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Budget 2019: हेल्थ इंश्योरेंस को अनिवार्य करने का हो सकता है प्रावधान

Election Budget 2019: इस बार बजट में सभी ज़रूरी क्षेत्रों में अधिकतम सहायता प्रदान करने पर ध्यान दिया जाएगा

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नई दिल्ली। हम सभी अगले वित्त वर्ष के लिए वार्षिक बजट का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं। भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा लगभग एक सप्ताह बाद यह बजट पेश किया जाएगा। वहीं, लोकसभा चुनाव भी काफी करीब हैं और ऐसे में मौजूदा सरकार के लिए यह थोड़ा मुश्किल काम होने वाला है। बजट में टैक्स भरने वाली आम जनता की उम्मीदों को पूरा करना आसान काम नहीं होगा। वैसे भी, इस बार का बजट अंतरिम बजट होगा। अपने हाल के एक भाषण में भारत के केंद्रिय मंत्री अरुण जेटली ने यह साफ कर दिया था कि इस बार के अंतरिम बजट में एक सामान्य बजट पेश करने की परंपरा से हटकर कुछ अलग होगा और सभी ज़रूरी क्षेत्रों में अधिकतम सहायता प्रदान करने पर ध्यान दिया जाएगा। भूतपूर्व पूर्व वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी संकेत दिया था कि इस वर्ष का बजट काफी हद तक उन आर्थिक मुद्दों पर केंद्रित होगा जहां तुरंत कदम उठाये जाने की ज़रूरत है – यह एक ठोस संकेत है कि सत्ता में मौजूद सरकार आगामी चुनावों से पहले अपने अंतिम बजट का इस्तेमाल करदाताओं को लुभाने के लिए करेगी। सभी अन्य क्षेत्रों की तरह अरुण जेटली द्वारा किये गये कई सारे वादों से बीमा क्षेत्र में भी काफी दिलचस्पी जगी है, जहां आगामी बजट में कुछ सकारात्मक टैक्स लाभ और नियामकीय ढांचे की उम्मीद की जा रही है। बीमा उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि इस वर्ष वित्त मंत्री का बजट भाषण बीमा क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण होने वाला है क्योंकि वर्ष 2018 में इस उद्योग में विभिन्न महत्वपूर्ण घोषणाएं और नियामकीय बदलाव देखने मिले हैं। केंद्र की एनडीए सरकार ने आम जनता के हित में कई सारे प्रमुख फैसले लिये हैं, जिसमें स्वास्थ्य बीमा में मानसिक बीमारियों का समावेश, मोटर इंश्योरेंस के नियमों में बदलाव, और सार्वजनिक क्षेत्र की तीन गैर-जीवन बीमा कंपनियों के सफल विलय का फैसला भी शामिल था। आइए जानते हैं पॉलिसीबाजार डॉट कॉम के सीईओ और को-फाउंडर याशीष धईया को क्या है बजट से उम्मीदें: 

 

स्वास्थ्य बीमा उद्योग


इसमें कोई शक नहीं है कि भारत में अलग-अलग सरकारों द्वारा स्वास्थ्य सेवा प्रणाली के संचालन को समर्थन देने के उद्देश्य से कई नए कानून एवं नीतियां बनाई गई थी। लेकिन दुर्भाग्यवश इनमें से अधिकतर कानूनों को व्यवस्थित तरीके से लागू नहीं किया जा सका है। आने वाले बजट में स्वास्थ्य बीमा उद्योग उन सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक होगा जहां तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक आम लोगों के बीच स्वास्थ्य बीमा के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने की सख्त ज़रूरत है, खासकर निम्न एवं मध्यम वर्ग के बीच। बीमा कंपनियों का मानना है कि सेक्शन 80डी के अंतर्गत रु. 25,000/- की मौजूदा टैक्स छूट को बढ़ाकर रु. 150,000 करना एक अच्छी शुरुआत होगी और इसके साथ ही मौजूदा 18% जीएसटी में भी छूट दिया जाना चाहिए। कई बीमा कंपनियों की यह भी मांग है कि जिस प्रकार से मोटर इंश्योरेंस एक्ट के अंतर्गत मोटर इंश्योरेंस अनिवार्य है, वैसे ही एक आवश्यक कानून बनाकर स्वास्थ्य बीमा को भी अनिवार्य बनाया जाए। अंतरिम बजट से स्वास्थ्य बीमा उद्योग को एक अन्य बड़ी उम्मीद यह भी है कि उपभोक्ताओं को 5 वर्षों तक लेवल प्रीमियम (एक समान प्रीमियम) चुकाने की सुविधा दी जाए और इसके लिए जीवन बीमा की तरह मासिक, त्रैमासिक, अर्ध वार्षिक और सीमित अवधि तक भुगतान करने जैसे विभिन्न भुगतान विकल्प भी दिये जाएं। 

