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त्योहार में कंट्रोल में रखना चाहते है खर्च, फॉलो करें ये 5 टिप्स

संपत्ति खरीदें सामान नहीं

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नई दिल्ली. अक्टूबर और नवंबर के फेस्टिवल सीजन में आमतौर पर खर्च का बढ़ जाना वाजिब है, क्योंकि इस दौरान नवरात्र, दशहरा, करवाचौथ और दिवाली जैसे त्योहार होते हैं। इस दौरान नवरात्र और दिवाली में खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इसलिए ई-कॉमर्स कंपनियों की ओर से सेल चलाई जाती हैं। वहीं ऑफलाइन खरीदारी में भी छूट दी जाती है। ऐसे में दिवाली में घर की साफ-सफाई, गिफ्ट, कपड़े, पटाखे और लाइटिंग पर अतिरिक्त खर्च हो जाता है। हालांकि कुछ टिप्स फॉलो करके इन खर्चों को कंट्रोल में रखा जा सकता है। इस मामले में मनी भास्कर ने वेल्थ एडवाइजर चितरंजन से बातचीत की। 

 

संपत्ति खरीदें, सामान नहीं
फेस्टिवल सीजन में खरीदारी करते वक्त ध्यान देना चाहिए कि आखिर आप खरीदारी में संपत्ति (मकान, सोना, चांदी आदि) खरीद रहे हैं या फिर सामान। क्योंकि संपत्ति आपका निवेश होता है,  जरूरत पड़ने पर इसकी बिक्री की जा सकती है। समय के साथ सामान की कीमत कम होती है, जबकि संपत्ति की कीमत बढ़ती है।

 

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भविष्य की कमाई से न करें खर्च
अकसर लोग क्रेडिट कार्ड से खरीददारी इस भरोसे कर लेते हैं, कि बोनस मिलेगा, उससे क्रेडिट कार्ड का बिल चुका देंगे। लेकिन बोनस मिलेगा या फिर कितना मिलेगा पता नहीं होता है। ऐसे में बजट बिगड़ जाता है। वहीं बोनस और अन्य मोड से भविष्य की कमाई पर खरीददारी करतें, और घाटा उठा लेते हैं, क्योंकि क्रेडिट कार्ड  पर लोन रीपेमेंट अधिक होता है।

 

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सेल नहीं जरूरत के हिसाब से करें खरीददारी
फेस्टिवल सीजन में कई ई-कॉमर्स कंपनियां सेल शुरु करती है। इसमें सस्ते दामों पर चीजों की बिक्री का दावा किया जाता है। इसके चक्कर में कई बार बिना जरूरत की वस्तुएं खरीद ली जाती है, जिनका भविष्य में कोई यूज नहीं होता है। इसलिए केवल इसलिए खरीददारी न करें, कि सेल लगी है। हमेशा अपनी जरुरत के हिसाब से खरीददारी करें। 

 

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छोटी-छोटी करें बचत
हमेशा छोटी-छोटी बचत करना चाहिए। हो सके तो किसी की सलाह से एसआईपी में निवेश के बारे में सोंचे। न हो तो फंड मैनेजर की मदद लें। इसके अलावा निवेश के अन्य माध्यम फिक्स डिपॉजिट आदि है। यहां भी निवेश किया जा सकता है। क्योंकि आज आपकी की गई छोटी बचट कल को बड़ा फायदा देगी। 

 

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क्रेडिट और डेबिट कार्ड से न करें खरीददारी
चितरंजन के मुताबिक क्रेडिट, डेबिट या फिर नेटबैंकिंग जैसे डिजिटल मोड के मुकाबले कैश से खरीददारी करनी चाहिए, क्योंकि मनोवैज्ञानिक तौर पर कैश खर्च होने पर लोगों को एहसास होता कि उनके पैसे खर्च हो रहे हैं, जबकि क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड यूज करने में ऐसा नहीं होता है। 

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