बजट 2019: अब पूरा हो सकेगा अपने घर का सपना, बजट में कई राहत देने वाली घोषणाएं

PropTiger.com के चीफ इंवेस्टमेंट ऑफिसर अंकुर धवन ने बताया कि इस बजट के जरिए सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को खुश होने के लिए कई मौके दिए हैं। सबसे ज्यादा असर पड़ेगा इनकम टैक्स स्लैब को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए किए जाने का। इससे लोग अपना घर खरीदने का सपना पूरा कर पाएंगे। न सिर्फ सरकार घर के खरीदारों को क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम दे रही है, बल्कि उनके हाथ में ज्यादा पैसा छोड़ रही है जिससे वे EMI भर सकें।

Money Bhaskar

Feb 01,2019 05:54:00 PM IST

नई दिल्ली.

अंतिरम बजट 2019 में सरकार ने कई ऐसी घोषणाएं की हैं जिनसे आम लोगों को काफी राहत मिल सकती है। इसमें सबसे अहम है टैक्स स्लैब बढ़ना। इसका असर तकरीबन सभी सेक्टर्स पर पड़ेगा। लोगों की सैलरी बढ़ेगी जिससे वे ज्यादा खर्च कर सकेंगे। इससे रियल एस्टेट सेक्टर को भी फायदा मिलेगा। PropTiger.com के चीफ इंवेस्टमेंट ऑफिसर अंकुर धवन ने बताया कि इस बजट के जरिए सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर को खुश होने के लिए कई मौके दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस बजट में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कई डायरेक्ट फायदे दिए गए हैं, जैसे कि एक साल के लिए Section 80IBA का एक्सटेंशन, प्राजेक्ट पूरा होने के दो साल तक नोशनल रेंट पर ब्याज नहीं लगेगा, लेकिन सबसे ज्यादा असर पड़ेगा इनकम टैक्स स्लैब को 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए किए जाने का। इससे लोग अपना घर खरीदने का सपना पूरा कर पाएंगे। न सिर्फ सरकार घर के खरीदारों को क्रेडिट लिंक सब्सिडी स्कीम दे रही है, बल्कि उनके हाथ में ज्यादा पैसा छोड़ रही है जिससे वे EMI भर सकें।

Moody’s Investors Service के असोसिएट मैनेजिंग डायरेक्टर, Gene Fang के मुताबिक केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 के लिए जो 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है, वह हमारी उम्मीदों के अनुरूप है। सरकार ने अपना राजस्व बढ़ाने के लिए किसी नई पॉलिसी की घोषणा नहीं की, लेकिन खर्च के लिए कई घोषणाएं की गईं। इससे राजकोषीय घाटा के लक्ष्य को पूरा करना सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा। पिछले दो साल से सरकार अपने राजकोषीय डेफिसिट के टार्गेट को पूरा नहीं कर पा रही है। ऐसे में हमें लगता है कि सरकार आने वाले वित्त वर्ष (2019-20) में भी इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाएगी। यह सरकार के खाते में नेगेटिव क्रेडिट के तौर पर दर्ज होगा। किसानों के लिए डायरेक्ट इनकम सपोर्ट स्कीम की घोषणा और सब्सिडाइज्ड एग्री लोन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में जरूर उछाल आएगा, लेकिन इससे सरकार पर खर्च का बोझ भी बढ़ेगा।

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