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पिता ने Pak में खोली थी छोटी सी दुकान, बेटे ने बना दिया 15 सौ करोड़ का बिजनेस

निधन की खबर झूठी, परिवार ने वीडियो जारी कर अफवाहों का किया खंडन

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नई दिल्‍ली।  कहानी थोड़ी फिल्‍मी है। करीब 98 साल पहले 1919 में भारत के बंटवारे से पहले पाकिस्‍तान के सियालकोट शहर में चुन्नी लाल नाम के एक शख्‍स ने परिवार के पेट पालने के लिए मसालों की एक छोटी सी दुकान खोली। चुन्‍नीलाल को तब शायद उम्‍मीद भी नहीं रही होगी कि एक दिन उनका बेटा इस छोटी से दुकान को 1500 करोड़ रुपए के कारोबार में बदल देगा, लेकिन यह सच है। हालांकि बेटे को यह सफलता किसी जैकपॉट या लॉटरी की तरह नहीं मिली। उसने दिन-रात मेहनत की। देश के बंटवारे का दर्द भी सहा, लेकिन खड़ा हुआ तो उसके कदमों में सारा जमाना था।

 

उम्र 95 साल लेकिन अब भी कर काम जारी...

- रोचक बात यह है कि बेटा अब 95 साल का हो चुका है।

- इस उम्र में लोगों के हाथ-पांव काम करना बंद कर देते हैं।

- हांलाकि भारत के एक ऐसे सीईओ हैं, जो इस उम्र में भी कंपनी चला रहा है।

- कंपनियां अपने ब्रांड के प्रमोशन के लिए पोस्‍टर ब्‍वाय ढूंढती हैं, लेकिन वह कंपनी के प्रमोशन और एडवर्टिजमेंट में खुद ही दिखाई देते हैं।

- उनकी कहानी जीरो से हीरो बनने वाले आम भारतीय की कहानी है।

- उन्‍हें पिछले साल कंपनी की ओर से 21 करोड़ रुपए की सैलरी मिली। ये हैं एमडीएच के सीईओ धर्मपाल गुलाटी

- उन्हें महाशय के नाम से भी जाना जाता है। 

 

आगे पढें, ऐसे बनाया अपना अलग मुकाम 

ऐसे खड़ा किया अपना साम्राज्य

बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली आ बसा। यहां आकर धर्मपाल गुलाटी ने तांगा चलाना शुरू किया। वे कनॉट प्लेस से करोल बाग तक सवारियां ले जाते थे। हालांकि इस काम में उनकी बहुत ज्यादा कमाई नहीं होती थी। लिहाजा उन्होंने तांगा बेचकर 1953 में चांदनी चौक में एक दुकान किराए पर ली और उसी फिर से मसालों की तरफ लौट अाए। गुलाटी ने जो दुकान खोली उका नाम महाशियां दी हट्टी रखा, जो उनके एमडीएच ब्रांड का पूरा नाम है। इसी नाम से उनके पिता ने पाकिस्‍तान के सियालको में 1919 में दुकान खोली थी।

 

छू रहे बुलंदियां

1959 में उन्होंने दिल्ली के कीर्ति नगर में जमीन लेकर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट डाली और आधिकारिक रूप से कंपनी का गठन किया। इसके बाद करोल बाग में भी एक यूनिट शुरू की। आज एमडीएच मसाले सारी दुनिया में खरीदे जाते हैं। 2017 में गुलाटी देश के सर्वाधिक आय वाले एफएमसीजी सीईओ रहे। उन्हें सैलरी के रूप में 21 करोड़ रुपए मिले। फिलहाल धर्मपाल गुलाटी के पास कंपनी के 80 फीसदी शेयर हैं और कंपनी की हर गतिविधी पर उनकी नजर रहती है। धर्मपाल 90 फीसदी सैलरी धार्मिक कामों में खर्च करते हैं।

 

असली मसाले सच-सच...

एमडीएच मसालों के सबसे बड़े ब्रांड्स में से एक है और तकरीबन 150 अलग पैकेजिंग में 62 किस्म के मसाले बनाता है। 2016 में कंपनी का रिवेन्यू 924 करोड़ रुपए रहा था।

 

आगे पढ़ें, समाजसेवा में भी आगे 

जरूरतमंदों की मदद को भी रहते हैं आगे

एमडीएच कंपनी 20 से अधिक स्कूल चलाती है। 1975 में महाशय ने सुभाष नगर के आर्य समाज में नेत्र अस्पताल खोला। जनवरी, 1984 में जनकपुरी में 20 बेड वाला अस्पताल शुरू किया। अब यह अस्पताल 300 एकड़ में फैला है और इसमें 300 बेड हैं। यहां MRI, CT scan, हार्ट विंग, न्यूरो साइंस और आईवीएफ की सुविधा मौजूद है।

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