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Interim Budget 2019: किसानों के लिए हो सकते हैं बड़े ऐलान, जेटली ने दिए संकेत 

Interim Budget 2019: बीजेपी (BJP) की अगुआई वाली केंद्र सरकार द्वारा इनकम सपोर्ट स्कीम की पेशकश की अटकलों के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली  (Arun Jaitley) ने कहा कि फूड सरप्लस के चलते खाद्य पदार्थों की कीमतें और किसानों की आमदनी में कमी आई है। इससे नीतिगत संबंधी चुनौतियां पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन हालात से पार पाने के अंतरिम बजट (Interim Budgets) में कई बड़े नीतिगत ऐलान किए जा सकते हैं।

moneybhaskar

Jan 18,2019 11:03:00 AM IST


मुंबई. बीजेपी (BJP) की अगुआई वाली केंद्र सरकार द्वारा इनकम सपोर्ट स्कीम की पेशकश की अटकलों के बीच वित्त मंत्री अरुण जेटली (Arun Jaitley) ने कहा कि फूड सरप्लस के चलते खाद्य पदार्थों की कीमतें और किसानों की आमदनी में कमी आई है। इससे नीतिगत संबंधी चुनौतियां पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा कि इन हालात से पार पाने के अंतरिम बजट (Interim Budgets) में कई बड़े नीतिगत ऐलान किए जा सकते हैं।

सरप्लस फूड बना चुनौती

वित्त मंत्री अरुण जेटली फिलहाल न्यूयॉर्क में उपचार करा रहे हैं और उन्होंने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ये बातें कहीं। जेटली ने कहा, ‘हमारे किसानों ने उत्पादकता बढ़ाई है और हमें सरप्लस फूड के दौर में ले आए हैं। अब सरप्लस फूड का प्रबंधन कई साल से हमारे लिए चुनौती का विषय बना हुआ है। इसलिए कीमतें भी गिर रही हैं।’

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किसानों की घटी कमाई

उन्होंने कहा कि बीते कुछ महीनों के दौरान फूड प्राइसेस में कमी किसानों की आमदनी में कमी का संकेत है। उन्होंने कहा कि मार्केट लोकलुभावन उपायों और हालात को काबू में करने के वास्ते किए जाने वाले कदमों के बीच अंतर कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘आपदा, सूखा, चिंता जैसे हालात को काबू में करने के लिए होने वाले उपायों को लोकलुभावन व्यय के तौर पर नहीं देखा जा सकता है।’

कई चुनौतियां हैं बरकरार

उन्होंने कहा कि सरकार को कई क्षेत्रों में सफलता मिली है, लेकिन कुछ चुनौतियां बरकरार हैं। उन्होंने कहा, ‘कुछ चुनौतियां ऐसी हैं, जिनके लिए हम इंतजार नहीं कर सकते हैं। इसलिए, जाहिर तौर पर उनका हल निकालना जरूरी होगा। पहले भी ऐसा हो चुका है। इसलिए, हम परंपराओं को देखते हुए ही काम करना चाहते हैं।’ हालांकि जेटली ने बजट से पहले सरकार की योजना के बारे में संकेत देने से परहेज किया।

फिस्कल डेफिसिट से बढ़ी चिंता

उन्होंने कहा कि आपात स्थितियों को छोड़ दें तो सरकार राजकोषीय मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रही है। गौरतलब है कि नवंबर तक ही सरकार बजट के अपने 3.3 फीसदी फिस्कल डेफिसिट के लक्ष्य को पार कर चुकी है। इकोनॉमिस्ट्स ने भी चुनाव से पहले सरकार के लोकलुभावन ऐलान करने की आशंकाएं जताई हैं, जिनसे फिस्कल डेफिसिट बढ़ सकता है।

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