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मजाक-मजाक में मिला बिजनेस का आइडिया, 6 महीने में बन गया करोड़पति

जितना मजाक बना बिजनेस उतना ही सफल होता चला गया।

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नई दिल्ली.  कई बार अच्छे आइडिया शुरू होने से पहले सिर्फ इसलिए खत्म हो जाते हैं क्योंकि लोग उनका मजाक बना देते हैं। अपने आइडिया की हंसी उड़ने का डर सफल होने की राह का सबसे बड़ा डर माना जाता है। पेट रॉक के फाउंडर गैरी डेल को अपना आइडिया एक मजाक से मिला, और इसका जितना मजाक बना ये उतना ही सफल होता चला गया। पेट रॉक के लॉन्च होने के साथ सिर्फ 6 महीने में गैरी ने 60 लाख डॉलर (41.10 करोड़ रुपए) कमा लिए। 

 

मजाक से मिला हिट आइडिया

एडरवटाइजिंग एग्जीक्यूटिव गैरी डेल 1975 के एक दिन अपने दोस्त के साथ थे। उनका दोस्त बार-बार अपने कुत्ते की शिकायत कर रहा था। अचानक गैरी ने मजाक किया कि उनके पास जो कुत्ता है वो बिल्कुल पत्थर की तरह है, न उसे खाने की जरूरत हैं और न ही वो घर गंदा करता है। अगले आधे घंटे तक दोनो दोस्त इसी बारे में मजाक करते रहे  कि पत्थर से बना पेट कितना फायदेमंद है। अगले दिन भले ही गैरी का दोस्त ये सब भूल गया लेकिन गैरी को सब याद रहा। उसने मजाक-मजाक में कही गई सभी बातें नोट की और हथेली से भी छोटे पत्थर को लेकर कर पेट रॉक लॉन्च कर दिया।

 

जमीन पर पड़े पत्थर से खड़ा किया बिजनेस

पेट रॉक वास्तव में नदी के किनारे मिलने वाला एक आम पत्थर था, जिसे डेल ने एक पालतू जानवर की तरह पेश किया। इसके साथ ही गैरी ने इस पत्थर के साथ कुछ ऐसी चीज भी दी जिसके लिए लोगों ने इसके लिए 4 गुना कीमत चुकाई।

 

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6 महीने में बेचे 15 लाख पेट रॉक 

 

गैरी ने ये प्रोडक्ट 1975 के क्रिसमस में लॉन्च किया था। प्रोडक्ट की सेल्स सिर्फ 6 महीने ही अपने हाई पर रही, लेकिन इस दौरान 4 डॉलर प्रति पेट की दर से 15 लाख पेट रॉक बिक गए। भले ही पेट रॉक की सेल्स सिर्फ 6 महीने चली हो लेकिन इसकी सफलता ने गैरी की इतनी कमाई करा दी कि उसने इस पैसे से कई दूसरे बिजनेस को खड़ा कर लिया। गैरी ने इस रॉक की कमाई से अपना खुद का एड बिजनेस शुरू कर दिया। वहीं उन्होंने रेस्टोरेंट कारोबार में भी कदम रखा।   

 

मजाक ही रहा प्रोडक्ट की सफलता का आधार 

माना जाता है कि पेट रॉक की बिक्री में सबसे अहम बात बेल का प्रजेंटेशन था। टाइम में पब्लिश आर्टिकल के मुताबिक पेट रॉक सिर्फ एक फीसदी प्रोडक्ट और 99 फीसदी मार्केटिंग थी। बेल ने इस प्रोडक्ट के साथ घर के शेप की पैकेजिंग दी। इस पैकेज में हवा के आने जाने के लिए खिड़किया बनी थीं। वहीं एक छोटा सा घोसला और एक गाइड बुक दी गई थी। टाइम के मुताबिक वास्तव में अधिकांश लोगों ने 32 पेज की इस गाइड के लिए ही पैसे चुकाए थे। क्योंकि इसमें लिखी बातें लोगों को काफी पसंद आईं। मजाकिया अंदाज में इसमें बताया गया था कि अपने पेट रॉक को खाना कैसे खिलाएं, उसे इशारे कैसे सिखाएं। सभी लोग जानते थे कि पत्थर से ये सभी उम्मीद करना बेकार है, इसलिए उन्हें ऐसी इमेजिनेशन काफी मजाकिया और यूनिक लगी। मार्केटिंग की वजह से ये प्रोडक्ट एक टॉय, एक कलेक्टिबल और एक मजाक सब कुछ बन गया था। ग्राहकों को इसमें जो क्वालिटी समझ में आई उसने उसी हिसाब से इसे खरीदा।

 

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प्रोडक्ट से कहीं ज्यादा थी पैकेजिंग की कीमत

 

इस बिजनेस आइडिया की एक और बात एक्सपर्ट्स को अचंभे में डालती है। दरअसल ये एक ऐसा बिजनेस आइडिया था जिसमें प्रोडक्ट को पैक करना खुद उस प्रोडक्ट से ज्यादा महंगा था। रॉक करीब करीब मुफ्त ही मिले थे, वहीं गाइड का कंटेट गैरी ने खुद तैयार किया था। गत्ते से बनी पैकेजिंग का काम उसे दूसरी कंपनी को देना पड़ा। इस सबको मिला कर पेट रॉक की लागत 1 डॉलर के करीब हुई। जिसका अधिकांश हिस्सा गत्तों पर खर्च का था। गैरी ने हर पेट रॉक को 4 डॉलर की कीमत पर बेचा।
 
कानूनी कार्रवाई की धमकी के बाद नहीं बढ़ाया बिजनेस 

 

पेट रॉक की मदद से करोड़ों कमाने की जानकारी के बाद कई लोगो ने गैरी को कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। इन लोगों नें मजाक कर पैसे कमाने का आरोप लगाया। हालांकि किसी ने कोई केस दर्ज नहीं कराया क्योंकि गैरी ने पेट रॉक को लेकर कुछ भी नहीं छुपाया था। उसने रॉक को एक पेट की शक्ल देकर बेचा था, बस लोगों को ये मानने की सलाह दी थी कि वो इसे अपने पेट की तरह रखें। ऐसे में इसकी बिक्री एक कलेक्टिबल और खिलौने के रूप में दर्ज हुई।
विवाद बढ़ने की संभावना, प्रोडक्ट की सेल्स अपने हाई पर पहुंचने और गैरी के नए बिजनेस पर फोकस करने की वजह से पेट रॉक की बिक्री को ज्यादा बढ़ावा नही दिया गया। साल 2012 में पेट रॉक को फिर से लॉन्च किया गया। इसकी कीमत फिलहाल 20 डॉलर रखी गई है। साल 2015 में गैरी की मौत हो गई। फिलहाल पेट रॉक ट्रेडमार्क रोज़बड इंटरटेनमेंट के पास है। 

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