मिलिए देश के पहले दलित अरबपति से, नाम है राजेश सरैया, कंपनी का टर्नओवर 2500 करोड़ रु

लोकसभा चुनाव 2019 (lok sabha election 2019) का शोर अपने चरम पर है। ऐसे में वोटर्स के लिए ब्राह्मण, दलित, मुसलमान, बनिया, यादव जैसे शब्द भी सुनने को मिल रहे हैं। वैसे तो दलितों राजनीति में बड़ी ताकत माना जाता है, लेकिन इनका बड़ा तबका आज भी आर्थिक रूप से कमजोर।

moneybhaskar

Apr 13,2019 12:53:00 PM IST


नई दिल्‍ली. लोकसभा चुनाव 2019 (lok sabha election 2019) का शोर अपने चरम पर है। ऐसे में वोटर्स के लिए ब्राह्मण, दलित, मुसलमान, बनिया, यादव जैसे शब्द भी सुनने को मिल रहे हैं। वैसे तो दलितों राजनीति में बड़ी ताकत माना जाता है, लेकिन इनका बड़ा तबका आज भी आर्थिक रूप से कमजोर। हालांकि इस समुदाय में कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने अपनी मेहनत के दम पर देश ही नहीं दुनिया में भी नाम किया है। हम आपको देश के पहले दलित अरबपति के बारे में बता रहे हैं, जिसने अरबों रुपए का बिजनेस एम्पायर खड़ा किया।

2500 करोड़ रुपए है कंपनी का टर्नओवर

दलित अरबपतियों में सबसे बड़ा नाम राजेश सरैया (Rajesh Saraiya) का है। सरैया को देश का पहला दलित अरबपति माना जाता है। वह यूपी के एक मध्‍यम वर्गीय परिवार में पैदा हुए और आज उनका कारोबार भारत से बाहर यूक्रेन, रूस और जर्मनी जैसे कई देशों में फैला है। वह यूक्रेन बेस कंपनी SteelMont के चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव ऑफिसर हैं। SteelMont की वेबसाइट के मुताबिक, वर्तमान में कंपनी का टर्नओवर 35 करोड़ डॉलर (लगभग 2500 करोड़ रुपए) है। उनकी कंपनी मेटल सेक्टर में काम करती हैं।

यह भी पढ़ें-लाखों की जॉब छोड़ दो दोस्तों ने शुरू की कंपनी, अंबानी ने लगा दिए 700 करोड़

पिता ने नहीं रखा नाथू या कालू जैसा नाम

यूपी के सीतापुर जिले से सटे सरैया सैनी गांव में पैदा हुए। पिता नाथराम को उम्‍मीद थी कि बेटा बड़ा होकर कुछ बड़ा काम करेगा। इसीलिए उन्‍होंने बेटे का नाम नाथू या कालू जैसा न रखकर राजेश रखा। राजेश के पिता कहते हैं, मेरा पिता का खुद नाम कल्‍लूराम था, जबकि मेरा नाम नाथराम। लेकिन मैंने यह परंपरा तोड़ दी और गांव के नाम को उनके नाम के आगे रखा। इस तरह नाम पड़ा राजेश सरैया।

यह भी पढ़ें-दुनिया के टॉप अमीर को उसी के दांव से मात देंगे अंबानी, ताबड़तोड़ खरीदीं 26 कंपनियां

 

25 साल से हैं यूरोप में, लेकिन बसेंगे तो भारत में 

राजेश की शुरुआती पढ़ाई देहरादून में हुई और बाद में उन्‍होंने रूस से एयरोनॉटिक्‍स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। बाद में SteelMont की नींव रखी। उनकी कंपनी मेटल में ट्रेडिंग करती है। उसका बेस यूक्रेन में है, जबकि आज-कल वह जर्मनी में रहते हैं। उनकी कंपनी ब्रिटेन में ट्रेडिंग करती है। हालांकि राजेश को भारत से बेहद प्‍यार है। वह कहते हैं कि उनके बच्‍चे और वह इतने साल तक बाहर रहने के बावजूद भारतीय पासपोर्ट रखते हैं। उनका इरादा आने वाले वक्‍त में भारत में ही बसने का है।  वह भारत में फूड प्रोसेसिंग की यूनिट खोलना चाहते हैं। यह सारे बाते पिछले साल मीडिया को दिए इंटरव्यू में कहीं थी।

 

 
नहीं हुआ कोई भेदभाव 

राजेश के मुताबिक, इतने साल से वह भारत और भारत से बाहर करोबार कर रहे हैं, लेकिन उनके साथ दलित होने के नाते कभी किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ। राजेश कहते हैं कि भारत सरकार के साथ-साथ अन्‍य विदेशी सरकारों का रुख उनको लेकर हमेशा पॉजिटिव रहा। राजेश को भारत सरकार की ओर से दो बड़े अवार्ड मिल चुके हैं। इसमें 2014 का पद्मश्री और 2012 का प्रवासी भारतीय अवॉर्ड शामिल हैं। 

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.