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भारतीय फोन कंपनियों पर चीन का कड़ा प्रहार : स्वदेशी मोबाइल कंपनियों के कारोबार को म्यूट कर डाला

Xiaomi, Oppo और Vivo ने माइक्रोमैक्स, Lava व Intex के कारोबार पर फेरा पानी

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेक इन इंडिया जैसी महत्वाकांक्षी योजना के बावजूद स्वदेशी मोबाइल कंपनियों को चीनी मोबाइल कंपनियों ने खासा नुकसान पहुंचाया है। इतना कि वे अब तबाह होने की कगार पर आ गई हैं। Xiaomi , Oppo और Vivo ने भारत की तीन सबसे बड़ी कंपनियां माइक्रोमैक्स, Lava व Intex का मार्केट शेयर हड़प लिया है। महज एक साल में ही तीनों भारतीय कंपनियों का कारोबार 22 प्रतिशत कम हो गया है। यह चीनी कंपनियों की कुल बिक्री के एक चौथाई से भी कम है। Xiaomi जैसी चीनी कंपनियां भारत के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत फोन के असेंबलिंग का भी काम कर रही है।

 

चीनी 46 हजार करोड़ तो भारतीय कंपनियां सिर्फ 10 हजार करोड़ पर सिमटी 

 

बिजनेस इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म वेरेटेक इंटेलिजेंस को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से मिले आंकड़ों के मुताबिक माइक्रोमैक्स, इंटेक्स और लावा का कुल राजस्व 2017-18 में 22% गिरकर 10,498 करोड़ रुपए रहा। इसके विपरीत शीर्ष तीन चीनी ब्रांडों -Xiaomi, Oppo और Vivo का संयुक्त कारोबार वित्त वर्ष 17 से लगभग दोगुना 46,120 करोड़ रुपए रहा। जबकि एक साल पहले तक भारतीय कंपनियां बेहतर स्थिति में थीं। चीनी कंपनियों के मुकाबले भारतीय कंपनियों की मुनाफे में 70 फीसदी हिस्सेदारी थी। 

 

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सबसे मुश्किल होगा यह साल 


वित्त वर्ष 19 में  भारतीय फोन निर्माताओं के राजस्व में गिरावट की संभावना ज्यादा होगी।  JioPhone, रिलायंस  4 जी फीचर फोन, किफायती डेटा बंडलिंग की वजह से  चीनी ब्रिगेड स्मार्टफोन में अपना वर्चस्व मजबूत करेगी।   हांगकांग स्थित काउंटरपॉइंट टेक्नोलॉजी मार्केट रिसर्च के एक विश्लेषक कर्ण चौहान ने कहा कि चीनी ब्रांडों से मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों की बिक्री  में हिस्सेदारी खोने का चलन  वर्ष 2019 तक जारी रहेगा। फिर भी, माइक्रोमैक्स और लावा एकमात्र ब्रांड हैं जो एंट्रीलेवल स्मार्टफोन सेगमेंट में अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। 

 

 

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यह है तीनों कंपनियों की स्थिति 


1.  वर्ष 2017-18 में माइक्रोमैक्स इंफॉर्मेटिक्स का राजस्व 22% घटकर 4,345 करोड़ रुपये रह गया, जबकि लाभ 72% घटकर 103 करोड़ रुपये रह गया।
2.  इसी अवधि में लावा इंटरनेशनल के राजस्व 10% घटकर  3,290 करोड़ रह गया और शुद्ध लाभ 46% गिरकर 71 करोड़ रुपये हो गया। 
3.  इंटेक्स का राजस्व 32% से 2,862 करोड़ हो गया, जबकि लाभ 90% से महज 13 करोड़ रु।

 

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मार्जिन की वजह से अभी भी कुछ उम्मीद बाकी 

 

575 से अधिक स्टोर के साथ दक्षिण भारत की प्रमुख सेलफोन रिटेल चेन संगीता मोबाइल्स के एमडी सुभाष चंद्रा के अनुसार भारतीय ब्रांडों में आज जो कुछ भी बिक रहा है वह केवल इसलिए है क्योंकि  रिटेलर को चीनी ब्रांडों की तुलना में थोड़ा बेहतर मार्जिन है। इसलिए वह ग्राहकों को भारतीय ब्रांड वाले फोन बेचने में दिलचस्पी लेता है। 

 

 

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जानिए दो वजहें जिनसे चीनी आगे निकले 


1. ज्‍यादा प्रोडक्‍शन का मि‍ला फायदा  
भारतीय कंपनि‍यां जहां सि‍र्फ भारत के लि‍ए फोन का नि‍र्माण कर रही थीं। वहीं, चाइनीज कंपनि‍यां ग्‍लोबल लेवल पर फोन लॉन्‍च कर कई गुना ज्‍यादा डि‍वाइस का प्रोडक्‍शन करती हैं। ऐसे में ज्‍यादा प्रोडक्‍शन के चलते उन्‍हें मार्जि‍न भी ज्‍यादा मि‍लता है। ये एक बड़ा कारण है कि भारतीय कंपनि‍यां चाइनीज कंपनि‍यों को टक्‍कर नहीं दे पाईं। 
 
2. Jio ने तोड़ दी कमर   
2016 में रि‍लायंस ने जि‍यो 4G लॉन्‍च कि‍या और लोगों को अनलि‍मि‍टेड फ्री इंटरनेट डाटा दि‍या। ऐसे में स्‍मार्टफोन मार्केट में बूम आ गया। इसका नुकसान भारतीय मोबाइल कंपनि‍यों को हुआ 3G फोन मार्केट से बाहर हो गए। भरतीय कंपनि‍यां इंतजार में थीं कि 3G फोन के लि‍ए मार्केट में स्‍पेस बनेगा, लेकि‍न ऐसा नहीं हुआ। 

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