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नौ साल पहले 450 रुपए में बेचा था पहला प्रोडक्ट, अब करती है 200 करोड़ का कारोबार

शीतल कपूर की हाउसवाइफ से सफल कारोबारी बनने की कहानी

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नई दिल्ली। कहते हैं कि अगर कुछ करने की ठान ली जाए तो इंसान को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। इसकी जीती जागती मिसाल हैं दिल्ली की शीतल कपूर। 2009 में शुरू हुआ इनका ब्रांड श्री आज देश का नामी क्लाेदिंग ब्रांड बन चुका है। इस ब्रांड के तहत कुर्ते व अन्य प्रोडक्ट लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं। ऑनलाइन से शुरुआत करने के बाद देशभर में उनके ब्रांड के 45 स्टोर खुल चुके हैं। एक वो दिन था जब ऑनलाइन उनकी पहली कुर्ती एक विदेशी ग्राहक ने 450 रुपए में खरीदी थी और एक आज का दिन है जब उनकी कंपनी की ग्रॉस मर्चेन्डाइज वैल्यू 200 करोड़ रुपए हो गई है। यह कंपनी वे अपने पति संदीप कपूर के साथ मिलकर चलती हैं।

 

41 की उम्र में शुरू किया काम

 

पंजाब के अमृतसर में पली बढ़ी शीतल ने होम साइंस में बीएससी की पढ़ाई की और 21 की उम्र में शादी करके दिल्ली आ गईं। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह खुद को परिवार की सेवा में लगा दिया। सभी घरवालों का खयाल रखना, बच्चों की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान देना, किटी पार्टीज में जाना और दोस्तों-रिश्तेदारों से मिलना, यही उनकी जिंदगी थी। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते गए उन्हें लगने लगा कि उन्हें कुछ करना चाहिए। उनके मन में कुछ क्रिएट करने का विचार आने लगा। जब उनके बच्चे पढ़ाई के लिए शहर से बाहर चले गए तो उनके पास बहुत सा खाली समय बचने लगा। 41 की उम्र में उन्होंने अपने पति के ऑफिस जाना शुरू किया। उनके पति की कंपनी अन्य ब्रांड्स के लिए कपड़े बनाती थी। यहीं से उन्हें अपना ब्रांड शुरू करने का खयाल आया। उनके इस सफर में उनके पूरे परिवार ने साथ दिया और हौसला बढ़ाया।

 

आगे पढ़ें- इस सोच से आईं बिजनेस के क्षेत्र में 

कम दाम में बेहतर प्रोडक्ट बनाने की सोच

 

शीतल कपूर ने मनी भास्कर को बताया कि वे हमेशा सोचती थीं कि कपड़े ऐसे होने चाहिए जो आसानी से बजट में फिट भी हो जाएं, उनकी क्वालिटी भी बढ़िया हो और उन्हें ड्राई-क्लीन न कराना पड़े। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने लेबल के तहत ऑनलाइन कुर्तियां बेचने की शुरुआत की। शुरुआत में उनके ब्रांड को बहुत ज्यादा रिस्पॉन्स नहीं मिला। उस समय ऑनलाइन शॉपिंग का क्रेज देश में शुरू ही हुआ था और लोग बड़े ब्रांड्स के कपड़े खरीदना पसंद करते थे। धीरे-धीरे उनके प्रोडक्ट्स की बेहतर क्वालिटी और बजट फ्रेंडली दामों ने लोगों के बीच अपनी जगह बनाई। अब श्री ब्रांड खुद बड़े ब्रांड्स में शामिल हो चुका है।

 

सीखती गईं, जीतती गईं

 

उन्होंने बताया कि उनकी पढ़ाई के समय कंप्यूटर का बहुत चलन नहीं था। लिहाजा उन्हें कंप्यूटर की बहुत ज्यादा समझ नहीं थी। लेकिन उनका बिजनेस मॉडल ऐसा था जिसमें कंप्यूटर की नॉलेज होना बहुत जरूरी था। ऐसे में उन्होंने कंप्यूटर सीखा और खुद काे इस बिजनेस के लिए तैयार किया। जब उनके ब्रांड की पहली कुर्ती की बिक्री हुई तो उन्हें सबसे ज्यादा खुशी इसी बात की हुई कि उन्होंने ऑनलाइन बिजनेस किया। 

 

आगे पढ़ें- अब भी ऑफिस में 8-10 घंटे करती हैं काम

 

अब भी ऑफिस में 8-10 घंटे करती हैं काम

 

शीतल कपूर ने बताया कि अब वे भी ऑफिस में आठ से दस घंटे बैठकर काम करती हैं। हालांकि इसके बाद भी ब्रांड से जुड़ा कोई न कोई काम आ ही जाता है और वह उसे समय देती हैं। इन नौ सालों में उनकी जिंदगी बहुत बदल गई है। पहले उनकी जिंदगी किचन के चारों तरफ घूमती थी और अब कई दिन ऐसा होता है जब उनके पास खाना खाने का भी समय नहीं होता है। उनके लगभग सभी रिश्तेदार श्री ब्रांड के फ्रैंचाइजी ओनर हैं।

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