Union Budget 2019 /14 शब्दों के इर्द-गिर्द सिमटा रहता है बजट, जानिए क्‍या है इनका मतलब

  • नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश करेगी

Moneybhaskar.com

Jul 05,2019 09:09:17 AM IST


नई दिल्‍ली. Union Budget 2019: नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली सरकार अपने दूसरे कार्यकाल का पहला बजट 5 जुलाई को पेश करेगी। आम तौर पर संसद में बजट पेश करने के दौरान वित्‍त मंत्री कुछ खास शब्‍दों का इस्‍तेमाल करते हैं। इकोनॉमी और बिजनेस से जुड़े होने के चलते इन शब्‍दों के बारे में आम लोग कम ही जानते हैं। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) इस बार आम बजट पेश करेंगी तो भी इन्हीं शब्‍दों यूज करेंगे। आइए जानते हैं बजट से जुड़े शब्‍दों और उनके मतलब क्‍या है...

फाइनेंशियल ईयर के लिए पेश होता है लेखा-जोखा

केंद्रीय बजट पूरे देश के लिए होता है। इसमें सरकार आने वाले नए फाइनेंशियल ईयर का लेखा जोखा पेश करती है। सरकार संसद को बताती है कि आने वाले एक साल में वह किस काम के लिए कितना पैस खर्च करेगी। साथ ही वह यह भी बताती है कि एक साल की अवधि के दौरान कहां-कहां से आय होगी। जीएसटी लागू होने के बाद यह पहला बजट है। इसलिए कुछ शब्‍द इस बार नहीं यूज होंगे।

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1. आम बजट (Union Budget)

सरकार जब पूरे साल के लिए बजट पेश करती है तो उसे आम बजट (Union Budget) कहा जाता है।
वहीं अगर यह बजट कुछ समय के लिए हो, तो उसे अंतरिम बजट (Interim Budget) कहा जाता है। चुनाव वाले सालों में अक्‍सर सरकार अंतरिम बजट पेश करती है। चुनाव बाद आई नई सरकार बचे हुए साल का बजट पेश करती है।

2. सेंट्रल प्लान आउटले (Central plan outlay)

यह बजटीय योजना का वह हिस्सा होता है, जिसके तहत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और इकोनॉमी के विभिन्न सेक्‍टरों के लिए संसाधनों का बंटवारा किया जाता है।

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3. डायरेक्ट टैक्स (Direct tax)

डायरेक्ट टैक्स वह टैक्स होता है, जो आज जनता और कंपनियों की इनकम पर लगाया जाता है। चाहे वह इनकम किसी भी स्रोत से हुई हो, जैसे-इन्वेस्‍टमेंट, सैलरी, ब्याज आदि। इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स आदि डायरेक्ट टैक्स के तहत आते हैं।

4. इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect tax)

कस्‍टमर्स द्वारा कोई वस्‍तु खरीदने और सेवाओं का इस्तेमाल करने के दौरान लगाया जाने वाला टैक्स इनडायरेक्ट टैक्स कहलाता है। पहले कस्टम्स ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी और वैट इसका प्रमुख हिस्‍सा थे, लेकिन अब इनकी जगह जीएसटी ले चुका है। हालांकि कस्‍टम ड्यूटी बनी रहेगी।

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5. कस्टम्स ड्यूटी (Custom Duty)

कस्टम्स ड्यूटी वह चार्ज होता है, जो कि देश में इम्‍पोर्ट होने वाले सामानों पर लगाया जाता है।

6. कर राजस्व (Tax revenue)

सरकार टैक्स लगा कर जो पैसे हासिल करती है, उसे टैक्स रेवेन्यू कहा जाता है। आम तौर पर सरकार विभिन्न प्रकार के टैक्स लगाती है, ताकि योजनागत और गैर-योजनागत व्यय के लिए धन (पैसा) एकत्र कर सके। आम तौर पर सरकार की इनकम का प्राथमिक व प्रमुख स्रोत टैक्‍स ही होता है। आगे भी पढ़ें...

