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कानपुर का शख्स दे रहा दिग्गज कंपनियों को टक्कर, खड़ा किया अरबों का बिजनेस

घड़ी के फाउंडर्स की देश के बड़े अमीरों में होती है गिनती

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नई दिल्ली. लगभग 30 साल पहले छोटा सा बिजनेस शुरू करने वाला कानपुर का यह शख्स आज दुनिया की बड़ी कंपनियों को टक्कर दे रहा है। यही नहीं अब उसकी पर्सनल वेल्थ लगभग 12 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुकी है और उसकी गिनती देश के अरपतियों में होती है। उनका नाम है मुरलीधर ज्ञानचंदानी, जिन्होंने ऐसे कारोबार में अपनी धाक जमाई है जिसमें किसी समय निरमा, व्हील और सर्फ जैसे ब्रांडों का दबदबा हुआ करता था। हम आपको इसी शख्स की सफलता की कहानी बता रहे हैं।

 

12 हजार करोड़ की संपत्ति से ज्यादा के हैं मालिक

कानपुर के जाने माने इंडस्ट्रियलिस्ट मुरलीधर ज्ञानचंदानी और उनके छोटे भाई बिमल ज्ञानचंदानी घड़ी समूह के मालिक हैं। फोर्ब्स के मुताबिक दोनों भाई संयुक्त रूप से 1.60 अरब डॉलर (11,700 करोड़ रुपए) की संपत्ति के मालिक हैं। फोर्ब्स ने देश के 100 सबसे अमीर उद्योगपतियों में दोनों को 75वें स्थान पर रखा है। उन्हें पहली बार वर्ष 2013 में इस लिस्ट में जगह मिली थी।

ज्ञानचंदानी का ब्रांड घड़ी देश भर में जाना पहचाना नाम है, हालांकि उनकी कंपनी का नाम रोहित सर्फक्टैंट्स प्राइवेट लिमिटेड (आरएसपीएल) है।

 

 

देश में बिकने वाला हर चौथा डिटर्जेंट होता है घड़ी का

डिटर्जेंट मार्केट में घड़ी का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। देश में बिकने वाला हर चौथा डिटर्जेंट घड़ी का होता है। इसकी तुलना में हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) का ब्रांड व्हील लगातार पिछड़ता जा रहा है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 5 साल पहले तक इस सेगमेंट की हर कैटिगरी में एचयूएल का दबदबा हुआ करता था। दरअसल घड़ी का मार्केट शेयर व्हील, सनलाइट और निरमा तीनों के कुल शेयर से ज्यादा हो गया है।

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एचयूएल-पीएंडजी जैसी कंपनियों को दे रहे टक्कर

डिटर्जेंट मार्केट में घड़ी की हिस्सेदारी लगभग 22 फीसदी है। घड़ी मार्केट की दिग्गज कंपनियों एचयूएल और पीएंडजी को तगड़ी टक्कर दे रही है।

हालांकि पूरे लॉन्ड्री मार्केट की बात करें तो एचयूएल 17,000 करोड़ रुपए के इंडियन लॉन्ड्री मार्केट में 37.4 फीसदी शेयर के साथ अभी लीडरशिप स्थिति में है।

वहीं टाइड और एरियल ब्रांड का स्वामित्व रखने वाली प्रॉक्टर एंड गैंबल (पीएंडजी) का मार्केट शेयर 15.7 फीसदी है।

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नोटबंदी की मार से उबर गई घड़ी

घड़ी डिटरजेंट और साबुन के कुटीर उद्योग से शुरुआत करने वाले मुरली बाबू आज दो दर्जन से अधिक उत्पादों और एक दर्जन चर्चित ब्रांड के मालिक हैं।

नोटबंदी के समय देश भर के उद्योगों के सामने पूंजी और उत्पादन का संकट मंडरा रहा था तब कानपुर की दिग्गज कंपनी आरएसपीएल ने तरक्की की नई इबारत गढ़ी। इसके बाद जीएसटी की उलझनों से निकलते हुए कंपनी ने अपनी ग्रोथ को बनाए रखा।

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चार साल में दोगुनी हुई दौलत

फोर्ब्स इंडिया के मुताबिक मुरलीधर ज्ञानचंदानी की कंपनी ने बीते चार सालों में दोगुनी तरक्की की। वर्ष 2013 में इनके पास कुल 5226 करोड़ रुपए की संपत्ति थी। महज चार साल में ही उनकी वेल्थ में करीब 7500 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हुआ।

 

आरएसपीएल में बनते हैं ये उत्पाद

घड़ी (डिटरजेंट, साबुन, हैंडवॉश, रूम फ्रेशनर, टॉयलेट क्लीनर), एक्सपर्ट (बर्तन धोने का साबुन, हैंडवाश), वीनस (नहाने वाला साबुन), नमस्ते इंडिया (दूध, घी, दही, मक्खन, पनीर), प्रो-ईज केयर (सेनेटरी नैपकिन), रेड चीफ (चमड़े के जूते, सैंडिल, चप्पल, स्पोर्ट्स शूज), निम्मी बिल्ड टेक प्राइवेट लिमिटेड (रीयल इस्टेट), नोएडा में सॉफ्टवेयर पार्क, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश में सोलर पॉवर व विंड पॉवर प्लांट स्थापित किया है। इसमें विंड एनर्जी से 100 मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

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