विज्ञापन
Home » Budget 2019Interim Budget 2019 : who prepare Bugdet

Interim Budget 2019 : ऐसे बनता है बजट, कड़ी सुरक्षा के बीच चलती है कई माह तक तैयारी 

बजट के लिए कौन क्या करता है काम, जानें पूरा प्रोसेस 

Interim Budget 2019 : who prepare Bugdet


नई दि‍ल्‍ली. 1 फरवरी को देश का अंतरिम बजट (Interim Budget 2019 ) आने वाला है। मई में होने वाले आम चुनाव के मद्देनजर सरकार पूर्ण बजट पेश नहीं कर पाएगी, लेकिन सरकार को यह बजट तैयार करने के लिए भी पूरी कवायद करनी पड़ती है। आइए, हम बताते हैं कि एक बजट को तैयार करने के लिए सरकार को क्या-क्या कवायद करनी पड़ती है। 

 

यह डिवीजन तैयार करता है बजट 
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एक डिवीजन है– इकोनॉमिक अफेयर्स, और इसके अंदर एक विभाग है– बजट डिविजन। यह बजट डिविजन ही है जो हर साल भारत सरकार के लिए बजट बनाता है। बजट बनाने की प्रक्रिया प्रति वर्ष अगस्त-सितंबर माह में शुरू हो जाती है। इस प्रक्रिया को और बजट के प्रारूप को बहुत ही गोपनीय रखा जाता है।

 

कड़ी सुरक्षा के बीच तैयार होता है बजट 
सुरक्षा के लिहाज से बजट बनने की प्रक्रिया बननी शुरू होने से लेकर बजट पेश होने वाले दिन तक करीब 1 हजार कुत्तों की टीम बराबर बजट की सुरक्षा और गोपनीयता के लिए तैनात की जाती है। बजट का ड्राफ्ट बनने से लेकर बजट प्रिटिंग का कागज, प्रिटिंग, पैकेजिंग और संसद पहुंचने की प्रक्रिया के बीच कई बार बजट को लीक न होने देने के लिए सुरक्षा जांच करते हैं। 

 

कब और कैसे होती है शुरुआत
बजट डिविजन अगस्त के आखिर में या सितंबर के शुरू होते ही बजट सर्कुलर जारी करता है। इस सर्कुलर में भारत सरकार और उसके सभी मंत्रालयों और विभागों से संबंधित कंटेंट और स्टेटमेंट का पूरा विवरण होता है, जिसके आधार पर बजट की रूप-रेखा तैयार करनी होती है।

 

मंत्रालय चाहते हैं अधिक फंडिंग 
सितंबर के आखिर तक अगले वित्त वर्ष के लिए सरकारी खर्चे का अनुमानित आंकड़ा तैयार किया जाता है। वर्तमान में एक वर्ष का सरकारी खर्च उतना है, जितना देश में लोग खाने पर खर्च करते हैं। हर मंत्रालय अधिक से अधिक फंडिंग चाहता है। इसके लिए प्रत्येक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी वित्त मंत्रालय के साथ खूब निगोशिएट करते हैं। इतने सारे मंत्रालयों और विभागों के कारण यह प्रक्रिया नवंबर तक चलती है। 

 

फर्स्ट कट ऑफ बजट की तैयारी
दिसंबर आते ही बजट की पहली ड्राफ्ट कॉपी (इसे फर्स्ट कट ऑफ बजट कहा जाता है) को वित्त मंत्री के सामने रखा जाता है। फर्स्ट कट ऑफ बजट का पेपर ब्लू कलर का होता है। ऐसा कहा जाता है कि ब्लैक इंक लाइट ब्लू कलर के पेपर पर ज्यादा उभर कर सामने आता है।

 

विभिन्न लोगों से ली जाती है सलाह
जनवरी में बैंक एसोसिएशन, विभिन्न उद्योग समूह के प्रतिनिधियों और जाने-माने अर्थशास्त्रियों से वित्तमंत्री की मीटिंग होती है। वित्तमंत्री सबकी सलाह सुनते हैं, पर उसे बजट में शामिल करने या न करने का अंतिम फैसला उनके पास ही होता है।
 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन
Don't Miss