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1 फरवरी को अंतरिम बजट पेश होगा या वोट ऑन अकाउंट? बना हुआ सवाल

Election Budget 2019: 1 फरवरी को अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश किया जाएगा या फिर लेखानुदान (Vote on Account)।

Modi Govt presents Interim Budget or Vote on Account

पीयूष गोयल (Piyush Goyal) को एक बार फिर वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के बाद यह संशय तो दूर हो गया कि अगला बजट कौन पेश करेगा। हालांकि यह सवाल अभी तक बना हुआ है कि एक फरवरी को अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश किया जाएगा या फिर लेखानुदान (Vote on Account)।

नई दिल्ली. पीयूष गोयल (Piyush Goyal) को एक बार फिर वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के बाद यह संशय तो दूर हो गया कि अगला बजट कौन पेश करेगा। हालांकि यह सवाल अभी तक बना हुआ है कि एक फरवरी को अंतरिम बजट (Interim Budget) पेश किया जाएगा या फिर लेखानुदान (Vote on Account)।

 

लग रही हैं अटकलें

 

Interim Budget  के आकलन में बदलाव को स्वतंत्र होगी नई सरकार

हालांकि सत्ता संभालने के बाद आगामी सरकार अपना पूर्ण बजट पेश करते समय अंतरिम बजट (Interim Budget) के आकलन में परिवर्तन के लिए स्वतंत्र होगी। अब तक देश में  कार्यकाल समाप्त होने वाली सरकारों ने अंतरिम बजट (Interim Budget) में बड़े नीतिगत फैसले लेने या कराधान के प्रस्ताव करने से दूर रहने की परंपरा का पालन किया है। 

 

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बीजेपी के लिए अंतिम मौका

विगत वर्षो पर नजर डालें तो 2000 के बाद तीन बार अंतरिम बजट पेश किए गए हैं। एक मार्केट रिसर्च कंपनी का कहना है कि यह कवायद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पास करों और परियोजनाओं पर खर्च के माध्यम से समाज के एक बड़े वर्ग को खुश करने का अंतिम अवसर हो सकती है।

पिछले सप्ताह जेएम फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2018-19 में सूचीबद्ध फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के संशोधित फार्मूले के अनुसार, फसलों की खरीद में बढ़ोतरी के वादे में विफल होने के बाद एक फरवरी 2019 को सरकार के लिए अंतिम अवसर होगा जब वह लेखानुदान ((Vote on Account)) के बजाए अंतरिम बजट (Interim Budget) की घोषणाओं  के माध्यम से समाज के एक बड़े वर्ग को खुश कर सकती है, जिसमें करों में बदलाव और परियोजनाओं के खर्च में बदलाव किया जा सकता है।

 

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कारोबारियों को सस्ता कर्ज देने पर विचार

नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि अगला आम चुनाव अप्रैल-मई में होने वाला है, इसलिए सरकार छोटे कारोबारी वर्ग को सस्ते कर्ज मुहैया करवाने एवं मुफ्त दुर्घटना बीमा प्रदान करने पर विचार कर रही है। नवंबर 2016 में नोटबंदी से यह वर्ग प्रभावित हुआ है। 
वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद ने छोटे कारोबार के लिए छूट की सीमा 20 लाख रुपए से दोगुना करके 40 लाख रुपए कर दी है। जीएसटी कंपोजिशन स्कीम के तहत पात्रता की सीमा एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपए कर दी गई है, जो कि एक अप्रैल 2019-20 से प्रभावी होगी।

 

क्या कहते हैं इकोनॉमिस्ट

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में इकोनॉमी के प्रोफेसर अरुण कुमार ने कहा कि प्रमुख नीतिगत प्रस्तावों के साथ अंतरिम बजट पेश करना अनैतिक होगा, इसके अलावा बजट सत्र में राष्ट्रपति के अभिभाषण का भी मसला है जिसके माध्यम से सरकार अपना नजरिया पेश करती है। उन्होंने कहा, "अगर बजट में लोकलुभावन योजनाओं का प्रस्ताव किया जाएगा तो दूसरी पार्टी के सत्ता में आने पर अगली सरकार के लिए उसे वापस लेना कठिन हो जाएगा।"

 

नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर सकती सरकार

प्रख्यात अर्थशास्त्री अशोक देसाई ने कहा कि कार्यकाल पूरा करने वाली (आउटोगोइंग) सरकार किसी प्रकार का कर प्रस्ताव या नीतिगत बदलाव नहीं कर सकती है। देसाई 1991-93 के दौरान वित्त मंत्रालय के मुख्य सलाहकार थे। देसाई ने कहा, "चुनाव नजदीक होने से सरकार यह कर सकती है कि मौजूदा योजनाओं के खर्च में बढ़ोतरी कर दे, लेकिन नई योजनाओं की घोषणा नहीं की जा सकती है।"
 


 

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