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वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने की बैंक प्रमुखों से मुलाकात, बजट से पहले हुई अहम मुद्दों पर चर्चा

Election Budget 2019: बजट से तीन दिन पहले हुई इस बैठक को अहम माना जा रहा है

Finance minister Piyush Goyal met heads of PSU banks on Monday

Piyush Goyal met bank heads: वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक की। बजट से ठीक तीन दिन पहले होने वाली इस बैठक में बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा और सरकारी बैंकों के वित्तीय हालत बेहतर बनाने के संबंध में चर्चा की गई। 

नई दिल्ली.

वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ बैठक की। बजट से ठीक तीन दिन पहले होने वाली इस बैठक में बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा और सरकारी बैंकों के वित्तीय हालत बेहतर बनाने के संबंध में चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि चालू वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों ने 1 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड रिकवरी की है। गोयल ने बैंकों से अपील की  कि वे छोटे कारोबारी (MSME) को अधिक से अधिक लोन दें। 

 

 

1.25 लाख MSME को सैद्धांतिक मंजूरी

 

गोयल ने बैंक अधिकारियों से कहा कि प्रधानमंत्री ने MSME सेक्टर को 59 मिनट में लोन देने के लिए एक पोर्टल की शुरुआत की थी। इस पोर्टल के माध्यम से अब तक 1.25 लाख कारोबारियों को लोन के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जा चुकी है। बैंकों को इस दिशा में तेजी से काम करना चाहिए।  

 

RBI गवर्नर ने भी की थी बैठक 

इस बैठक से पहले आरबीआई के नवनियुक्त गवर्नर शक्तिकांत दास ने सोमवार दोपहर में बैंक प्रमुखों के साथ बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने बैंकों के समक्ष आरबीआई की उम्मीदें जाहिर की थीं। मौद्रिक नीति समिति की सात फरवरी को बैठक होगी। गवर्नर दास के लिए समिति की यह पहली बैठक होगी। वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली के अमेरिका में इलाज कराने के चलते पीयूष गोयल को बुधवार को वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था। लिहाजा यह बैठक पीयूष गोयल के लिए भी काफी अहम है। बैठक में बैंकों की फंसे कर्ज की स्थिति और अन्य कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

 

इन मुद्दों पर हुई बात

इस बैठक में सरकार की कई जन कल्याण योजनाओं के अनुपालन की समीक्षा की गई। छोटे एवं मझोले उद्योग (MSME), कृषि और खुदरा क्षेत्र को ऋण बांटने की स्थिति का भी जायजा लिया गया। इसके अलावा बैंकों के दिसंबर 2018 तक नौ माह के प्रदर्शन की भी समीक्षा हुई।

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