding, Reliance Communications of Anil Ambani

17 साल पहले 500 रु में बेचा था मोबाइल, अब दिवालिया होगी अंबानी की कंपनी

जिस दांव से आगे बढ़ी थी अनिल अंबानी की Rcom, अब उसी से खाई मात

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नई दिल्ली. अनिल अंबानी (Anil Ambani) की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन (RCom, आर-कॉम) ने आखिरकार दिवालिया होने के लिए आवेदन करने जा रही है। इससे साफ है कि किसी जमाने में देश की अन्य कंपनियों को टेलिकॉम बिजनेस का पाठ पढ़ाने वाली कंपनी आने वाले कुछ साल में अतीत का विषय हो जाएगी। 2002 के समय जब मोबाइल फोन एक लग्‍जरी हुआ करता था, रिलायंस कम्युनिकेशंस (तब रिलायंस इंफोटेक) ने महज 500 रुपए में लोगों को मोबाइल की सुविधा उपलब्ध कराके इस इंडस्ट्री की सूरत बदल दी थी। 

 

नए बिजनेस मॉडल का किया था आगाज

इंडस्ट्री में जब कॉम्पिटिशन बढ़ा तो सस्ती कॉल दरें, अट्रैक्टिव ऑफर्स देकर इंडस्ट्री में नए बिजनेस मॉडल की शुरुआत की। बाद में इसी मॉडल को सभी बड़ी टेलिकॉम कंपनियों ने अपनाया। हालांकि एयरटेल (Airtel), जियो (Reliance Jio), आइडिया (Idea) और वोडाफोन (Vodafone) जैसी कंपनियां तो आज भी मार्केट में मजबूती से टिकी हैं, लेकिन आरकॉम अब जल्द गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। मनीभास्कर अपनी खास रिपोर्ट में बता रहा है कि आखिरकार कैसे एक लीडर कंपनी कर्जदार बनी और अब दिवालिया होने जा रही है।
 

गलत दिशा में गई कंपनी 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो आर-कॉम अनिल अंबानी (Anil Ambani) ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी थी, गलत एक्सपेंशन प्लान की वजह से परेशानी में पड़ गई। कंपनी पर कर्ज बढ़ता गया, जो वह चुका नहीं पाई। वहीं, बाद में जब टेलिकॉम इंडस्ट्री में रिलायंस जियो (Reliance Jio) के आने के बाद प्राइसिंग वार शुरू हुआ, कैश न होने से आर-कॉम इस प्रतियोगिता में टिकी नहीं रह पाई। इसी वजह से वह दूसरी बड़ी कंपनियों से पीछे होती गई। 

 

 

2010 के बाद से शुरू हुई गिरावट

एक एक्सपर्ट  के मुताबिक, मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और अनिल अंबानी (Anil Ambani) में जब बिजनेस को लेकर बंटवारा हुआ था तो अनिल अंबानी (Anil Ambani) के हिस्से में टेलिकॉम कंपनी आई थी। साल 2010 तक यह एडीएजी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी थी। 2010 तक आर-कॉम का मार्केट शेयर टेलिकॉम इंडस्ट्री में 17 फीसदी था और वह दूसरी बड़ी कंपनी थी। कंपनी के सब्सक्राइबर्स की संख्‍या भी अच्छी खासी थी। उसी दौरान कंपनी के विस्तार को लेकर कर्ज बढ़ना शुरू हुआ और उसका सही मैनेजमेंट नहीं हो पाया। इससे कर्ज बढ़ता गया, लेकिन उसे चुकाया नहीं जा सका, और कंपनी का वहीं से डिक्लाइन शुरू हो गया। फाइनेंशियल ईयर 2010 में कंपनी पर 25 हजार करोड़ कर्ज था, अब बढ़कर 45 हजार करोड़ हो चुका है। 

 

रही सही कसर डाटा वार में पूरी हुई

टेलिकॉम इंडस्ट्री से जुड़े एक एक्सपर्ट ने बताया कि आर-कॉम पर कर्ज बढ़ा और कंपनी के पास कैश की कमी होती गई। ऐसे में रिलायंस जियो  (Reliance Jio) के आने के बाद से टेलिकॉम इंडस्ट्री में जो डाटा वार चला, उसमें आर-कॉम का टिकना मुश्किल होता गया। जियो, एयरटेल और आइडिया व वोडाफोन जैसी कंपनियां ने अपना कस्टमर बेस बनाए रखने के लिए खर्च बढ़ा दिया, जिससे उनका कस्टमर बेस अभी भी बचा हुआ है। वहीं आर-कॉम इस खेल में पीछे हो गई। उसके प्राइम और एवरेज कस्टमर सभी उससे दूर होते गए। 

 

10 साल में 1.64 लाख करोड़ घटी मार्केट कैप 

ऑर-कॉम में गिरावट का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि पिछले 10 साल में कंपनी की मार्केट कैप 98 फीसदी से ज्यादा घट गई है। जनवरी 2008 में ऑर-कॉम का मार्केट कैप 1.66 लाख करोड़ रुपए के करीब था, जो 4 फवरी 2019 को घटकर 2110 करोड़ रुपए पर आ गई। इस दौरान कंपनी का मार्केट कैप 1.64 लाख करोड़ रुपए घट गई। 11 जनवरी 2008 को एक शेयर का भाव 792 रुपए था, जो घटकर 4 फरवरी 2019 को 8 रुपए के आसपास आ गई।  

 

दिवालिया होने जा रही है आरकॉम

अब आरकॉम खुद को दिवालिया घोषित करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और बोर्ड ने भी इसकी मंजूरी दे दी है। आरकॉम ने हाल में एक बयान में कहा, ‘कंपनी के बोर्ड ने एनसीएलटी (NCLT) के फ्रेमवर्क के माध्यम से डेट रिजॉल्युशन प्लान को लागू करने का फैसला किया है।’ स्वीडन की टेलिकॉम कंपनी इरिक्सन ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (National Company Law Tribunal) में याचिका दायर करके आरकॉम के खिलाफ इनसॉल्वेंसी की कार्रवाई शुरू करने का अनुरोध किया है। इस खबर के बाद सोमवार को कंपनी के शेयर में 50 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।

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