Accidental Prime Minister ने पेश किया था सबसे लंबा Budget भाषण, मनमोहन के नाम है यह रिकॉर्ड  

नई दिल्‍ली. Accidental Prime Minister मनमोहन सिंह के बारे में कहा जात है कि वे बहुत चुप रहते हैं और जरूरत के वक्त भी कम बोलते हैं, लेकिन उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसके बारे में सुन कर आप चौंक जाएंगे। जी हां, उनके नाम सबसे लंबा बजट भाषण पेश करने का रिकॉर्ड है। 1991 में वित्त मंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण पढ़ा। उनका यह भाषण 18,650 शब्दों का था। माना जाता है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक किसी ने इतने शब्दों का बजट भाषण पेश नहीं किया है। इस बजट भाषण की कई खास बातें रहीं। आइए जानते हैं, उन्होंने अपने बजट भाषण में क्या-क्या कहा था 
 

Money Bhaskar

Jan 19,2019 01:58:00 PM IST

नई दिल्‍ली. Accidental Prime Minister मनमोहन सिंह के बारे में कहा जाता है कि वे बहुत चुप रहते हैं और जरूरत के वक्त भी कम बोलते हैं, लेकिन उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड है, जिसके बारे में सुन कर आप चौंक जाएंगे। जी हां, उनके नाम सबसे लंबा बजट भाषण पेश करने का रिकॉर्ड है। 1991 में वित्त मंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह ने अब तक का सबसे लंबा बजट भाषण पढ़ा। उनका यह भाषण 18,650 शब्दों का था। माना जाता है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक किसी ने इतने शब्दों का बजट भाषण पेश नहीं किया है। इस बजट भाषण की कई खास बातें रहीं। आइए जानते हैं, उन्होंने अपने बजट भाषण में क्या-क्या कहा था

राजीव गांधी से की थी शुरुआत
मनमोहन सिंह ने अपने बजट भाषण की शुरुआत स्वर्गीय राजीव गांधी को श्रद्धांजलि के साथ की थी। उन्होंने कहा - मुझे अकेलेपन का अजीब सा अहसास हो रहा है। मैंने एक ऐसे शख्स को खो दिया है, जो हमेशा मुस्कराते हुए बजट भाषण सुनता था। राजीव गांधी अब नहीं हैं, लेकिन उनका सपना जीवित है, वह भारत को 21वीं सदी में ले जाना चाहते थे। उनका सपना देश को मजबूत, एकजुट और तकनीक युक्त लेकिन मानवीय भारत बनाना था। मैं इस बजट को उनकी

जुलाई में पेश किया था पूर्ण बजट
1991 में नरसिम्हा राव सरकार का पहला बजट वित्त मंत्री के तौर मनमोहन सिंह ने 24 जुलाई 1991 को पेश किया। इस बजट में ही देश में आर्थिक सुधारों की घोषणा की गई थी और मनमोहन सिंह ने नई औद्योगिक नीति की घोषणा की थी। जिस राह पर अब तक देश आगे बढ़ रहा है।

विदेशी निवेश का रास्ता खुला
अपने बजट भाषण में मनमोहन सिंह ने घोषणा की कि देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। कुछ क्षेत्रों में 51 फीसदी तक विदेश निवेश की इजाजत दी जाएगी।

बढ़ा दिए थे खाद के नाम
मनमोहन सिंह ने खाद के नाम बढ़ाने की घोषणा कर किसानों को परेशान कर दिया था। बजट भाषण में उन्होंने कहा कि 1981 से खाद की कीमतें नहीं बढ़ी हैं, जबकि फसलों के दाम बढ़ रहे हैं। इसलिए खाद के दाम बढ़ने चाहिए। हालांकि उन्होंने वादा किया कि किसानों से फसल खरीद की कीमतें भी बढ़ाई जाएंगी, ताकि किसानों को नुकसान न हो। उन्होंने चीनी की सरकारी खरीद के दाम बढ़ाने की भी घोषणा की थी।

दुनिया को दी थी चुनौती
अपने बजट भाषण का समापन करते हुए उन्होंने कहा था कि विक्टर ह्यूगो ने कहा है कि दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को नहीं रोक सकती, जिसका वक्त आ चुका है, तो मैं सदन से कहता हूं कि आर्थिक शक्ति के रूप में भारत का उदय भी ऐसा ही एक विचार है. पूरी दुनिया साफ़ सुन ले. भारत अब जाग चुका है, हमें बढ़ना होगा, जीतना होगा।

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