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Budget 2019 : घर हो सकते हैं सस्ते अगर यह बातें मान ले सरकार, नारेडको ने दिए सुझाव

GST कम करने से लेकर से अफोर्डेबल व रेंटल  हाउिसंग पर फोकस करने की सिफारिश

Budget 2019 : Expectations of real estate sector 


नई दिल्ली. नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (नारेडको) ने सरकार से आगामी अंतरिम केंद्रीय बजट 2019-20 में विभिन्न नीतिगत उपायों के माध्यम से रियल एस्टेट उद्योग और घर खरीदारों की प्रमुख चिंताओं को दूर करने, हाउसिंग सेग्मेंटस में टैक्स इंसेटिव को लागू करने और खरीदार का भरोसा बढ़ाने का अनुरोध किया है। रियल एस्टेट क्षेत्र के राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थान नारेडको ने वित्त मंत्रालय और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय को अपना प्री-बजट ज्ञापन प्रस्तुत किया है। इसके माध्यम से नारेडको ने रियल एस्टेट के संबंध में कुछ सुझावों को सरकार के समक्ष विचार के लिए रखा है ताकि इस सेक्टर को प्रोत्साहित किया जा सके। यह भी पढ़ें . 

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सरकार के फैसलों से सेक्टर प्रभावित 
नारेडको के प्रेसिडेंट निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कठोर, हालांकि प्रगतिशील, विनियामक और वित्तीय सुधारों के कारण रियल एस्टेट सेक्टर एक कठिन दौर से गुजर रहा है। पिछले दो वर्षों में, जैसे नोटबंदी, रेरा, जीएसटी और बैंकिंग सुधारों के चलते इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड और बैंकों और एनबीएफसी के एनपीए बढ़े हैं, और इन सब से रियल एस्टेट सेक्टर प्रभावित हुआ है। नारेडको द्वारा अपने पूर्व बजट ज्ञापन में सुझाए गए कई उपायों से निर्माणाधीन प्रॉपर्टीज के लिए पूंजी तरलता और जीएसटी को तर्कसंगत बनाने में मदद मिलेगी और इससे काफी हद तक उद्योग की चिंताओं को दूर करने में मदद करेंगे।” यह भी पढ़ें . 

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GST कम करे सरकार 
उन्होंने कहा कि “नारेडको की प्रमुख मांग भूमि संपत्तियों के साथ निर्माणाधीन प्रॉपर्टीज पर जीएसटी की दर को तर्कसंगत बनाते हुए 18 प्रतिशत से कम कर 8 प्रतिशत की स्लैब में लाना है। हीरानंदानी ने कहा कि “नारेडको की सिफारिशों को सभी संबंधितों पक्षों के साथ विचार-विमर्श और परामर्श के कई दौर के बाद तैयार किया गया है और उद्योग और खरीदारों की अलग अलग परेशानियों को दर्शाता है। यदि इन्हें स्वीकार किया जाता है, तो यह उद्योग में सभी की चिंताओं को दूर कर देगा और बाजार में खरीदार का विश्वास वापस लाएगा।" यह भी पढ़ें . 

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अफोर्डेबल हाउसिंग में हो बदलाव
नारेडको चेयरमैन राजीव तलवार ने कहा कि “आईटी अधिनियम 1981 की धारा 80आईबीए का दायरा, जो कि अफोर्डेंबल हाउसिंग प्रोजेक्ट से प्राप्त लाभ और लाभ के 100 प्रतिशत के बराबर कटौती की अनुमति देता है, को अफोर्डेबल हाउसिंग की सभी श्रेणियों जिनमें ईडब्ल्यूसी, एलआईजी, एमआईजी-3 और एमआईजी-2 में लागू किया जाना चाहिए। ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि 80आईबीए में जून 2015 के 1 दिन बाद या उससे पहले स्वीकृत परियोजनाओं को शामिल किया जाना चाहिए, जब पीएमएवाई को 1 जून 2016 के स्थान पर शुरू किया गया था, और इसकी मान्यता वर्तमान सीमा चार मेट्रो के लिए 30 मीटर और अन्य शहरों के लिए 60 मीटर के बजाय 200 वर्ग मीटर कारपेट एरिया तक के प्रोजेक्टस तक विस्तारित की जानी चाहिए। इससे घर के खरीदारों के सभी वर्गों को कवर किया जा सकेगा। यह 2022 तक सभी के लिए आवास के सरकार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है।”

 

किराये से आय में कटौती की सीमा बढ़े 
तलवार ने कहा कि “आवास की आपूर्ति में जोड़ने के लिए, नारेडको ने धारा 80आईबीए के दायरे में रेंटल हाउसिंग के कारोबार में लगी कंपनियों की सेवाओं को लाने और धारा 24 (ए) के तहत, किराये की आय से कटौती की सीमा को बढ़ाने का सुझाव दिया है, जो कि सामान्य वर्ग के लिए वर्तमान में 50 प्रतिशत से कम 30 प्रतिशत करने और विकलांग व्यक्तियों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 100 प्रतिशत होनी चाहिए।”

 

रुके प्रोजेक्ट को पूरा करने में सहयोग करे सरकार 
नारेडको के वाइस चेयरमैन प्रवीण जैन ने कहा, प्रोजेक्टस में देरी के कारण पूरा सेक्टर को घरों के खरीदार परेशानी में हैं। “बंद पड़े प्रोजेक्टस, प्रॉपर्टी डेवलपर्स के साथ-साथ घर के खरीदारों के लिए भी चिंता का विषय रही हैं, जो अपनी बुक की गई प्रॉपर्टीज पर कब्जा प्राप्त करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह एक नए अवसर में बदल सकता है, यदि सरकार और लोन देने वाले संस्थान आगे आएं और रुके हुए प्रोजेक्टस को पूरा करने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था करें। नारेडको ने ने सरकार, बैंकिंग संस्थानों और अन्य ऋणदाताओं से आह्वान किया है कि वे पूंजी तरलता को बढ़ाएं और रुकी हुई परियोजनाओं को फिर से शुरू करें।”

 

यह भी हैं सिफारिशें 
प्रवीण जैन ने कहा कि “अन्य प्रमुख सिफारिशों में स्टॉक-इन-ट्रेड के रूप में रखी गई हाउसिंग यूनिटस से किराये की आय पर कर से छूट, पूंजीगत लाभ से छूट, धारा 54 के तहत, अगर बिक्री एक या अधिक घर खरीदने के लिए उपयोग की जाती है, तो ब्याज कटौती की सीमा धारा 24 (बी) के तहत, 2 लाख रूपए से 3 लाख रूपए तक बढ़ाई जाए और स्टांप ड्यूटी को जीएसटी के दायरे में शामिल करना है।”

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