 

जीवन बीमा उद्योग


जीवन बीमा उद्योग के लिए इस वक्त की सबसे बड़ी चिंता यही है कि भारत में जीवन बीमा के असली उद्देश्य के बारे में पर्याप्त जागरूकता नहीं है। हाल की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 133 करोड़ जनसंख्या वाले भारत देश में जीवन बीमा उत्पादों की पहुंच, कुल जीडीपी के 3% से भी कम है। इस मुद्दे को हल करने के लिए जीवन बीमा कंपनियां आगामी अंतरिम बजट में नियामकीय प्रणाली में कुछ बदलाव करने की मांग कर रही हैं। बीमा कंपनियां चाहती हैं कि आयकर अधिनियम के तहत (80सी के अतिरिक्त) एक अलग सेक्शन बनाया जाए, जिसमें लोगों को प्योर लाइफ इंश्योरेंस प्लान्स के लिए चुकाए गए प्रीमियम पर टैक्स छूट मिले। इसके अलावा, प्योर प्रोटेक्शन प्लान्स, जिसमें टर्म लाइफ और हेल्थ दोनों ही शामिल हों, उन पर जीएसटी से छूट प्रदान करने की मांग भी की जा रही है। अंतरिम बजट में यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान्स – लंबी अवधि के निवेश-सह-बीमा उत्पादों के लिए भी एक महत्वपूर्ण बदलाव की उम्मीद जा रही है। सरकार से यह उम्मीद की जा रही है कि यूलिप्स उत्पादों की मौजूदा लॉक-इन अवधि 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष (ईएलएसएस के समान) की जाए और इन पर लगाए जाने वाले जीएसटी से भी छूट प्रदान की जाए, जो कि अभी 18% है। ऐसी उम्मीद है कि यह सभी नियम जीवन बीमा क्षेत्र में तत्काल विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

मोटर एवं यात्रा बीमा उद्योग


भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) की ओर से दिये गये हालिया संकेतों के अनुसार दो-पहिया एवं चार-पहिया वाहनों के बीमा प्रीमियम वित्त वर्ष 2020-21 से कम होने के सार है। आईआरडीएआई की ओर से मोटर वाहनों के लिए थर्ड पार्टी (टीपी) इंश्योरेंस हेतु वार्षिक प्रीमियम तय करने की आम प्रथा को बंद किया जा सकता है। सभी अन्य बीमा श्रेणियों की तरह मोटर एवं यात्रा बीमा उद्योग भी बीमा कंपनियों द्वारा बेचे जाने वाले बीमा उत्पादों पर जीएसटी से छूट दिये जाने की उम्मीद लगाए हुए हैं। ऐसा करने पर अधिक से अधिक लोगों को पर्याप्त बीमा कवर लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

एंजेल टैक्स


वहीं, स्टार्ट-अप्स को आयकर विभाग द्वारा भेजी जाने वाली नोटिस एक बड़ी चिंता बनी हुई है। यह नोटिस उन्हें फंडिंग के विभिन्न चरणों में हासिल हुई एंजेल फंडिंग के लिए भेजी गई है। सामान्य शब्दों में कहें तो एक स्टार्ट-अप द्वारा कंपनी के शेयर जारी करते हुए जुटाई गई पूंजी पर लागू होने वाले इनकम टैक्स की देनदारी को एंजेल टैक्स कहते हैं। एंजेल टैक्स को लेकर हो रहे भारी विरोध के मद्देनज़र इस वर्ष के अंतरिम बजट में आंत्रप्रेन्योर्स और एंजेल इन्वेस्टर्स एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद लगाए बैठे हैं। दोनों वर्गों को इस टैक्स को रद्द किये जाने, टैक्स दरों में कटौती या इस टैक्स स्लैब पर बेहतर स्पष्टता दिये जाने की भी अपेक्षा है।

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