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मां की ममता ने मुकेश को अनिल की मदद के लिए मनाया, भविष्य में साझेदार हो सकते हैं दोनों भाई 

फिर भी बीएसएनएल का बकाया चुकाने के लिए मुकेश अंबानी द्वारा पैसे देने की उम्मीद कम

Still less hope of paying money for the payment of BSNL by Mukesh Ambani

कभी एक दूसरे के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले अंबानी बंधु आखिर फिर से एक दूसरे के नजदीक कैसे आए? यह सवाल इन दिना उद्योग जगत में खासा घूम रहा है। यही नहीं चर्चा यह भी है कि क्या मुकेश आगे भी अनिल की मदद करते रहेंगे? मुकेश और अनिल के बीच यह अदावत क्या अभी शुरू हुई या फिर पहले से कोई और वजह इनके करीब आने की है।

 

 

नई दिल्ली. कभी एक दूसरे के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने वाले अंबानी बंधु आखिर फिर से एक दूसरे के नजदीक कैसे आए? यह सवाल इन दिना उद्योग जगत में खासा घूम रहा है। यही नहीं चर्चा यह भी है कि क्या मुकेश आगे भी अनिल की मदद करते रहेंगे? मुकेश और अनिल के बीच यह अदावत क्या अभी शुरू हुई या फिर पहले से कोई और वजह इनके करीब आने की है। अंबानी बंधुओं से जुड़े सूत्र बताते हैं कि दोनों भाईयों के बीच कड़वाहट दूर करने में उनकी मां कोकिला बेन सूत्रधार बनी हैं। उनकी ममता की वजह से ही मुकेश का दिल पसीजा। इसमें और मदद जब हुई तब मुकेश के बच्चों ईशा व आकाश  की शादी में अनिल ने पूरी जिम्मेदारी उठाई। दोनों के बीच तब ही से तल्खी कम होने के संकेत मिले थे। दोनों भाइयों के बिजनेस पर नजर रखने वाले एक इंडस्ट्री लीडर ने कहा, अनिल के बयान की भाषा मेल-मिलाप वाली है। यह रिश्तों की नई शुरुआत हो सकती है। दोनों भाई आगे और करीब आ सकते हैं।

नहीं मिलती मदद तो जाना पड़ता जेल

गौरतलब है कि  अनिल अंबानी की कंपनी आरकॉम ने सोमवार को स्वीडिश कंपनी एरिक्सन को 459 करोड़ रुपए का बकाया चुकाया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए अनिल को मंगलवार, 19 मार्च तक का समय दिया था। वर्ना जेल भेजने की चेतावनी दी थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज के अंदरुनी सूत्रों के अनुसार संभवत: मां कोकिलाबेन ने मुकेश को पैसे देने के लिए मनाया। एरिक्सन के पैसे चुकाने के बाद अनिल अंबानी ने भाई मुकेश और भाभी नीता अंबानी का आभार व्यक्त किया था।  

Bsnl मामले में शायद न मिले मदद 

सूत्र बताते हैं कि  मुकेश आगे भी अनिल का बकाया चुकाएं, इसमें संशय है।  हां मुकेश के संबंधों को जरूर अनिल भुना सकते हैं। बीएसएनएल को आरकॉम से 700 करोड़ रुपए वसूलने हैं। इसके लिए उसने एनसीएलटी में जाने की धमकी दी है। हो सकता है वह इस हफ्ते याचिका भी दायर कर दे। अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के प्रमुख अश्विन पारेख कहते हैं, 'मुझे नहीं लगता कि मुकेश बीएसएनएल का बकाया चुकाने के लिए आगे आएंगे। क्योंकि यह एरिक्सन की तरह आपराधिक मामला नहीं है। एरिक्सन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनिल को अवमानना का दोषी माना था और जेल भेजने की चेतावनी दी थी।'  आरकॉम ने खुद एनसीएलटी में दिवालिया याचिका लगाई है। यहां अब उसे पूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा। निवेश सलाहकार एसपी तुलसियान ने कहा, 'आरकॉम पर 11 बैंकों का 48,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। एनसीएलटी पहले बैंकों को यह विचार करने के लिए समय देगा कि वे कर्ज का कुछ हिस्सा छोड़ने (हेयर कट) के लिए राजी हैं या नहीं। अगर बैंक इसके लिए सहमत नहीं हुए तब जाकर एनसीएलटी कंपनी खत्म करने की कार्रवाई शुरू करेगा। इसके लिए वह बोली मंगवाएगा। उम्मीद है रिलायंस जियो इसमें शिरकत करेगी।'  एरिक्सन का भुगतान करने के बाद आरकॉम ने जियो के साथ स्पेक्ट्रम, फाइबर और टावर आदि बेचने की डील खत्म करने की भी घोषणा की। एनसीएलटी में मुकेश अंबानी की कंपनी जियो आरकॉम के एसेट के लिए बोली लगाती है तो यहां उसे ये एसेट सस्ते में मिल सकते हैं। 

ऐसा भी था: अनिल अंबानी 2010 में मुकेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट तक गए थे 

मुकेश और अनिल के पिता धीरूभाई की मौत 2002 में हुई थी। उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी। दोनों भाइयों में विवाद बढ़ा तो 2006 में वे अलग हो गए। बिजनेस के बंटवारे के बाद भी तल्खी कम नहीं हुई। पावर का बिजनेस अनिल के पास और प्राकृतिक गैस का मुकेश के पास था। मुकेश पावर प्लांट के लिए गैस की कीमत बढ़ाना चाहते थे। इसके खिलाफ अनिल सुप्रीम कोर्ट तक गए। लेकिन कोर्ट ने मई 2010 में मुकेश के पक्ष में फैसला दिया। यह अनिल के लिए पहला बड़ा झटका था। दोनों भाइयों में एक और समझौता हुआ था कि मुकेश कुछ समय तक टेलीकॉम बिजनेस में नहीं आएंगे। 2010 में यह समझौता खत्म हुआ तो मुकेश ने 2016 में जियो लांच किया। यह अनिल के लिए दूसरा बड़ा झटका था। क्योंकि जियो ने सर्विसेज के जो रेट रखे उससे दूसरी सभी टेलीकॉम कंपनियों का मुनाफा घटने लगा। 
 

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