Home » Business » TradeArcelormittal steel to acquire essar steel, will set up first own steel plant in India

दिवाली पर लक्ष्मी निवास मित्तल की मनोकामना पूरी हुई, 40 साल के कारोबारी सफर के बाद भारत में होगा अपना स्टील प्लांट

पिछले 8 सालों से भारत में स्टील प्लांट लगाने की कोशिश में थे मित्तल

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नई दिल्ली।

बैंक कर्ज में डूबी एस्सार स्टील इंडिया लिमिटेड के अधिग्रहण के लिए दुनिया की सबसे बड़ी स्टील विनिर्माता कंपनी आर्सेलर मित्तल (ArecelorMittal) को चुन लिया गया है। एस्सार स्टील पर बैंकों का 49,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। आर्सेलरमित्तल ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है।  बयान में कहा गया है कि एस्सार स्टील (Essar) के लिए उसकी योजना उत्पादकता बढ़ाने के साथ मुनाफा बढ़ाना है। बयान के मुताबिक कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने आर्सेलर मित्तल और उसके साझीदार जापान के निप्पन स्टील एंड सुमितोमो मेटल कॉरपोरेशन को आशय पत्र जारी कर उन्हें ‘सफल आवेदक’ घोषित किया है।

यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बीते गुरुवार को एस्सार स्टील के प्रवर्तकों (शेयरहोल्डर्स) ने कंपनी पर अपना नियंत्रण बनाये रखने की अंतिम कोशिश के तहत बैंकों का सारा बकाया चुकाने के लिए 47,507 करोड़ रुपये शुरुआत में नकद चुकाने की पेशकश की। शुरुआती भुगतान समेत कुल 54,389 करोड़ रुपये का भुगतान करने की पेशकश की गई। प्रवर्तकों ने यह प्रस्ताव कंपनी को दिवाला एवं ऋणशोधन प्रक्रिया से बाहर निकालने के लिये दिया था।

 

क्यों अहम है एस्सार स्टील मित्तल के लिए

आर्सेलरमित्तल के चेयरमैन एवं सीईओ लक्ष्मी निवास मित्तल दुनिया के 60 देशों में कारोबार करते हैं। लेकिन 40 सालों के कारोबारी सफर के बाद भी उनके पास भारत में पूर्ण स्वामित्व वाला स्टील प्लांट नहीं है। कंपनी एस्सार स्टील को खरीद कर इस कमी को पूरा करना चाहती थी। एस्सार की नीलामी के फैसले के साथ ही मित्तल का सपना साकार होने जा रहा है।

 

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क्या कहा था मित्तल ने

दैनिक भास्कर के साथ इंटरव्यू में मित्तल ने कहा था कि वह भारत में स्टील प्लांट लगाने के लिए पिछले 8  सालों से कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया था कि वह भारत में काफी दिनों से स्टील प्लांट लगाना चाह रहे हैं। उन्होंने बताया था कि कई बार तो उनके दूसरे देशों के मित्र यही समझते हैं कि भारत में भी उनका (मित्तल का) प्लांट जरूर होगा। उन्होंने बताया था कि जब उनके मित्र इस बारे में (भारत में स्टील प्लांट के बारे में) पूछते है तब वह बहुत दुविधा में पड़ जाते हैं। हालांकि पंजाब में पीपीपी मॉडल पर मित्तल की रिफाइनरी पिछले 10 साल से चल रही है। यहां कंपनी 22,000 करोड़ के निवेश के साथ इसका और विस्तार कर रही हैं।

 

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भारत के कारोबारी माहौल को मित्तल ने सराहा

दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में मित्तल ने कहा था कि अभी इंडिया में बिजनेस करना आसान लग रहा है जो पहले नहीं था। इज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में भारत का स्थान बेहतर हुआ है। कई चीजों की जटिलताएं खत्म हो गई हैं। जीएसटी आने से भी कारोबारी दुनिया में भारत की छवि बदली है।

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