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कारोबार /पतंजलि को भी कर्ज की जरूरत पड़ी, सरकारी बैंकों से लगाई गुहार

money bhaskar

Jun 01,2019 02:20:05 PM IST

नई द‍िल्‍ली,रुची सोया (Ruchi Soya) को खरीदने के लिए बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी ने सरकारी बैंकों से कर्ज देने की गुहार लगाई है। पतंजलि (Patanjali) और रुची सोया के बीच यह सौदा 4,350 करोड़ रुपये में हो रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी पांच साल के लिए कर्ज लेना चाहती है और उसने एसबीआई (SBI), पीएनबी (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of baroda), यूनियन बैंक (Union Bank) और जेऐंडके बैंक से संपर्क साधा है। कंपनी 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बैंकों से लेना चाहती है और 600 करोड़ रुपये का इंतजाम वह अपने स्तर पर करेगी

ब्याज दर पर अटकी है बातचीत


हालांक‍ि सूत्रों का कहना हैं कि बैंकों से फंड के लिए बातचीत आखिरी दौर में है और जल्द ही ब्याज दर भी फाइनल हो जाएगी। पतंजलि ने पहले कर्ज के लिए नॉन-बैंकिंग चैनल से संपर्क किया था, लेकिन निवेशकों के अधिक डिस्क्लोजर की मांग करने पर वह पीछे हट गई। इस खबर के बारे में पूछे गए सवालों के पतंजलि, एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक और जेऐंडके बैंक ने जवाब नहीं दिए।

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दिवालिया हो चुकी है रुचि सोया

बता दें कि पतंजलि ने इनसॉल्वेंसी ऑक्शन में रुचि सोया को खरीदा है, जिस पर 9,300 करोड़ से अधिक का कर्ज है। इसमें से 1,800 करोड़ रुपये का सबसे अधिक एसबीआई का है। इसके बाद सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का एक्सपोजर 816 करोड़ और पीएनबी का 743 करोड़ रुपये है। बता दें कि वैसे पिछले साल अगस्त में रुचि सोया के लिए सबसे ऊंची बोली अडानी विल्मर ने लगाई थी। तब पतंजलि के साथ उसका कड़ा मुकाबला हुआ था। हालांकि, दिसंबर 2018 में अडानी विल्मर ने रुचि सोया के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल को लेटर लिखकर कहा था कि इनसॉल्वेंसी प्रोसेस में देरी के चलते कंपनी की संपत्ति प्रभावित हो रही है।

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200 करोड़ रुपए ज्यादा में खरीद रही है पतंजलि


पतंजलि को अपनी ग्रोथ तेज बनाए रखने में मदद अडानी विल्मर (Adani Wilmer) के बाहर निकलने के बाद रुचि सोया को खरीदने की रेस में सिर्फ पतंजलि बच गई थी। उसने अप्रैल में बोली 200 करोड़ रुपये बढ़ाकर 4,350 करोड़ रुपये कर दी थी। रुचि सोया को खरीदने के बाद पतंजलि सोयाबीन ऑइल और दूसरे प्रॉडक्ट्स की बड़ी सप्लायर बन जाएगी। माना जा रहा है कि इस डील से पतंजलि को अपनी ग्रोथ तेज बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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