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Home » Business » TradeSuccess Story of Satyajit and Ajinkya Hange: Brother duo earning 30 lakh rupees monthly

बैंक की नौकरी छोड़ दो भाइयों ने शुरू की खेती, महीने के कमाते हैं 30 लाख रुपए

उनके प्रोडक्ट्स के खरीदारों में बॉलीवुड सेलिब्रिटीज से लेकर कई नामी-गिरामी बिजनेसमैन शामिल हैं।

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प्रतिभा सिंह 

जहां लोग खेती छोड़कर नौकरी की तरफ भागते हैं, वहीं पुणे के इन दो भाइयों ने सेटल्ड करियर को छोड़कर खेती को अपना व्यवसाय बना लिया। बैंक की अच्छी खासी नौकरियां और शहरी ज़िन्दगी छोड़कर दोनों ने छह साल में खेती को मुनाफे का सौदा बना दिया। पहले चार साल घाटा झेलने के बाद अब वे महीने के 30 लाख रुपए कमाते हैं। इन दो भाइयों- सत्यजीत (37 वर्ष) और अजिंक्य हांगे (33 वर्ष) ने मनी भास्कर से बातचीत की और बताया कि कैसे दो एकड़ जमीन पर खेती से शुरुआत करके उन्होंने अपने शौक को कमाई का जरिया बनाया।

 

अपने खेतों में शौकिया तौर पर शुरू की खेती

अजिंक्य ने बताया कि उन्होंने व उनके भाई ने किंडरगार्टन से लेकर एमबीए तक की पढ़ाई पुणे में की। इसके बाद दोनों की बैंकों में नौकरी लग गई। जब सत्यजीत Citi Bank और अजिंक्य HSBC Bank में काम कर रहे थे तो नौकरी के दौरान दोनों गांव में अपने खाली पड़े खेतों को देखने गए। वे बस ये देखना चाहते थे कि उनके पारिवारिक खेत कहा हैं और कितने बड़े हैं। खेत देखकर उन्हें समझ आया कि उन्हें खाली छोड़ना समझदारी नहीं होगी, क्योंकि कोई भी उनपर अतिक्रमण कर सकता है। ऐसे में उन्होंने खेतों में गन्ना और अन्य फलों की खेती शुरू की। यह बस शौकिया तौर पर थी, लेकिन दोनों को इसमें मजा आने लगा। मिट्‌टी, खाद, बीज और खेती के अन्य पहलुओं के बारे में जैसे-जैसे वे जानकारी जुटाते गए, उनकी खेती-बाड़ी में रुचि बढ़ती गई। एक वक्त ऐसा आ गया जब वे सिर्फ खेती के बारे में सोचने लगे।

 

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खेती के लिए छोड़ दी नौकरी

बैंकों में नौकरी करते हुए दोनों भाई 15 दिनों में दो दिन अपने गांव जाते थे और ऑर्गेनिक खेती करते थे। दो-तीन साल तक वीकेंड पर खेती करने के बाद उन्हाेंने 2011-12 में अपनी-अपनी नौकरियों को छोड़ दिया। वे शहर छोड़कर अपने गांव जा बसे और पूरी तरह खेती में जुट गए। तब उनका उद्देश्य सिर्फ खेती करना थाक्योंकि उन्हें इसमें खुशी मिलती थी। उन्होंने तब तक इसे इतने बड़े व्यापार में तब्दील करने के बारे में नहीं सोचा था। हालांकि उनके पिता उनके इस फैसले के खिलाफ थेक्योंकि उन्हें लगता था कि पढ़ाई-लिखाई के बाद खेती करना बेवकूफी होगी। कई लोगों ने उनका मनोबल गिराने की भी कोशिश की। इसके बावजूद दोनों भाइयों ने 15 लाख रुपए लगाकर अपने खेतों में दो एकड़ जमीन पर अलग-अलग तरह की फसलें उगानी शुरू कीं और उन्हें लाेकल मंडी में बेचने लगे।

 

पहले चार साल हुआ सिर्फ घाटा

लगातार चार साल तक सारी फसलें पुणे और मुंबई की मंडियों को बेचने के बाद उन्हें समझ आया कि ऐसे वे कुछ कमाई नहीं कर पाएंगे। अजिंक्य ने बताया कि पहले साल तो सिर्फ दो लाख कमा पाएदूसरेतीसरे और चौथे साल वे घाटे में रहे। लेकिन उनके पास कोई प्लान बी नहीं थाऐसे में उन्होंने खेती में ही और मेहनत करने की ठानी।

 

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ऐसे जुड़े ग्राहकों से

अजिंक्य ने बताया कि वे अपने फार्म पर जो पपीता उगाते थेवह बहुत मीठा था। उसकी मिठास गुड़ की मिठास जैसी थीक्योंकि उसमें खाद के तौर पर देशी गाय का गोबर और गोमूत्र डाला जाता था। जब वे मंडी में इस पपीते को बेचने गए तो उन्हें एक टन पपीते के लिए 4000 रुपए मिल रहे थे। इतने में उनका माल-ढुलाई का खर्च भी नहीं निकल रहा था। ऐसे में उन्होंने तय किया कि वे अपने पपीते मंडी में नहीं बचेंगेबल्कि उन्होंने वापस लौटते हुए रास्ते में मिलने वाले 10-15 फल विक्रेताओं को 1000 kg पपीते सैंपल के तौर पर दे दिए। उन्होंने विक्रेताओं से कहा कि अगर उनके पपीतों के बारे में कोई पूछता है तो वे उन दोनों से संपर्क करें। इसके बाद अगले छह महीने तक उन दोनों को उन फल विक्रेताओं से ऑर्डर मिलते रहे। मंडी में जहां उनके पपीतों को 4-5 रुपए प्रति किलो का भाव मिल रहा थावहीं सीधे इन विक्रेताओं को बेचने पर उन्हें एक किलाे पपीते के लिए 15 रुपए मिलते थे। हालांकि इनमें से कई लोगों ने उनके पैसे नहीं दिए।

