Budget 2019 : पेट्रोल डीजल के विकल्प पर हो फोकस, बायोडीजल इंडस्ट्री को हैं उम्मीदें 

Budget 2019 : केंद्र सरकार यदि पेट्रोल और डीलज की खपत को कम करना चाहती है तो 1 फरवरी 2019 को पेश होने वाले बजट में बायोडीजल इंडस्ट्री को फोकस किया जाना चाहिए। बायोडी एनर्जी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ शिवा विग ने कहा कि बायोडीजल इंडस्ट्री के डेवलपमेंट के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए अलग से विशेष फंड बनाए जाना चाहिए। 
 

Money Bhaskar

Jan 24,2019 07:01:00 PM IST

नई दिल्ली. केंद्र सरकार यदि पेट्रोल और डीलज की खपत को कम करना चाहती है तो 1 फरवरी 2019 को पेश होने वाले बजट में बायोडीजल इंडस्ट्री को फोकस किया जाना चाहिए। बायोडी एनर्जी (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ शिवा विग ने कहा कि बायोडीजल इंडस्ट्री के डेवलपमेंट के इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए अलग से विशेष फंड बनाए जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल इंडस्ट्री की अच्छी वृद्धि और असीम संभावना को देखते हुए इसमें निवेश पर जोर दिया जाना चाहिए। बायोफ्यूल/ बायोडीज़ल प्लांट लगाने के लिए आवश्यक मशीनों के आयात पर शुल्क शून्य कर दिया जाए। पूरी दुनिया में भारतीय उत्पादों और तकनीक बेचने के लिए बाजार को विभिन्न सहायता दी जाए। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए विशेष फंड का प्रावधान किया जाए

5 फीसदी हो जीएसटी
उन्होंने कहा कि बायोफ्यूल/ बायोडीजल संबंधी सभी उत्पादों पर जीएसटी की न्यूनतम दर अर्थात 5 प्रतिशत लागू किया जाए। साथ ही, डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरर्स के प्रोत्साहन के लिए आसान लोन उपलब्ध कराना और लोन आबंटन में इसे प्राथमिक क्षेत्र का दर्जा दिया जाए। बजट में यूज़्ड कुकिंग ऑयल एकत्र और प्रॉसेस करने के लिए प्रोत्साहन की घोषणा की जाए।

बजट से उम्मीदें
इस बजट से उम्मीद रखते हुए शिवा ने कहा, ‘‘इस उद्योग में हमें केंद्रीय बजट 2019-20 से बहुत उम्मीदें हैं। आशा है स्वच्छ एवं सस्ता ईंधन सुनिश्चित करने के सरकार के मिशन को पूरा करने के लिए बायोफ्यूल और बायोडीज़ल सेक्टर पर पर्याप्त ध्यान दिया जाएगा। इस बजट में निस्संदेह भारत में बायोडीज़ल उत्पादन बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा।’’

बढ़ रही है पेट्रोल डीजल की खपत
गौरतलब है कि दिल्ली और गुरुग्राम मिला कर प्रति वर्ष डीजल की खपत 16,99,000 टन है। एक अनुमान से यदि केवल 5 प्रतिशत बायोडीजल भी पेट्रोलियम डीज़ल में मिलाया जाए तो सालाना 84,950 टन डीज़ल की बचत होगी। शोध से यह सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर की आबादी 4.7 करोड़ है। भारत में प्रति व्यक्ति खाद्य तेल की खपत सालाना 14.4 किग्रा है और केवल दिल्ली और गुरुग्राम मिला कर प्रति वर्ष खाद्य तेल की खपत 6,76,800 टन है जो बहुत बड़ी मात्रा है। अब यदि हम इसका केवल 10 प्रतिशत बरबाद होना मान लें तो भी उपयोग के बाद बायोडीजल बनाने के लिए सालाना 67,680 टन कुकिंग ऑयल उपलब्ध होगा।

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