Budget में मिडिल क्लास और किसानों को मिलेगी सौगात? इन 10 प्वाइंट्स पर रखें नजर

Modi Govt Interim Budget 2019 Updates प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई वाली सरकार कुछ ही अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश करने जा रही है। आगामी आम चुनाव को देखते हुए किसानों, आम आदमी और कॉरपोरेट्स के लिए कई बड़े ऐलान होने का अनुमान है। हम ऐसे 10 प्वाइंट्स के के बारे में बता रहे हैं, जिन पर आपके लिए इस बजट में नजर रखना जरूरी है।

moneybhaskar

Feb 01,2019 02:27:00 PM IST


नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुआई वाली सरकार कुछ ही अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश करने जा रही है। आगामी आम चुनाव को देखते हुए किसानों, आम आदमी और कॉरपोरेट्स के लिए कई बड़े ऐलान होने का अनुमान है। हम ऐसे 10 प्वाइंट्स के के बारे में बता रहे हैं, जिन पर आपके लिए इस बजट में नजर रखना जरूरी है।

1.फिस्कल डेफिसिट

सरकार पर फिस्कल डेफिसिट को कम करने का खासा प्रेशर है। वित्त वर्ष 2018 में भी फिस्कल डेफिसिट 2017 की तरफ 3.5 फीसदी के स्तर पर बरकरार रहा था। वित्त वर्ष 2019 के लिए बजट अनुमान 3.3 फीसदी है। अगर फिस्कल डेफिसिट कम करने का लक्ष्य तय नहीं किया जाता है तो इसका ग्लोबल इन्वेस्टर्स और मार्केट पर खासा असर पड़ेगा।

2.डिसइन्वेस्टमेंट टारगेट

बजट में गौर करने वाली बात होगी कि सरकार सामाजिक क्षेत्र पर खर्च बढ़ाने के लिए क्या डिसइन्वेस्टमेंट का टारगेट बढ़ाएगी। वित्त वर्ष 2019 के लिए अभी 80 हजार करोड़ रुपए का बजट अनुमान है, जो बीते वित्त वर्ष की तुलना में 20 हजार करोड़ रुपए कम है।

3.नए टैक्स या सरचार्ज

वर्ष 2015 में सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स रेट को घटाकर 25 फीसदी करने का वादा किया था। देश की शीर्ष 7000 से ज्यादा कंपनियां अभी तक इसका इंतजार कर रही हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार देश की बड़ी कंपनियों पर कोई सरचार्ज लगाती है या नहीं।

4. इनकम सपोर्ट स्कीम

राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने हाल में केंद्र में सरकार बनने पर गरीबों को ‘न्यूनतम आय की गारंटी’ का वादा किया है। हालांकि सरकार द्वारा पहले से ही ऐसी ही एक स्कीम शुरू किए जाने की चर्चाएं हो रही हैं, जिसे इनकम सपोर्ट स्कीम बताया जा रहा है। अगर बजट में इसका ऐलान होता है तो इसका असर व्यापक होगा।
घरेलू रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स (India Ratings) ने अनुमान जाहिर किया कि अगर बजट में गरीबों के लिए ऐसी किसी इनकम सपोर्ट स्कीम (income support scheme) का ऐलान होता है तो केंद्र सरकार पर सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपए या केंद्र और राज्यों पर मिलाकर कुल जीडीपी का 0.70 फीसदी बोझ पड़ेगा।

5. हर किसान के खाते में डाले जा सकते हैं 7-8 हजार रु

मोदी सरकार किसानों के लिए बजट में राहत पैकेज का ऐलान कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो लोकसभा चुनाव से पहले किसानों को पैकेज की पहली किस्त जारी हो जाएगी। नीति आयोग ने भी किसानों के खाते में सालाना 15 हजार रुपए सीधे खाते में भेजने की सिफारिश की थी। मतलब किसान को हर फसल से पहले 7500 रुपए दिए जाएंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक किसानों को जमीन के आधार पर सहायता राशि दी जा सकती है। इसका फायदा किसान क्रेडिट कार्ड से मिलेगा। देश में करीब 3 करोड़ किसानों के पास क्रेडिट कार्ड है। इनमें से आयकर के दायरे में आने वाले कियानों से इस सुविधा का फायदा नहीं मिलेगा। साथ ही इस सुविधा का फायदा देने के लिए कुछ अन्य मानक बनाए जा सकते हैं।

6. 5 लाख रु हो सकती है इनकम टैक्स छूट की सीमा

मौजूदा सरकार को किसानों के बाद सबसे ज्यादा चिंता मिडिल क्लास की है। ऐसे में बजट (Interim Budget) में उनके लिए कोई ऐलान नहीं होता है तो चुनाव में यह तबका बीजेपी के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार अगर इनकम टैक्स छूट की सीमा 5 लाख रुपए कर दे तो मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है।

7. लॉन्च हो सकता है गोल्ड सेविंग बैंक अकाउंट

अंतरिम बजट (Interim Budget) में केंद्र सरकार सोने की खरीदारी को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं की घोषणा कर सकती है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार अंतरिम बजट में गोल्ड सेविंग अकाउंट लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना के तहत लोग इस खाते में नकद जमा कराएंगे और बैंक उतनी ही कीमत का सोना उस खाते में क्रेडिट कर देंगे। इस बैंक खाते के साथ पासबुक भी मिलेगी, जिसमें सारा ब्योरा दर्ज होगा। साथ ही लोग सोने की सावधि जमा (आरडी) भी कर सकेंगे।

8. हेल्थ इंश्योरेंस हो सकता है अनिवार्य

बजट में स्वास्थ्य बीमा उद्योग उन सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक होगा जहां तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स के मुताबिक आम लोगों के बीच स्वास्थ्य बीमा के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने की सख्त ज़रूरत है, खासकर निम्न एवं मध्यम वर्ग के बीच। एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक आवश्यक कानून बनाकर स्वास्थ्य बीमा को भी अनिवार्य बनाया जा सकता है। अंतरिम बजट से स्वास्थ्य बीमा उद्योग को एक अन्य बड़ी उम्मीद यह भी है कि उपभोक्ताओं को 5 वर्षों तक लेवल प्रीमियम (एक समान प्रीमियम) चुकाने की सुविधा दी जाए और इसके लिए जीवन बीमा की तरह मासिक, त्रैमासिक, अर्ध वार्षिक और सीमित अवधि तक भुगतान करने जैसे विभिन्न भुगतान विकल्प भी दिये जाएं।

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10- लोकसभा चुनाव से पहले मध्यम वर्ग, किसानों और युवाओं को रिझाने के लिए हो सकती हैं कई घोषणाएं

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