 

आगे पढ़ेंऐसे जुड़े बड़ी कंपनियों से

 

 

बड़ी कंपनियों से जुड़े

यहीं से Star Bazaar चेन ने उनसे संपर्क किया। स्टार बाजार के मैनेजर ने उनके पपीते खाए थे और उन्हें वे बेहद पसंद आए। मैनेजर ने उनसे कहा कि वे अपने पपीते स्टार बाजार में रखना शुरू करें। ऐसे में उन्होंने अपने पपीतेड्रमस्टिक्स और भी अन्य उत्पादों को मॉल में बेचना शुरू किया। इसके बाद रिलायंस फ्रेश (Reliance Fresh), नेचर्स बास्केट (Nature’s Basket) ने भी उनके उत्पादों को बेचना शुरू किया। दो साल उन्होंने इस प्लेटफॉर्म पर अपने फलदालें व अन्य उत्पाद बेचे।

 

अब महीने में कमाते हैं 30 लाख

अजिंक्य ने बताया कि वे पूरी तरह से देशी बीजों से ऑर्गेनिक खेती करते हैं। उनके फलोंदालों और अन्य सभी फसलों की खेती में ज्यादा समय लगता है और देशी गाय की खाद डाली जाती हैऐसे में वे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे रहते हैं। लेकिन मॉल मैनेजर ग्राहकों को यह सब बातें नहीं बता पा रहे थेकि यह फल बाकी फलों से अलग क्यों हैंऑर्गेनिक फल महंगे क्यों हैं। ऐसे में उन्होंने सोचा कि उनके उत्पादों के साथ न्याय नहीं हो रहा है। लिहाजा मॉल्स में दो साल अपने उत्पाद बेचने के बाद दोनों ने कस्टमर्स से डायरेक्टली डील करने के बारे में सोचा। ऐसे में उन्होंने मुंबई के बांद्रा के बाजार में सड़क पर खड़े होकर लोगों को अपने उत्पादों के बारे में बताना शुरू किया। इस तरह उन्होंने अपना कस्टमर बेस तैयार किया और पिछले दो साल से वे डायरेक्टली अपने उत्पाद बेच रहे हैं। दो एकड़ में खेती से शुरुआत कर अब वे 20 एकड़ में खेती करते हैं और शुरुआती चार साल में घाटा उठाने के बाद महीने के 30 लाख रुपए कमाते हैं। 

 

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फार्म पर पालते हैं देशी गाय भी

अजिंक्य के मुताबिक खेती में आप दरअसल मिट्‌टी के उपजाऊपन से फायदा उठाते हैं। जब उन्होंने मिट्‌टी को और अधिक उपजाऊ बनाने के बारे में जानकारी जुटाई तो उन्हें पता चला कि देशी गाय का गोबर और मूत्र इसके लिए सबसे अच्छा होता है। ऐसे में उन्होंने शुरुआत में चार गिर गाय खरीदीं और उनके गोबर को खाद के तौर पर इस्तेमाल किया। आज उनके फार्म में 60 गिर गाय हैंजिनका गोबर और गोमूत्र पूरे खेत में खाद के तौर पर डाला जाता है। सत्यजीत और अजिंक्य अपने खेतों में पपीताअनारतूर दालमूंग दालउड़द दालड्रमस्टिकगन्नाकेला उगाते हैं। गाय का चारा भी उनके खेत में ही उगाया जाता है।

 

कई देशों में करते है एक्सपोर्ट

उनका फार्म प्रोड्यूस अमेरिकाकनाडा समेत 14-15 देशों में उनके उत्पाद निर्यात होते हैं। वे ऑनलाइन व ऑफलाइन दोनों तरीकों से उपने उत्पाद बेचते हैं। ऑनलाइन में वे Flipkart, Amazon पर तो अपने प्रोडक्ट्स बेचते ही हैंसाथ ही उनकी खुद का भी Two Brothers Organic Farm नाम से ऑनलाइन स्टोर है। ऑफलाइन में वे ऐसे रिटेलर्स को उत्पाद सप्लाई करते हैं जो सिर्फ ऑर्गेनिक उत्पाद बेचते हैं। उनके खरीदारों की सूची में कई बालीवुड हस्तियां और देश के कई अमीर बिजनेसमैन शामिल हैं। 

 

दो हजार किसानों को दे चुके हैं प्रशिक्षण

उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार के कृषि विभाग का ऑर्गेनिक फार्मिंग विंग उनके पास कई किसानों को प्रशिक्षण लेने के लिए भेजता है। अब तक वे दो हजार किसानों के साथ अपने ऑर्गेनिक फार्मिंग के अनुभव बांट चुके हैं। इसमें खेती की पद्धतियों से लेकर मार्केटिंग के तरीकों के बारे में भी बताते हैं।

 
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