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प्रधानमंत्री मोदी ने बनारस में रचा इतिहास, देश को दी नई सौगात

आजादी के बाद पहली बार अंतर्देशीय जलपोत पर कंटेनर की ढुलाई

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नई दिल्ली।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वाराणसी में गंगा नदी पर बने देश के पहले मल्टी-मोडल टर्मिनल पोर्ट का उद्घाटन किया। यह पोर्ट 207 करोड़ रुपए में बनकर तैयार हुआ है। देश के अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन सेक्टर को गति प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री ने एक कंटेनर को भी रिसीव किया जो कोलकाता से आया था। यह देश के इतिहास में पहली बार था जब अंतर्देशीय जलमार्ग से माल की ढुलाई हुई।

 

भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के जल मार्ग विकास प्राजेक्ट के अंतर्गत गंगा नदी पर बने राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर चार मल्टी मोडल पोर्ट बनाए जाने की योजना है। यह पोर्ट इस परियोजना का पहला पोर्ट है। तीन अन्य पोर्ट साहिबगंज, हल्दिया और गाजीपुर में निर्माणाधीन हैं।

 

अन्य परियोजनाओं का भी किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री मोदी ने रामनगर में 913.07 करोड़ रुपए के सीवेज मैनेजमेंट प्राजेक्ट की नींव रखी। वाराणसी रिंग रोड के पहले फेज के तहत बाबतपुर से वाराणसी तक फोर-लेन रोड का उद्घाटन किया। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने गंगा पदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए कई परियोजनाओं की नींव रखी। प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटित की जाने वाली इन सभी परियोजनाओं की लागत 2400 करोड़ रुपए से अधिक है।

 

बड़ी उपलब्धि

ड़क परिवहन एवं शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने कुछ दिन पहले इस बारे में ट्वीट करके जानकारी दी थी कि आजादी के बाद पहली बार अंतर्देशीय जलपोत पर कंटेनर की ढुलाई हो रही है। पेप्सीको गंगा नदी के रास्ते जलपोत एमवी आरएन टैगोर के जरिए अपने 16 कंटेनर को कोलकाता से वाराणसी ला रही है। उन्होंने इसे बड़ी उपलब्धि बताया था। उन्होंने यह भी जानकारी दी थी कि वाराणसी के मल्टी मॉडल टर्मिनल को रिकार्ड समय में पूरा किया गया है। कुछ समय पहले ही केंद्र सरकार ने वाराणसी से हल्दिया तक गंगा में कमर्शियल यातायात सेवा शुरू करने का वादा किया था।

 

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केरल में बनेगा सबसे बड़ा ड्राई पोर्ट

 

केंद्रीय शिपिंग मंत्रालय के मुताबिक केरल के कोचीन पोत-कारखाने में भारत के सबसे बड़े शुष्क बंदरगाह की स्थापना की जाएगी। यह शुष्क बंदरगाह सागरमाला के अंतर्गत “मेक-इन-इण्डिया” पहल को गतिमान बनाएगा एवं वैश्विक पोत निर्माण में भारत के हिस्से में प्रतिशत की वृद्धि करेगा। वर्तमान में वैश्विक पोत निर्माण में भारत की साझेदारी 0.66 % की है। भारत में वाणिज्यिक पोत निर्माण उद्योग 3,200 करोड़ रुपये का है एवं प्राथमिक रूप से इसका ज़ोर छोटे-मध्यम आकार के जलयानों और कार्गो वाहकों पर रहता है। वर्तमान में कोचीन पोत-कारखाने में दो शुष्क बंदरगाह हैंएक का उपयोग मुख्यतः 255 x 43 x 9 मीटर आकार तथा 1,10,000 डीडबल्यूटी क्षमता वाले जहाजों का निर्माण करने में एवं दूसरे का उपयोग 270x 45 x 12 मीटर आकार तथा 1,25,000 डीडबल्यूटी की क्षमता वाले जहाज की मरम्मत करने में होता है। नये शुष्क बंदरगाह का निर्माण 1799 करोड़ रुपये की लागत में हो रहा है। यह 310 मीटर लंबा, 75 मीटर चौड़ा, 13 मीटर की गहराई वाला एवं 9.5 मीटर की शुष्कता वाला होगा । शुष्क बंदरगाह की रचना जहाजों के निर्माण एवं मरम्मत दोनों के अनुरूप होगीएवं यह 600 टी/एम का भार वहन करने में सक्षम होगा। यह अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों से लैस होगा। बंदरगाह में जल शुद्धिकरण संयत्र एवं ग्रीन बेल्ट डेव्हेलपमेंट होगा। इस शुष्क बंदरगाह के होने से कोचीन पोत-कारखाना विशेष एवं तकनीकी रूप से आधुनिक बड़े जलयान जैसे एलएनजी कैरियरड्रिल शिपजैक अप रिगविशाल ड्रेजरभारतीय नौसेना के लिये एयरक्राफ्ट कैरियर एवं उच्च स्तरीय शोध के जलयान बनाने में सफल होगा। इससे कोचीन के दक्षिण पूर्व एशिया में जहाजों के रखरखाव के मामले में एक ही स्थान पर एक सामुद्रिक केंद्र बनने में सहायता भी मिलेगी।

 

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2021 तक परियोजना होगी पूरी

 

मंत्रालय के मुताबिक परियोजना के मई 2021 तक पूरा होने एवं लगभग 2000 लोगों के लिये रोज़गार के अवसर पैदा करने की संभावना है। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्रशासन के लिये सीएसएल द्वारा 500 यात्रियों की क्षमता वाले दो जलयान भी इस अवसर पर प्रारंभ किए जाएंगे। इन जलयानों से द्वीपों के मध्य आपसी सम्पर्क की बेहतरी करने में सहायता मिलेगी। 

 
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