आईआईटी टेक्नोलॉजी का कमाल, पराली से बन रहे हैं कप-प्लेट, गांव में रोजगार ही रोजगार

  • पराली को जलाने की नौबत न आए इसलिए इससे बना रहे हैं इको फ्रेंडली कप-प्लेट
  • इन तीनों ने ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार की है, जिसकी मदद से पराली को बायोडिग्रेडेबल कटलरी (कप, प्लेट आदि) में बदला जा सकता है।
  • इन्हें भारत सरकार की ओर से एक साल की डिजाइन इनोवेशन फैलोशिप और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के निधि सीड सपोर्ट से फंडिंग मिली।

Money Bhaskar

Apr 15,2019 04:09:00 PM IST

नई दिल्ली। हर साल सर्दियों की शुरुआत में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में लाखों टन पराली जला दी जाती है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, इस मौसम में अब तक पराली जलाने की पंजाब में 700 और हरियाणा में 900 से अधिक घटनाओं का पता चला है। नासा के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाने के कारण धुएं और धुंध का गुबार महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और ओडिशा तक फैल रहा है। इससे राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली की आबो-हवा भी खराब होती है। नासा अर्थ ऑब्जर्वेटरी के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 80 लाख टन पराली जलाई जाती है। पराली जलाने से नाइट्रोजन ऑक्साइड, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड जैसी हानिकारक गैस हवा में फैलती है। ये दमा, ब्रोंकाइटिस के अलावा नर्वस सिस्टम से जुड़ी कई बीमारियों का कारण बनती हैं।

प्लेसमेंट छोड़ शुरू किया स्टार्टअप

आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) से बीटेक करने वाले तीन स्टूडेंट्स अंकुर कुमार, कणिका प्रजापत और प्राचीर दत्ता ने पराली की इस समस्या को दूर करने का एक बायो फ्रेंडली तरीका ईजाद किया है। इन तीनों ने ऐसी टेक्नोलॉजी तैयार की है, जिसकी मदद से पराली को बायोडिग्रेडेबल कटलरी (कप, प्लेट आदि) में बदला जा सकता है। इनकी टेक्नोलॉजी पराली की ही तरह अन्य एग्रो वेस्ट को कटलरी में बदल सकती है। यह बायोडिग्रेडेबल कटलरी प्लास्टिक से बने कप-प्लेट की जगह ले सकती है।

प्लेसमेंट को छोड़ स्टार्टअप शुरू किया

इस स्टार्टअप को शुरुआती सहूलियत आईआईटी दिल्ली से ही मिली है। छात्रों को स्टार्टअप शुरू करने में मदद के लिए आईआईटी दिल्ली में फाउंडेशन फॉर इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (एफआईटीटी) नाम की सोसाइटी रजिस्टर्ड है। यह फाउंडेशन छात्रों को फंडिंग हासिल करने में मदद, ऑपरेशनल गाइडलाइन मुहैया कराने और मार्केटिंग के तरीके बताने का काम करता है। क्रिया लैब्स के तीनों फाउंडरों ने अपने प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए आईआईटी दिल्ली में हुए प्लेसमेंट को भी छोड़ दिया था। इन्हें भारत सरकार की ओर से एक साल की डिजाइन इनोवेशन फैलोशिप और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के निधि सीड सपोर्ट से फंडिंग मिली। इसकी मदद से इन्होंने अपना प्रोटोटाइप तैयार किया।

साल के अंत में पंजाब के लुधियाना में पहली प्रोसेसिंग यूनिट लगाएगी

क्रिया लैब्स के सीईओ अंकुर बताते हैं, ‘हमारा लक्ष्य पराली को कॉमर्शियल वैल्यू देना है। जब किसानों को इससे फायदा होगा तो वे इसे जलाएंगे नहीं। इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार का सृजन भी होगा। अंकुर, कणिका और प्राचीर ने अपनी टेक्नोलॉजी का पेटेंट भी करा लिया है। क्रिया लैब्स इस साल के अंत में पंजाब के लुधियाना में पहली प्रोसेसिंग यूनिट लगाएगी। इससे वहां के लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है।


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