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Budget 2019 :  व्यापारियों ने प्रधानमंत्री से मांगा पैकेज, जानें क्या हैं डिमांड

मोदी सरकार के बजट से व्यापारियों को हैं कई उम्मीदें

Budget 2019 : What is the expectations of traders

Budget expectations of traders 

कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजकर बजट से पहले पैकेज घोषणा की मांग की है। कैट ने कहा कि व्यापारियों को 100 फीसदी कम्प्यूटराइजेशन से जोड़ना चाहिए। साथ ही, जीएसटी, सस्ता लोन जैसी डिमांड की भी गई हैं। 

नई दिल्ली. कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजकर बजट से पहले पैकेज घोषणा की मांग की है। कैट ने कहा कि व्यापारियों को 100 फीसदी कम्प्यूटराइजेशन से जोड़ना चाहिए। साथ ही, जीएसटी, सस्ता लोन जैसी डिमांड की भी गई हैं। 

 

पैकेज में क्या हो शामिल 
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा है कि 
- जीएसटी में पंजीकृत प्रत्येक व्यापारी का 10 लाख रुपये तक का एक्सीडेंट बीमा सरकार करे जैसा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के व्यापारियों के लिया किया है।
- व्यापारियों को कम्प्यूटरीकृत करने के लिए कंप्यूटर एवं उससे सम्बंधित सामान खरीदने हेतु सब्सिडी दी जाए। क्योंकि देश में अभी तक केवल 35 % व्यापारी ही अपने व्यापार में कंप्यूटर का उपयोग करते हैं जबकि सरकार के पूर्ण डिजिटल हो जाने के कारण बाकी के 65 प्रतिशत व्यापारियों को कंप्यूटर से जोड़ना आवश्यक है। 
- देश के रिटेल व्यापार के लिए एक राष्ट्रीय व्यापार नीति बनाई जाए
- घरेलू व्यापार की देख रेख के लिए एक आंतरिक व्यापार मंत्रालय का गठन किया जाए
- लम्बे समय से लंबित ई कॉमर्स पालिसी को तुरंत लागू किया जाए तथा एक निष्पक्ष एवं पारदर्शी ई कॉमर्स पोर्टल खोलने में सरकार व्यापारियों की सहायता करे
- ई कॉमर्स व्यापार को संचालित करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाए 
- रिटेल व्यापार को संचालित करने के लिए एक रिटेल रेगुलेटरी अथॉरिटी का भी गठन किया जाए

 

 ई कॉमर्स पर फोकस
कैट ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि रिटेल सेक्टर की वित्तीय एवं सामजिक स्तिथि पर देश भर में एक सर्वे कार्य जाए तथा सर्वे रिपोर्ट के आधार पर व्यापारियों के लिए नीतियां एवं योजनाएं बनाई जाए। 
- खंडेलवाल ने यह भी आग्रह किया है कि व्यापारियों को रियायती ब्याज दर पर बैंकों से क़र्ज़ मिलना चाहिए। 
- अभी तक केवल 5 प्रतिशत व्यापारी ही बैंक अथवा वित्तीय संस्थानों से क़र्ज़ प्राप्त कर पाते हैं, जबकि बचे 95 प्रतिशत व्यापारी अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए या तो निजी कर्जदाता, रिश्तेदार अथवा अपने निजी स्रोतों पर ही निर्भर रहते हैं।  
- रियायती ब्याज दर पर कर्ज की सुविधा व्यापारियों के कर्मचारियों को भी मिलनी चाहिए
- मुद्रा योजना में बैंकों का सीधा रोल समाप्त किया जाए और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कम्पनी एवं माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशन के माध्यम से लोगों को लोन लिया जाए 
- प्राइवेट मनीलेंडर को पंजीकृत कर उनके द्वारा भी क़र्ज़ दिया जाए वहीँ बैंक इन संस्थानों को रियायती दर पर कर्ज दिया जाए

 

ट्रेड प्रमोशन कौंसिल की मांग 
- कैट ने यह भी आग्रह किया है कि देश के घरेलू व्यापार को बढ़ावा देने एवं उसे व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए सरकार एक ट्रेड प्रमोशन कॉउन्सिल का गठन करे जो सरकार एवं व्यापारियों के बीच एक सेतु का काम करे
-  व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रकार के डेबिट अथवा क्रेडिट कार्ड के उपयोग पर कोई शुल्क नहीं लगाना चाहिए
-वर्तमान में बैंक 1 % से 2 % का शुल्क लगाते हैं जिससे डिजिटल भुगतान हतोत्साहित होता है
-डिजिटल भुगतान का उपयोग करने पर कर में छूट तथा अन्य अनेक प्रकार के लाभ दिए जाएं 
- देश में महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष महिला उद्यमी योजना चलाई जानी चाहिए 
- दिल्ली एवं मुंबई सहित अन्य शहरों में मकान मालिक और किरायेदारों के विवाद को देखते हुए एक संतुलित राष्ट्रीय किरायेदारी क़ानून बनना चाहिए जिसे सभी राज्य समान रूप से अपने राज्य में लागू करें 

 

पेंशन स्कीम 
- जीएसटी में पंजीकृत सभी व्यापारियों के लिए सरकार एक पेंशन स्कीम लागू करे 
- जीएसटी को और अधिक सरल बनाया जाए तथा देश भर में लगने वाले मंडी टैक्स एवं जम्मू में लगने वाले टोल टैक्स को समाप्त किया जाए
- जीएसटी में 18 प्रतिशत की कर दर को ख़त्म किया जाए एवं 28 % की कर दर में केवल विलासिता की चंद वस्तुओं को रखा जाए 
-इस टैक्स दर में से ऑटो पार्ट्स, सीमेंट आदि को निकाल कर 12 प्रतिशत की दर में रखा जाए एवं अन्य सभी कर दरों में शामिल की गई वस्तुओं की एक बार नए सिरे से समीक्षा की जाए 
- रॉ मटेरियल के रूप में प्रयुक्त होने वाली वस्तुओं एवं गरीब वर्ग के प्रयोग की वस्तुओं को 5 प्रतिशत की कर दर में रखा जाए 

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