मोदी की स्कीम ने बदली 3 महिलाओं की लाइफ, कमाती हैं 10 हजार रु महीने

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेवरेट स्कीम्स में से एक दीनदयाल अंत्योदय योजना या Deendayal Antyodaya Yojana - National Urban Livelihoods Mission (DAY-NULM) देश की महिलाओं की लाइफ को बदलने में खासी कारगर हो रही है। इस स्कीम का फायदा उठाकर महिलाएं हर महीने 10 हजार रुपए तक कमा रही हैं। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने ऐसी 3 महिलाओं के नाम भी बताए हैं।

moneybhaskar

Jan 01,2019 01:00:00 AM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेवरेट स्कीम्स में से एक दीनदयाल अंत्योदय योजना या Deendayal Antyodaya Yojana - National Urban Livelihoods Mission (DAY-NULM) देश की महिलाओं की लाइफ को बदलने में खासी कारगर हो रही है। इस स्कीम का फायदा उठाकर महिलाएं हर महीने 10 हजार रुपए तक कमा रही हैं। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने ऐसी 3 महिलाओं के नाम भी बताए हैं।

क्या है योजना

इस योजना में दो घटक हैं, जिनमें से एक ग्रामीण भारत के लिए और दूसरी शहरी भारत के लिए है।

दीनदयाल अंत्योदय योजना के रूप में शहरी घटक को आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय (एचयूपीए) द्वारा लागू किया जाएगा। वहीं दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना के रूप में नामित ग्रामीण घटक को ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा लागू किया जाएगा।

योजना की ये हैं विशेषताएं

-कौशल प्रशिक्षण और स्थापन के माध्यम से रोजगार-मिशन के तहत शहरी गरीबों को ट्रेनिंग देकर कुशल बनाने के लिए 15 हजार रुपए का प्रावधान किया गया है, जो पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर के लिए प्रति व्यक्ति 18 हजार रुपए है।

-सामजिक एकजुटता- सदस्यों को ट्रेनिंग देने के लिए स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के गठन के माध्यम से ऐसा किया जाएगा, जिसमें प्रत्येक समूह को 10,000 रुपए का शुरुआती समर्थन दिया जाता है।

-शहरी गरीबों को सब्सिडी - माइक्रो एंटरप्राइजेज और ग्रुप इंटरप्राइजेज की स्थापना के जरिए स्व-रोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें व्यक्तिगत प्रोजेक्ट्स के लिए 2 लाख रुपए की ब्याज सब्सिडी और ग्रुप एंटरप्राइजेज पर 10 लाख रुपए की ब्याज सब्सिडी दी जाएगी।

-शहरी बेघरों के लिए आश्रय-शहरी बेघरों के लिए घरों के निर्माण की लागत योजना के तहत पूरी तरह से वित्त पोषित है।

-अन्य साधन - बुनियादी ढांचे की तैयार कर सेलर्स के लिए सेलर मार्केट का विकास और कौशल को बढ़ावा देना। साथ कूड़ा उठाने वालों और विकलांगों के लिए विशेष प्रोजेक्ट्स। 3 महिलाओं की सफलता की कहानी पढ़ें...

 

1. संचिता, असम

रेडीमेड गारमेंट बिजनेस

 

एक समय संचिता और उसकी फैमिली की कमाई हर महीने महज 3 हजार रुपए थी। फैमिली इनकम बढ़ाने के लिए संचिता ने डोर टू डोर रेडीमेट गारमेंट की बिक्री का काम शुरू किया। हालांकि उसे पूंजी की कमी के चलते दिक्कत हो रही थी। उसे DAY-NULM से 2 लाख रुपए का सब्सिडाइज्ड लोन मिला, जिससे उन्होंने अपने बिजनेस का विस्तार किया। आज वह मंथली 9,000 रुपए की कमाई कर रही हैं।

 

2.प्रीति सबत, ओडिशा

ग्रॉसरी शॉप

इनकम-10 हजार रुपए/महीने

नबरंगपुर जिले की रहने वाली प्रीति को तलाक के बाद एक समय खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने अपने घर से सिलाई-कढ़ाई का काम चालू किया, लेकिन उसे महज 3 से 4 हजार रुपए की इनकम हो रही थी। इस बीच उन्हें DAY-NULM स्कीम के बारे में मालूम चला और वह एक एसएचजी की सदस्य बन गईं। उन्होंने 1 लाख रुपए का लोन लेकर ग्रॉसरी बिजनेस शुरू किया। आज वह हर महीने 10 हजार रुपए की कमाई कर रही हैं।

 

 

3.बलजीत कौर, चंडीगढ़

होटल इम्प्लॉई

इनकम-9 हजार रुपए महीने

 

चंडीगढ़ की रहने वाली बलजीत सुून नहीं पाती हैं। अपनी इसी कमी की वजह से उनके लिए अपना सपना पूरा करना मुश्किल हो गया था। बलजीत का सपना होटल इंडस्ट्री में काम करने का था, लेकिन उसकी फैमिली की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि उन्हें कोर्स करा पाती। तभी उन्हें स्किल इंडिया मिशन के तहत DAY-NULM  के बारे में पता चला। उन्होंने ‘टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी’ में कोर्स किया। इन दिनों वह चंडीगढ़ के एक होटल में जॉब कर रही हैं और वह हर महीने 9 हजार रुपए कमाती हैं।

 

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