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आर्थिक सर्वेक्षण, 2019 /GST ने दिया झटका, GDP की तुलना में घटकर 10.9% रह गया टैक्स कलेक्शन

  • जीएसटी काउंसिल द्वारा तैयार कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को श्रम और भूमि कानून में भी दोहराने की वकालत

Moneybhaskar.com

Jul 04,2019 04:38:08 PM IST

नई दिल्ली. वित्त वर्ष 2018-19 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ने सरकारी खजाने को तगड़ा झटका दिया है। गुरुवार को संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण, 2018-19 के मुताबिक, इस अवधि में जीडीपी की तुलना में देश का कुल टैक्स कलेक्शन घटकर 10.90 फीसदी रह गया। इसकी वजह मुख्य रूप से जीएसटी रहा, जो बजट अनुमान की तुलना में लगभग 16 फीसदी कम रहा।

जीएसटी की सफलता को श्रम-भूमि कानून में दोहराने की वकालत

मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन द्वारा तैयार सर्वेक्षण में यह भी सुझाव दिया गया कि जीएसटी काउंसिल द्वारा तैयार कोऑपरेटिव फेडरलिज्म को श्रम और भूमि कानून में भी दोहराया जा सकता है।

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डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13.4 फीसदी बढ़ा

वित्त वर्ष 2018-19 में कॉर्पोरेट टैक्स के मोर्चे पर बेहतर प्रदर्शन के दम पर डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि इनडायरेक्ट टैक्स कलेक्शन बजट अनुमान की तुलना में लगभग 16 फीसदी कम रह गया, जिसकी मुख्य वजह जीएसटी रहा। सर्वेक्षण के मुताबिक, बजट अनुमान की तुलना में जीएसटी कलेक्शन 16 फीसदी कम रहा।

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जीडीपी की तुलना में घटा टैक्स रेवेन्यू

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में पेश सर्वेक्षण में कहा गया, ‘जीडीपी की तुलना में कुल टैक्स रेवेन्यू घटकर 10.9 फीसदी रहा गया, जो 2017-18 की तुलना में 0.3 फीसदी कम है।’ सरकार ने बजट में 2018-19 के दौरान डायरेक्ट टैक्स के मद में 11.50 लाख करोड़ रुपए और जीएसटी के मद में 7.43 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा था।
सर्वे में कहा गया कि बीते 6 साल के दौरान जीडीपी की तुलना में टैक्स में सुधार देखने को मिल रहा है, लेकिन 2017-18 की तुलना में 2018-19 में कुल टैक्स रेवेन्यू जीडीपी के अनुपात में 0.3 फीसदा घट गया।

जीएसटी में ग्रोथ होगी अहम

सर्वेक्षण के मुताबिक, ‘इनडायरेक्ट टैक्सेस में जीडीपी के अनुपात में 0.4 फीसदी की कमी की मुख्य वजह जीएसटी कलेक्शन में कमी रही।’ सर्वेक्षण में कहा गया कि जीएसटी से रेवेन्यू में बढ़ोतरी केंद्र और राज्य सरकार दोनों के रेवेन्यू में सुधार के लिहाज से अहम रहेगी।

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