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कूड़े से कमा सकते हैं हजारों रुपए, नहीं लगानी होगी पूंजी

देश के टॉप बिजनेस स्कूल्स भी छात्राें को कचरा प्रबंधन की शिक्षा देने लगे हैं

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नई दिल्ली। कहीं भी कूड़े का ढेर देखकर आप मुंह फेर लेते होंगे, लेकिन आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इसी कूड़े से आप हजारों रुपए कमा सकते हैं। यह कचरा जो आपके हमारे घरों से निकलता है और सड़कों और लैंडफिल्स में डंप कर दिया जाता है, यह असल में किसी खजाने से कम नहीं है। अगर इसका सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो न सिर्फ पर्यावरण काे फायदा होगा बल्कि इससे अच्छी-खासी कमाई भी की जा सकती है। यही वजह है कि देश के टॉप बिजनेस स्कूल्स भी छात्राें को कचरा प्रबंधन की शिक्षा देने लगे हैं। कई संस्थाएं अपने-अपने स्तर पर कचरे से आमदनी कर रही हैं। कई शहरों के नगर निगम भी कूड़े से कमाई की योजनाओं पर काम कर रहे हैं।

 

डेली डंप कंपनी

 

बेंगलुरु की यह कंपनी घरों के कूड़े का निस्तारण तो करती ही है साथ ही इससे मुनाफा भी कमाती है। कंपनी में मिट्‌टी का खास तरह का गमला बनाया जाता है, जिसमें कई सारे छिद्र होते हैं। कंपनी इनकी सप्लाई करती है। इन गमलों में किचिन से निकलने वाला कूड़ा डालने के बाद इसपर एक पॉवडर छिड़कना पड़ता है। 40 दिनों में यह कचरा खाद बन जाता है। इसके बाद कंपनी इस खाद को लोगों से खरीदकर बेचती है। लोग खुद भी इस खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं या इसे बेच सकते हैं।

 

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लोहा बेचकर हो सकती है बड़ी कमाई

 

मेरठ में नगर निगम कचरे के ढेर में से प्लास्टिक और लोहे को अलग करके बेचने की योजना बना रहे हैं। शहर से रोजाना निकलने वाले 800 मीट्रिक टन कूड़े में प्लास्टिक और लोहा अलग करके बेचा जाएगा। जो कूड़ा बचेगा उसकी कंपोस्ट खाद बनाई जाएगी।

 

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गाजीपुर का कूड़ा कराएगा करोड़ाें की आमदनी

 

दिल्ली के गाजीपुर में बना डंपिंग ग्राउंड अपनी क्षमता से कहीं अधिक कचरा समेटे हुए है। तकरीबन 60 फीसद ऊंचे इस कूड़े के पहाड़ से पूर्वी दिल्ली नगर निगम कमाई की योजना बना रहा है। यहां पर जर्मन तकनीक से एक ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जाने की परियाेजना पर काम चल रहा है। इस प्लांट के लगने के बाद इस कूड़े से बिजलीपानी और ईंधन बनाया जा सकेगा। इससे ईस्ट दिल्ली एमसीडी को सालाना 700 करोड़ रुपए की कमाई होने की उम्मीद है। इस प्लांट की लागत 4,480 करोड़ रुपए होगी और यह तीन एकड़ जमीन पर लगेगा। शुरुआत में इसमें सिर्फ 200 मीट्रिक टन कचरा शोधित किया जाएगा जिससे तकरीबन 50 मेगावॉट बजली पैदा होगी।

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