Budget 2019ः चुनाव को देखते हुए मिडिल क्लास को साधने की तैयारी, इनकम टैक्स छूट की सीमा 3 लाख तक

Budget 2019: सरकार आगामी 1 फरवरी को अंतरिम बजट में मिडिल क्लास को खुश करने के लिए इनकम टैक्स छूट सीमा में बढ़ोतरी करने जा रही है।

वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक छूट सीमा में कम से कम 50,000 रुपए की बढ़ोतरी होगी।

सरकार मैन्युफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए कस्टम ड्यूटी के स्ट्रक्चर में बदलाव करने जा रही है।

 

Money Bhaskar

Jan 18,2019 05:58:00 PM IST

राजीव कुमार

इस साल अप्रैल-मई में होने वाले केंद्रीय चुनाव में मिडिल क्लास को साधने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सरकार आगामी 1 फरवरी को अंतरिम बजट में मिडिल क्लास को खुश करने के लिए इनकम टैक्स छूट सीमा में बढ़ोतरी करने जा रही है। वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक छूट सीमा में कम से कम 50,000 रुपए की बढ़ोतरी होगी। टैक्स स्लैब के मुताबिक अभी 2.5 लाख सालाना कमाने वाले को इनकम टैक्स नहीं देना पड़ता है। इस सीमा को 3 लाख सालाना किया जा सकता है। वहीं 80 सी के तहत निवेश से टैक्स में मिलने वाले फायदे के दायरे को बढ़ाया जा सकता है। अभी टैक्स में राहत के लिए 80 सी के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपए का निवेश दिखा सकते है। इसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इन्हें लागू करने पर सालाना 5 लाख रुपए तक कमाने वाले को इनकम टैक्स से छूट मिल जाएगी।

नियमों के बदले जाने की है जरूरत

मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि 80 सी के तहत निवेश प्रावधानों को 10 साल से भी अधिक समय से नहीं बदला गया है। इनकम टैक्स में 2.5 लाख की सीमा भी 6-7 साल पुरानी है। टैक्स एक्सपर्ट हिमांशु कुमार ने बताया कि अभी की स्थिति में अगर कोई व्यक्ति 5 लाख रुपए सालाना कमाता है तो वह टैक्स के दायरे में आ जाता है। अगर वह टैक्स की सीमा से काफी हद तक बाहर निकलने के लिए 80सी के तहत अगर निवेश करता है, जैसा कि सरकार की तरफ से प्रावधान किया गया है तो हाथ में उसकी सालाना कमाई 3.5 लाख रुपए रह जाएगी। मतलब हर महीने उसकी कमाई 30 हजार रुपए तक रह जाएगी। ऐसे में 5 लाख रुपए सालाना कमाने वाला व्यक्ति 80सी का फायदा लेने में खुद को सहज महसूस नहीं करता है।

कस्टम ड्यूटी में भी होगा बदलाव

वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सरकार मैन्यूफैक्चरिंग के प्रोत्साहन के लिए कस्टम ड्यूटी के स्ट्रक्चर में बदलाव करने जा रही है। खासकर इंवर्टेड ड्यूटी में बदलाव होगा ताकि कच्चे माल की लागत कम हो सके। अभी कई ऐसी चीजें हैं जिसे आयात करना भारत में बनाने के मुकाबले सस्ता पड़ता है। क्योंकि ऐसी चीजों के निर्माण से जुड़े कच्चे माल या उनके पार्ट के आयात पर शुल्क अधिक है। दूसरी तरफ ऐसी फिनिश्ड चीजों के आयात पर शुल्क कम है। ऐसे में आयातित फिनिश्ड उत्पाद सस्ता पड़ता है। सरकार इसको बदलना चाहती है। अब कई फिनिश्ड चीजों पर आयात शुल्क अधिक होंगे और उन्हें बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पर कम शुल्क होंगे। मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम के आयात से जुड़े शुल्क स्ट्रक्चर में बदलाव होने की पूरी संभावना है। डेलोयाट इंडिया के पार्टनर एम.एस. मनी कहते हैं, इस बजट में विदेश व्यापार को सरल बनाने के लिए कस्टम ड्यूटी की दरों के साथ इसकी प्रक्रिया में बदलाव होने की उम्मीद है। सरकार मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए ऐसा कर सकती है।


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