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बजट 2019 /लोगों को बीमारियों से बचाने के लिए मीठे और नमकीन सामान पर लगाएं ज्यादा टैक्स

Moneybhaskar.com

Jun 15,2019 10:38:23 AM IST

नई दिल्ली। सामाजिक क्षेत्र ने सरकार से चालू वित्त वर्ष के बजट में महिला सुरक्षा, महिला स्वास्थ्य, शिशु एवं गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण के लिए आवंटन बढ़ाने, खुले में शौच से मुक्त पंचायतों की तर्ज पर कुपोषण मुक्त पंचायत घोषित किए जाने के प्रावधान करने के साथ ही जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों से लोगों को बचाने के उद्देश्य से मीठे और नमकीन उत्पादों पर अधिक कर लगाने के सुझाव दिए हैं।

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सभी जिलों में महिलाओं के लिए बनाएं विशेष केंद्र

वित्‍त मंत्री निर्मला सीतामरण के साथ शुक्रवार को दिल्ली में सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने बजट पूर्व विचार-विमर्श में अपने सुझाव दिए। प्रतिनिधियों ने शिक्षा और सफाई खासतौर से ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वच्छता की व्यवस्था करने, महिलाओं की सुरक्षा मजबूत करने के लिए सुरक्षा की खामियों की पहचान करने के लिए ऑडिट कराने, शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के पोषण के लिए अधिक बजटीय आवंटन करने, सभी जिलों में महिलाओं के लिए एक विशेष केन्‍द्र बनाने, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के ढांचे का विस्‍तार करने, मुफ्त दवाओं और डायगोनेस्टिक सुविधाओं का प्रावधान करने, चिकित्‍सा उपकरणों पर करों को तर्कसंगत बनाने, द्व‍ितीय और तृतीय स्‍तर की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के क्षेत्र में सरकारी निजी भागीदारी को बढ़ावा देने, इलेक्‍ट्रॉनिक और परिवहन संपर्क के आधार पर क्‍लस्‍टर आधारित मॉडल स्‍कूल बनाने, 10वीं के बाद छात्रवृत्ति योजना के लिए आवंटन बढ़ाने, पुरस्‍कार शुरू करके अध्‍यापकों के योगदान को बढ़ावा देने, बाल श्रम को संरक्षण प्रदान करने के लिए निवेश करने, फल और सब्जियां खाने को बढ़ावा देने, मीठे और नमकीन उत्‍पादों पर अधिक कर लगाने, स्‍वच्‍छता आदतों को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण मल संबंधी प्रबंधन नीति बनाने, युवाओं में सामाजिक उद्यमिता को बढ़ावा देने, गंदे पानी को रिसाइकल करने और वर्षा जल से सिंचाई के लिए वित्‍तीय प्रोत्‍साहन देने, खुले में शौच मुक्‍त पंचायतों की तर्ज पर कुपोषण मुक्‍त पंचायतें घोषित करने की व्यवस्था करने, विशेष स्‍कूलों और पुनर्वास केन्‍द्रों के लिए बजटीय आवंटन में वृद्धि करने की सलाह भी दी गई है।

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इन मुद्दों पर हुआ विचार विमर्श

सीतारमण ने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि सामाजिक बुनियादी ढांचा क्षेत्रों जैसे शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और अन्‍य सेवाओं में सार्वजनिक निवेश लोगों के जीवन की गुणवत्‍ता का एक प्रमुख कारक है। सरकार शैक्षणिक स्‍तर में सुधार, युवाओं के कौशल विकास, नौकरियों के अवसर बढ़ाने, बीमारियां कम करने, महिलाओं को अधिकार सम्‍पन्‍न बनाने और समग्र विकास के लिए मानव विकास में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस बैठक में जिन प्रमुख मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया उनमें स्‍वास्‍थ्‍य (प्राइमरी स्‍वास्‍थ्‍य और तृतीय सेवाओं, आयुष और आयुर्वेद), शिक्षा (स्‍कूली और विश्वविद्यालयीन शिक्षा, निजी और सार्वजनिक शिक्षा), सामाजिक संरक्षण (वृद्धावस्‍था, महिला और बच्‍चे, दलित और अन्‍य पिछड़ा वर्ग तथा युवा), पेंशन और मानव विकास आदि शामिल हैं।

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बैठक में ये रहे शामिल

बैठक में वित्‍त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग, व्‍यय सचिव गिरीश चन्‍द्र मूर्मु, राजस्‍व सचिव अजय भूषण पांडेय, वित्तीय सेवाओं के सचिव राजीव कुमार, महिला और बाल विकास रविन्‍दर पवार, स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान विभाग के बलराम भार्गव, स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण विभाग के प्रीति सूदन, श्रम और रोजगार सचिव हीरालाल समरिया, केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्‍यक्ष प्रमोद चन्‍द्र मोदी, केन्द्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के अध्‍यक्ष पी के दास, मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमण्‍यम और वित्‍त मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे। सामाजिक क्षेत्र के प्रतिनिधियों में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्‍यक्ष रेखा शर्मा, बजट और शासन जवाबदेही केन्‍द्र के कार्यक्रम निदेशक असदुल्‍ला, भारत में यूनीसेफ की प्रतिनिधि यास्मीन अली, इंडियन स्‍कूल आफ बिजनेस के वित्‍त निदेशक वैद्यनाथ के सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की अध्‍यक्ष यामनी अय्यर, दलित मानवाधिकारों पर राष्‍ट्रीय अभियान की महासचिव बीना पल्‍लीकल और राष्‍ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्‍यक्ष प्रियंका कानूनगो शामिल थीं।

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