 

7. गैर कर राजस्व  (Non tax revenue)

नॉन टैक्स रेवेन्यू वह राशि है, जो सरकार टैक्स के अतिरिक्त अन्य साधनों से एकत्र करती है। इसमें सरकारी कंपनियों के डिसइनवेस्‍टमेंट से मिली राशि, सरकारी कंपनियों से मिले हुए लाभांश और सरकार द्वारा चलाई जाने वाली विभिन्न इकोनॉमिक सर्विसेज के बदले में मिली राशि शामिल होती है।

8. चालू खाते का घाटा (Current account deficit)

चालू खाते का घाटा यानी करंट अकाउंट डे‍फिसिट देश में फॉरेन करंसी की टोटल इन्वेस्‍टमेंट और निकासी का अंतर बताता है। फॉरेन करंसी में इन्वेस्‍टमेंट, एक्‍सपोर्ट, कैपिटल मार्केट में इन्वेस्‍टमेंट, डायरेक्‍ट फॉरेन इन्वेस्‍टमेंट और विदेश में रह रहे लोगों द्वारा स्‍वदेश भेजे गए पैसे यानी रेमिटेंस के जरिए होती है। जब फॉरेन करंसी की निकासी आवक से ज्‍यादा होती है, तो घाटा होता है।

9. राजस्व घाटा (Revenue Deficit)

राजस्व घाटे का मतलब सरकार की अनुमानित राजस्व प्राप्ति और एक्‍सपेंडिचर में अंतर होता है। आम तौर पर किसी वित्त वर्ष के लिए सरकार राजस्व प्राप्ति और अपने खर्च का एक अनुमान लगाती है। लेकिन, जब उसका व्यय उसके अनुमान से बढ़ जाता है, तो इसे राजस्व घाटा कहा जाता है।

10. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)

वित्तीय घाटा बताता है कि किसी वित्त वर्ष के दौरान सरकार की कुल आमदनी (उधार को छोड़कर) और कुल खर्च का अंतर कितना है। वित्तीय घाटे के बढ़ने का मतलब होता है कि सरकार की उधारी बढ़ेगी। यहां ये समझना जरूरी है कि अगर उधारी बढ़ेगी, तो ब्याज की अदायगी भी बढ़ेगी। ब्याज का बोझ बढ़ने से सरकार के राजस्व घाटे पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

 

 

11. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit)

देश के वित्तीय घाटे और ब्याज की अदायगी के अंतर को प्राथमिक घाटा कहते हैं। प्राथमिक घाटे के आंकड़े से इस बात का पता चलता है कि किसी भी सरकार के लिए ब्याज अदायगी कितनी बड़ी या छोटी समस्या है।

12. अनुदान मांगें (Demand for Grants)

बजट में शामिल सरकार के खर्चों के अनुमान को लोकसभा अनुदान की मांग के रूप में पास  करती है। हर मंत्रालय की अनुदान की मांगों को सरकार सिलसिलेवार तरीके से लोकसभा से पास कराती है।

13. लेखानुदान मांगें (vote on account)

बजट को संसद में पारित कराने में लंबा समय लगता है। ऐसे में सरकार 1 अप्रैल से पहले पूरा बजट पारित नहीं करा पाती। इस स्थिति में अगले वित्त वर्ष के शुरुआती दिनों के खर्च के लिए सरकार संसद की मंजूरी लेती है। इन्‍हीं मांगों को लेखानुदान मांगें कहते हैं।

14. सब्सिडी (Subsidies)

किसी सरकार द्वारा व्यक्तियों या समूहों को नकदी या कर से छूट के रूप में दिया जाने वाला लाभ सब्सिडी कहलाता है। भारत जैसे कल्याणकारी राज्य (वेलफेयर स्टेट) में इसका इस्तेमाल लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। केंद्र सरकार ने आजादी के बाद से अब तक विभिन्न रूपों में लोगों को सब्सिडी दे रही है, चाहे रसोई गैस सब्सिडी हो या फूड सब्सिडी। लेकिन, सरकार अब धीरे-धीरे सब्सिडी को खत्‍म करने की ओर कदम बढ़ा रही है। 

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