कश्मीर का यह युवक देश के लिए बना मिसाल, हर महीने कमाता है 12 लाख रु

एक तरफ जहां पुलवामा अटैक (Pulwama Attack) के बीच जम्मू कश्मीर में दहशत का माहौल है। घाटी में जगह-जगह आतंकियों को टारगेट किया जा रहा है। वहीं राज्य में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो उम्मीद की नई अलख जगह जगा रहे हैं। मीर गौहर एक ऐसे ही शख्स हैं जो अपने काम से कश्मीर ही नहीं पूरे देश के लिए मिसाल बन गए हैं।

moneybhaskar

Feb 23,2019 09:36:00 AM IST

नई दिल्ली. एक तरफ जहां पुलवामा अटैक (Pulwama Attack) के बीच जम्मू कश्मीर में दहशत का माहौल है। घाटी में जगह-जगह आतंकियों को टारगेट किया जा रहा है। वहीं राज्य में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो उम्मीद की नई अलख जगह जगा रहे हैं। मीर गौहर एक ऐसे ही शख्स हैं जो अपने काम से कश्मीर ही नहीं पूरे देश के लिए मिसाल बन गए हैं। मीर की सफलता केवल उनकी ही सफलता नहीं है बल्कि उन तमाम भटके हुए युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो आतंकग्रस्त होने के कारण अपने भविष्य को नहीं बना पाते हैं। मीर ने अपनी मेहनत और लगन के बल पर करोड़ों का बिजनेस खड़ा किया है। आइए जानते हैं मीर ने कैसे खड़ा किया करोड़ों का कारोबार...

सालाना 1.5 करोड़ रु है टर्नओवर

श्रीनगर के रहने वाले मीर गौहर ने moneybhaskar.com से बातचीत में कहा कि उनके पिताजी एक कारोबारी थे। उनका होम अप्लाएंसेज का बिजनेस था। बिजनेस बैकग्राउंड होने के बावजूद वह मीर को बिजनेस की बारीकियां सिखाने के बजाय पढ़ाई पर ज्यादा जोर देते थे। उन्होंने अमृतसर के खालसा कॉलेज से एग्रीकल्चर में बीएससी करने के बाद एमएससी की डिग्री हासिल की। एमएससी करने के बाद कुछ साल तक नौकरी की। फिर श्रीनगर लौटकर अपना बिजनेस शुरू किया और 7 साल में उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपए हो गया। इस प्रकार महीने का टर्नओवर 12.5 लाख रुपए होता है।

नौकरी छोड़ की शुरुआत मीर ने बताया कि एग्रीकल्चर में एमएससी करने के बाद उन्होंने एक ट्रैक्टर बनाने वाली वीएसटी टिलर्स ट्रैक्टर्स लिमिटेड में नौकरी की। नौकरी के दौरान उन्हें किसानों से मिलने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने किसानों की परेशानियों को करीब से जाना। फिर उन्हें महसूस हुआ कि इन परेशानियों से उनके कश्मीर के किसान भी रूबरू होते रहते हैं। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और अपने घर लौट आए। शुरू किया खेतीबाड़ी से जुड़ा कारोबार घर लौटने के बाद उन्होंने अपनी जमा-पूंजी और बैंक से लोन लेकर एग्री इक्विपमेंट्स के साथ ऑर्गेनिक कीटनाशक और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बेचने का बिजनेस शुरू किया। मीर बताते हैं कि उनके यहां के किसान जागरूक नहीं हैं। उन्हें एग्रीकल्चर सेक्टर में हो रहे डेवलपमेंट के बारे में पता नहीं है। वह सिर्फ सेब की खेती पर निर्भर हैं। लेकिन कीटनाशक के ज्यादा उपयोग से सेब की उपज खराब हो रही है। इसके समाधान के लिए वो उनकी मदद करते हैं।सालाना 1.5 करोड़ का होता है कारोबार किसानों को खेती के उपकरण, कीटनाशक और फर्टिलाइजर बेचकर मीर साल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए का कारोबार कर लेते हैं। मीर का कहना है कि वो कम से कम प्रॉफिट मार्जिन पर सामान बेचते हैं। इससे वो महीने में 25 से 30 हजार रुपए तक प्रॉफिट कमा लेते हैं। बाहर से खरीदते हैं सामान मीर के मुताबिक, कश्मीर में कोई इंडस्ट्रीज नहीं हैं। इसलिए वह खेती से जुड़े सारे सामान देश के अन्य हिस्सों से खरीदते हैं। इनमें नेशनल और मल्टीनेशनल कंपनियों के प्रोडक्ट शामिल हैं। इसके अलावा वो किसानों को उनकी समस्याओं के सामाधान का रास्ता भी दिखाते हैं।
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