Budget में रिफॉर्म से किनारा करेगी सरकार, वोटर्स को लुभाने पर होगा जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार अगला आम चुनाव जीतने के लिए हर दांव चलने के लिए तैयार हैं। इस क्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुआई वाली केंद्र सरकार इस बजट (Budget) में किसानों को सौगात और टैक्स में कटौती के साथ ही ग्रामीण और शहरी मिडिल क्लास को लुभाने के लिए कई ऐलान करेगी।

moneybhaskar

Jan 31,2019 08:29:00 PM IST

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार अगला आम चुनाव जीतने के लिए हर दांव चलने के लिए तैयार हैं। इस क्रम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुआई वाली केंद्र सरकार इस बजट (Budget 2019) में किसानों को सौगात और टैक्स में कटौती के साथ ही ग्रामीण और शहरी मिडिल क्लास को लुभाने के लिए कई ऐलान करेगी।

पिछले महीने तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में हार और मई में संभावित आम चुनावों को देखते हुए पीएम मोदी कृषि से आमदनी में कमी और पर्याप्त रोजगार पैदा करने को लेकर उनकी नीतियों पर उठते सवालों के मद्देनजर खासे असंतोष का सामना करना पड़ रहा है।

टैक्स कट जैसी योजनाओं को चुनाव तक टाल सकती है सरकार

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि चुनावी मजबूरियों को देखते हुए सरकार बड़ी कंपनियों के लिए टैक्स कट और बजट घाटे (budget deficit) में कमी की योजनाओं को कम से कम चुनाव तक के लिए टाल सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की गैर मौजूदगी में अंतरिम वित्त मंत्री पीयूष गोयल 1 फरवरी को बजट पेश करेंगे। जेटली मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए फिलहाल अमेरिका में हैं।

3.5 फीसदी के स्तर पर पहुंच सकता है फिस्कल डेफिसिट

टैक्स कलेक्शन में कमी के साथ ही व्यय बढ़ने से मार्च में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान फिस्कल डेफिसिट (fiscal deficit) जीडीपी (GDP) की तुलना में 3.5 फीसदी के स्तर तक पहुंच सकता है। बजट चर्चा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह आंकड़ा 3.3 फीसदी के लक्ष्य से कहीं आगे निकल सकता है।

मार्च में कड़े फैसले ले सकती है सरकार

सूत्रों के मुताबिक, मार्च में इलेक्शन शिड्यूल तय होने के बाद सरकार कुछ करेक्टिव एक्शन ले सकती है, तब तक जनता का फोकस चुनाव प्रचार की तरफ हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘फिस्कल डेफिसिट को काबू में करने के लिए सरकार मार्च में खर्च घटाने के उपाय कर सकती है।’
वित्त मंत्रालय ने मार्च, 2018 में समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कैपिटल एवं अन्य खर्च में लगभग 75 हजार करोड़ रुपए की कटौती की थी। लेकिन मोदी सरकार हाल के महीनों में खर्च में कमी से पीछे हटती दिखी है।

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