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  • Government to create 40 million well paying jobs in five years economic survey

आर्थिक सर्वे /पांच साल में अच्छे वेतन वाली 4 करोड़ नौकरियां पैदा करेगी सरकार

  • केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वे के जरिए पेश किया भविष्य में रोजगार का खाका
  • एसेम्बल इन इंडिया और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देकर पैदा की जाएंगी नौकरियां

Moneybhaskar.com

Jan 31,2020 03:09:35 PM IST

नई दिल्ली. आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि 2025 तक देश में अच्‍छे वेतन वाली 4 करोड़ नौकरियां होंगी और 2030 तक इनकी संख्‍या 8 करोड़ हो जाएगी। दुनिया के लिए भारत में एसेम्‍बल इन इंडिया और मेक इन इंडिया योजना को एक साथ मिलाने से निर्यात बाजार में भारत की हिस्‍सेदारी 2025 तक 3.5 प्रतिशत तथा 2030 तक 6 प्रतिशत हो जाएगी। भारत के पास श्रम आधारित निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चीन के समान अभूतपूर्व अवसर हैं।

चीन की तर्ज पर रणनीति बनाएगी सरकार

2025 तक भारत को 5 हजार अरब वाली अर्थव्‍यवस्‍था बनाने के लिए जरूरी मूल्‍य संवर्धन में नेटवर्क उत्‍पादों का निर्यात एक तिहाई की वृद्धि करेगा। समीक्षा में सुझाव दिया गया है कि निम्‍नलिखित अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत को चीन जैसी रणनीति का पालन करना चाहिए।

ये होंगे सरकार के अन्य लक्ष्य

-श्रम आधारित क्षेत्रों विशेषकर नेटवर्क उत्‍पादों के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विशेषज्ञता हासिल करना।
-नेटवर्क उत्‍पादों के बड़े स्‍तर पर एसेम्‍लिंग की गतिविधियों पर खासतौर से ध्‍यान केंद्रित करना।
-अमीर देशों के बाजार में निर्यात को बढ़ावा देना।
-निर्यात नीति सुविधाजनक होना।
-आर्थिक समीक्षा में भारत की ओर से किए गए व्‍यापार समझौतों का कुल व्‍यापार संतुलन पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्‍लेषण किया गया है।
-इसके अनुसार भारत की ओर निर्यात किए कुल उत्‍पादों में 10.9 फीसदी की जबकि विनिर्माण उत्‍पादों के निर्यात में 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
-कुल आयातित उत्‍पादों में 8.6 फीसदी तथा विनिर्माण उत्‍पादों के आयात में 12.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
-प्रति वर्ष भारत के विनिर्माण उत्‍पादों के व्‍यापार अधिशेष में 0.7 फीसदी तथा कुल उत्‍पादों के व्‍यापार अधिशेष में 2.3 फीसदी की वृद्धि हुई।

सरकार की उपलब्धियां

-नियमित मजदूरी/ वेतनभोगी कर्मचारियों की हिस्सेदारी में 5 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई है, जो 2011-12 के 18 फीसदी से बढ़कर 2017-18 में 23 फीसदी हो गई।
-इस श्रेणी में ग्रामीण क्षेत्रों में 1.21 करोड़ तथा शहरी क्षेत्रों में 1.39 करोड़ नए रोजगारों सहित लगभग 2.62 करोड़ नए रोजगार का सृजन होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि।
-अर्थव्यवस्था में कुल औपचारिक रोजगार में 2011-12 के 8 फीसदी की तुलना में 2017-18 में 9.98 फीसदी वृद्धि हुई।
-महिला श्रमिक बल की प्रतिभागिता में गिरावट आने की वजह से भारत के श्रमिक बाजार में लिंग असमानता का अंतर और बड़ा हो गया है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में और लगभग 60 फीसदी उत्पादकता आयु (15-59) ग्रुप पूर्ण कालिक घरेलू कार्यों में लगे हैं।

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