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इंडियंस ने अंग्रेजों से खरीदी थीं ये 4 कंपनियां, आज भारत में कर रहीं राज

Republic Day, 26 january special: आज देश के बड़े ब्रांड्स में गिनी जाती हैं अंग्रेजों की ये कंपनियां

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नई दिल्ली. अंग्रेजों का भारत को गुलाम बनाने का मुख्य लक्ष्य यहां से बेशुमार दौलत अपने देश लेना था। इसके लिए उन्होंने भारत आकर कई कंपनियां खोलीं, जिनमें शराब से लेकर होटल जैसे सेक्टर शामिल थे। इनमें से कुछ कंपनियां तो ऐसी थीं, जिन्हें भारतीयों ने आजादी से पहले ही अंग्रेजों से खरीदकर अपने हाथ में ले लिया था। इनमें मोहन मेकिन, ओबेरॉय ग्रुप जैसी कई कंपनियां शामिल हैं। आइए 26 जनवरी (26 january) यानी गणतंत्र दिवस  (Republic Day) के मौके पर अंग्रेजों द्वारा शुरू की गई ऐसी कंपनियों के बारे में जानते हैं, जिन्हें अब इंडियन चला रहे हैं और जो देश के बड़े ब्रांड्स में गिनी जाती हैं। इनमें से कुछ ऐसी भी हैं, जिनकी कमान भले ही इंडियंस के हाथ में न हो लेकिन भारत में उनकी खासी धाक है।


 
1. मोहन मेकिन (Mohan Meakin)

अन्य कारोबारी एचजी मेकिन इंडिया आए और उन्होंनें शिमला और सोलन की ब्रेवरीज खरीद ली। फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद इस कंपनी को रिस्ट्रक्चर किया गया और इसका नाम डायर मेकिन ब्रेवरीज कर दिया गया।

 

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इंडियन ने खरीदी कंपनी

आजादी के बाद एनएन मोहन फंड जुटाकर लंदन गए और उन्होंने डायर मेकिन में हिस्सेदारी खरीद ली। 1949 में मैनेजमेंट की कमान एनएन मोहन ने अपने हाथ में ले ली। उन्होंने लखनऊ, गाजियाबाद और खोपली में ब्रेवरीज यूनिट लगाई। साल 1967 में कंपनी का नाम बदलकर मोहन मेकिन (Mohan Meakin) रख दिया गया। कसौली ब्रेवरीज अभी भी मोहन मेकिन (Mohan Meakin) लिमिटेड के पास है। कंपनी की बागडोर एनएन मोहन के बेटे कपिल मोहन के हाथों में थी जिनका कुछ समय पहले निधन हो गया। ओल्‍ड मॉन्‍क (Old Monk) रम के जन्‍मदाता कपिल मोहन ही हैं। ओल्ड मॉन्क (Old Monk) रम और गोल्डन ईगल बीयर मोहन मेकिन (Mohan Meakin) के ब्रांड है। पढ़ें दूसरी कंपनी...


 

2. यूनाइटेड ब्रेवरीज (यूबी ग्रुप या united breweries)

यूबी ग्रुप (united breweries) की नींव साल 1857 में स्कॉटलैंड के थॉमस लेशमैन ने की थी। यह ग्रुप साउथ इंडिया में बीयर बनाता था। ग्रुप ने ब्रिटिश ब्रेवरीज से बीयर बनाना सीखा। आजादी से पहले यूबी ग्रुप ब्रिटिश सैनिकों के लिए बल्क में बीयर बनाती थी। ये तब बीयर को ट्रांसपोर्ट करती थी।
साल 1947 में विट्ठल माल्या इस कंपनी के पहले भारतीय डायरेक्टर बने। किंगफिशर (Kingfisher) ब्रांड की शुरुआत 1960 के दशक में हुई। कंपनी ने दूसरी ब्रेवरीज कंपनियों का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया। मैकडॉवेल ग्रुप की दूसरी सब्सिडियरी कंपनी बन गई। इससे ग्रुप को अपना कारोबार वाइन और शराब कारोबार में बढ़ाने में मदद मिली है।

अपने पिता विट्ठल माल्या के निधन के बाद विजय माल्या ने कंपनी को साल 1983 में ज्वाइन किया। किंगफिशर एयरलाइंस के लॉस में जाने के बाद विजय माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। अब विजय माल्या लंदन में है। भारत सरकार उन्हें वापस लाने की कोशिशों में लगी हुई है।

 

 
3. ओबेरॉय ग्रुप (oberoi group)

ओबेरॉय ग्रुप (oberoi group) ग्लोबल होटल कंपनी है, जिसका हेडऑफिस दिल्ली में है। ओबेरॉय ग्रुप (oberoi group) की स्थापना साल 1934 में हुई थी। साल 1934 में राय बहादुर मोहन सिंह ओबेरॉय ने अंग्रेजों से दो प्रॉपर्टी -दिल्ली और शिमला में क्लार्क खरीदी थीं। ओबेरॉय को उनके बेटों तिलक राज सिंह और पृथ्वी राज सिंह ओबेरॉय ने कारोबार बढ़ाने में मदद की। ग्रुप ने देश और विदेश में प्रॉपर्टी खरीदी। अब कंपनी के चेयरमैन पृथ्वी राज सिंह ओबेरॉय हैं। अब कंपनी के पास 30 से अधिक लग्जरी होटल और दो रिवर क्रूज शिप हैं।

 

 

 
4. रॉयल एनफील्ड (royal enfield)
किसने खरीदी: आयशर मोटर्स

 
- साल 1893 में बनी ब्रिटिश कंपनी एनफील्ड साइकिल का ब्रांड नाम रॉयल एनफील्ड (royal enfield) था।
- कंपनी इस ब्रांड नेम से मोटरसाइकिल, साइकिल आदि बनाती थी।
- पहली रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल साल 1901 में बनी।
- रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल साल 1949 में भारत में बेच दी गई।
- रॉयल एनफील्‍ड दुनिया की सबसे पुरानी मोटरसाइकिल कंपनी है।
- साल 1955 में एनफील्ड साइकिल कंपनी और मद्रास मोटर्स इंडिया ने पार्टनरशिप कर चेन्नई में फैक्ट्री लगाई।
 - यहां 350 सीसी की रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटर साइकिल बनाई गई।
- अब रॉयल एनफील्ड एक बड़ा ब्रांड बन चुकी है।

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